{"_id":"5ebd793e8ebc3e90a9391967","slug":"khandasari-units-are-no-less-than-sugar-mills-if-they-get-cooperation-lakhimpur-news-bly405843798","type":"story","status":"publish","title_hn":"सहयोग मिले तो खांडसारी इकाइयां चीनी मिलों से कम नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सहयोग मिले तो खांडसारी इकाइयां चीनी मिलों से कम नहीं
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी। जनपद में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है, जिससे करीब पांच लाख किसान परिवार अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। गन्ने की पेराई के लिए नौ चीनी मिलें है और 20 खांडसारी (क्रशर) इकाइयां संचालित हैं, जबकि चार नई इकाइयां अगले वर्ष से गन्ने की पेराई प्रारंभ कर देंगी। वहीं गांवों में गुड़-राब बनाने वाले कोल्हुओं (कुटीर उद्योग) की संख्या भी करीब 1500 बताई जा रही है। चीनी मिलों में गन्ना बेचने पर किसान को सरकारी समर्थन मूल्य के हिसाब से भुगतान मिलता है, लेकिन खांडसारी और कोल्हुओं पर किसानों को समर्थन मूल्य से करीब 100 रुपये प्रति क्विंटल कम रेट पर गन्ना बेचना पड़ता है। जबकि यहां बनाई गई चीनी और गुड़ बाजार में मिल के से निकली चीनी को मूल्य के मामले में बराबर की टक्कर देते हैं।
खांडसारी इकाइयों में भी चीनी मिलों की भांति चीनी बनाई जाती है, जिनकी संख्या 20 साल पहले करीब 150 थी, जो धीरे-धीरे कम हो गई। अब फिर से यह उद्योग नई तकनीक के सहारे चीनी मिलों को टक्कर देने में जुटा है। इस पेराई सत्र में 20 खांडसारी इकाइयों ने दो करोड़ क्विंटल गन्ना की पेराई की है, जिससे 14.43 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ है। जो दो सहकारी मिलों संपूर्णानगर और बेलरायां के संयुक्त उत्पादन के बराबर है। प्रदेश सरकार ने खांडसारी उद्योग को प्रमोट करने के लिए अब तक इसे जीएसटी से मुक्त रखा है और नए उद्यमियों के लिए लाइसेंस नीति को भी सरल किया गया है। इससे जनपद में चार नई खांडसारी इकाइयां निर्माणाधीन हैं, जिनमें अगले पेराई सत्र में गन्ने की खरीद प्रारंभ हो जाएगी। खांडसारी इकाइयों के मालिकों की माने तो ओपेन पैन (खुली कढ़ाही) में चीनी का परता कम होने से उत्पादन कम मिल पाता है, जबकि चीनी मिलों में वैक्यूम पैन (बंद कड़ाही) होने के कारण चीनी परता अच्छा मिलता है। साथ ही चीनी की क्वालिटी अच्छी होती है। खांडसारी इकाइयों में भी वैक्यूम पैन लगाने की मांग अर्से से होती रही है, लेकिन सरकार ने अब तक खांडसारी इकाइयों में इसके उपयोग की अनुमति नहीं दी है। यदि खांडसारी इकाइयों में वैक्यूम पैन लगाने की अनुमति जरूर मिलनी चाहिए, जिससे चीनी मिलों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। वहीं चीनी परता और क्वालिटी अच्छी होने से किसानों का अच्छा रेट मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। साथ ही इकाइयों की क्षमता बढ़ने से ज्यादा श्रमिकों को रोजगार मिल सकता है और जनपद आत्मनिर्भर भारत अभियान की ओर एक और कदम बढ़ा देगा।
--
दो खांडसारी इकाइयां रही टॉप पर
सभी खांडसारी इकाइयों में पेराई सत्र समाप्त हो चुका है, जिसमें इस बार दो इकाइयों ने रिकार्ड पेराई की है। खांडसारी अधिकारी सीएम उपाध्याय ने बताया कि बेलापुरवा स्थित स्वास्तिक शुगर इंडस्ट्रीज ने 13.52 लाख क्विंटल और लक्ष्मी शुगर इंडस्ट्रीज खरवहिया ने 13.32 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की है, जो रिकार्ड है।
विज्ञापन
--
कोल्हुओं से भी रोजगार सृजन की बड़ी उम्मीद
जनपद में गन्ने से गुड़ और राब बनाने का कुटीर उद्योग बड़े पैमाने संचालित है, जिससे इस वर्ष करीब 1500 कोल्हुओं पर गुड़-राब का उत्पादन हुआ है। अभी यह कुटीर उद्योग किसी विभाग के नियंत्रण में नहीं है, जिससे इसकी ओर न तो अधिकारियों की ध्यान है और न ही सरकार का। ऐसे में इस कुटीर उद्योग को आर्थिक पैकेज में स्थान मिल जाए, तो इसकी बेहतरी से किसानों और श्रमिकों को भी लाभ मिल सकेगा।
--
खांडसारी उद्योग से जनपद के विकास को गति दी जा सकती है। इकाइयों में वैक्यूम पैन लगाने की इजाजत मिल जाए, तो चीनी परता बढ़िया होने से उत्पादन बढ़ेगा। इससे लाखों किसानों को अच्छा मूल्य मिलेगा और श्रमिकों को भी अपने गांव के आसपास ही रोजगार के अवसर मिलेंगे।
-राजे गुप्ता, खांडसारी उद्यमी
--
