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कांवड़िये की मौत का मामला: घर पहुंचा शव तो बिलख उठे परिजन
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मझगईं के मृतक रितेश का फाइल फोटो।
मझगईं। कस्बा के कांवड़ियों के जत्थे के साथ छोटी काशी गोला जा रहे 12 साल के कांवड़िये रितेश की ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे दबने से शनिवार की देर रात मौत हो गई थी। रविवार को पीएम होने के बाद जब शव घर पहुंचा तो परिजन में कोहराम मच गया। बहन-भाईयों के साथ पिता का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
मझगईं कस्बा निवासी स्वामीदयाल के चार बेटियों और तीन पुत्रों में सबसे छोटा रितेश था। जो शनिवार को मझगईं से गोला जा रही कांवड़ यात्रा में जा रहा था। देर रात भीरा से पहले सांई बाबा मंदिर के पास अचानक ट्रैक्टर-ट्राली की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई थी। उसकी मौत से घर में कोहराम मच गया। बहन, भाई और पिता बुरी तरह से बिलख उठे। उनको देखकर आसपास के लोगों की आंखें भी नम हो गईं। मृतक रितेश की मां की तीन साल पहले ही मौत हो चुकी है।
गरीबी के चलते रितेश होटल पर काम करता था। पिता स्वामीदयाल ने बताया कि गरीबी के चलते कांवड़ यात्रा में भेजने के लिए उनके पास रुपये नहीं थे। रितेश को गोला जाने की जिद थी तो लोगों से रुपये मांगकर हंसी खुशी घर से गोला के लिए निकला था। देर शाम गमगीन माहौल में रितेश का अंतिम संस्कार किया गया। संवाद
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मझगईं कस्बा निवासी स्वामीदयाल के चार बेटियों और तीन पुत्रों में सबसे छोटा रितेश था। जो शनिवार को मझगईं से गोला जा रही कांवड़ यात्रा में जा रहा था। देर रात भीरा से पहले सांई बाबा मंदिर के पास अचानक ट्रैक्टर-ट्राली की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई थी। उसकी मौत से घर में कोहराम मच गया। बहन, भाई और पिता बुरी तरह से बिलख उठे। उनको देखकर आसपास के लोगों की आंखें भी नम हो गईं। मृतक रितेश की मां की तीन साल पहले ही मौत हो चुकी है।
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गरीबी के चलते रितेश होटल पर काम करता था। पिता स्वामीदयाल ने बताया कि गरीबी के चलते कांवड़ यात्रा में भेजने के लिए उनके पास रुपये नहीं थे। रितेश को गोला जाने की जिद थी तो लोगों से रुपये मांगकर हंसी खुशी घर से गोला के लिए निकला था। देर शाम गमगीन माहौल में रितेश का अंतिम संस्कार किया गया। संवाद

मझगईं के मृतक रितेश का फाइल फोटो।
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