एक इकाई पर 20 करोड़ रुपये लागत आती है, जिसके लिए बैंकों से ऋण मिलने में मुश्किलें आ रही हैै। सरकार को चाहिए कि इस ओर भी ध्यान दें, जिससे जनपद में कई नई इकाइयां लगाई जा सकती है। हमने भी एक नई इकाई लगाने के लिए आवेदन किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब आर्थिक पैकेज से कुछ बेहतरी की उम्मीद है।
-संजय गुप्ता, खांडसारी उद्यमी
--
जनपद में गन्ने का अच्छा उत्पादन रहने से इस बार खांडसारी इकाइयों ने रिकार्ड पेराई की है। आगे भी खांडसारी उद्योग अच्छा उत्पादन करने की क्षमता बढ़ा सकता है। इकाइयों को प्रमोट करने के लिए इन्हें जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा भी समय-समय पर सरकार से सुविधाएं दी जाती है।
-सीएम उपाध्याय, खांडसारी अधिकारी
विज्ञापन
खांडसारी इकाइयों में भी चीनी मिलों की भांति चीनी बनाई जाती है, जिनकी संख्या 20 साल पहले करीब 150 थी, जो धीरे-धीरे कम हो गई। अब फिर से यह उद्योग नई तकनीक के सहारे चीनी मिलों को टक्कर देने में जुटा है। इस पेराई सत्र में 20 खांडसारी इकाइयों ने दो करोड़ क्विंटल गन्ना की पेराई की है, जिससे 14.43 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ है। जो दो सहकारी मिलों संपूर्णानगर और बेलरायां के संयुक्त उत्पादन के बराबर है। प्रदेश सरकार ने खांडसारी उद्योग को प्रमोट करने के लिए अब तक इसे जीएसटी से मुक्त रखा है और नए उद्यमियों के लिए लाइसेंस नीति को भी सरल किया गया है। इससे जनपद में चार नई खांडसारी इकाइयां निर्माणाधीन हैं, जिनमें अगले पेराई सत्र में गन्ने की खरीद प्रारंभ हो जाएगी। खांडसारी इकाइयों के मालिकों की माने तो ओपेन पैन (खुली कढ़ाही) में चीनी का परता कम होने से उत्पादन कम मिल पाता है, जबकि चीनी मिलों में वैक्यूम पैन (बंद कड़ाही) होने के कारण चीनी परता अच्छा मिलता है। साथ ही चीनी की क्वालिटी अच्छी होती है। खांडसारी इकाइयों में भी वैक्यूम पैन लगाने की मांग अर्से से होती रही है, लेकिन सरकार ने अब तक खांडसारी इकाइयों में इसके उपयोग की अनुमति नहीं दी है। यदि खांडसारी इकाइयों में वैक्यूम पैन लगाने की अनुमति जरूर मिलनी चाहिए, जिससे चीनी मिलों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। वहीं चीनी परता और क्वालिटी अच्छी होने से किसानों का अच्छा रेट मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। साथ ही इकाइयों की क्षमता बढ़ने से ज्यादा श्रमिकों को रोजगार मिल सकता है और जनपद आत्मनिर्भर भारत अभियान की ओर एक और कदम बढ़ा देगा।
विज्ञापन
--
दो खांडसारी इकाइयां रही टॉप पर
सभी खांडसारी इकाइयों में पेराई सत्र समाप्त हो चुका है, जिसमें इस बार दो इकाइयों ने रिकार्ड पेराई की है। खांडसारी अधिकारी सीएम उपाध्याय ने बताया कि बेलापुरवा स्थित स्वास्तिक शुगर इंडस्ट्रीज ने 13.52 लाख क्विंटल और लक्ष्मी शुगर इंडस्ट्रीज खरवहिया ने 13.32 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की है, जो रिकार्ड है।
विज्ञापन
--
कोल्हुओं से भी रोजगार सृजन की बड़ी उम्मीद
जनपद में गन्ने से गुड़ और राब बनाने का कुटीर उद्योग बड़े पैमाने संचालित है, जिससे इस वर्ष करीब 1500 कोल्हुओं पर गुड़-राब का उत्पादन हुआ है। अभी यह कुटीर उद्योग किसी विभाग के नियंत्रण में नहीं है, जिससे इसकी ओर न तो अधिकारियों की ध्यान है और न ही सरकार का। ऐसे में इस कुटीर उद्योग को आर्थिक पैकेज में स्थान मिल जाए, तो इसकी बेहतरी से किसानों और श्रमिकों को भी लाभ मिल सकेगा।
--
खांडसारी उद्योग से जनपद के विकास को गति दी जा सकती है। इकाइयों में वैक्यूम पैन लगाने की इजाजत मिल जाए, तो चीनी परता बढ़िया होने से उत्पादन बढ़ेगा। इससे लाखों किसानों को अच्छा मूल्य मिलेगा और श्रमिकों को भी अपने गांव के आसपास ही रोजगार के अवसर मिलेंगे।
-राजे गुप्ता, खांडसारी उद्यमी
--
एक इकाई पर 20 करोड़ रुपये लागत आती है, जिसके लिए बैंकों से ऋण मिलने में मुश्किलें आ रही हैै। सरकार को चाहिए कि इस ओर भी ध्यान दें, जिससे जनपद में कई नई इकाइयां लगाई जा सकती है। हमने भी एक नई इकाई लगाने के लिए आवेदन किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब आर्थिक पैकेज से कुछ बेहतरी की उम्मीद है।
-संजय गुप्ता, खांडसारी उद्यमी
--
जनपद में गन्ने का अच्छा उत्पादन रहने से इस बार खांडसारी इकाइयों ने रिकार्ड पेराई की है। आगे भी खांडसारी उद्योग अच्छा उत्पादन करने की क्षमता बढ़ा सकता है। इकाइयों को प्रमोट करने के लिए इन्हें जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा भी समय-समय पर सरकार से सुविधाएं दी जाती है।
-सीएम उपाध्याय, खांडसारी अधिकारी