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शिक्षामित्र का बीएसए कार्यालय में हंगामा
लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 15 Dec 2014 05:35 PM IST
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विकास खंड मोहम्मदी के प्राथमिक विद्यालय भोगियापुर के एक
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शिक्षामित्र ने अपने परिवार के लोगों के साथ बीएसए कार्यालय में करीब एक
घंटे तक हंगामा किया। शिक्षामित्र ने बीएसए पर मानदेय के लिए दौड़ाने का
आरोप लगाया। हंगामा कर रहे शिक्षामित्र और उसके परिवार वालों को कार्यालय
से बाहर करने के लिए बीएसए को पुलिस बुलानी पड़ी।
शिक्षामित्र आजाद सिंह और उसके परिवार के लोगाें ने सोमवार को बीएसए कार्यालय में जाकर मानदेय दिलाने की मांग के साथ ही हंगामा करना शुरू कर दिया। बीएसए के लाख समझाने पर भी शिक्षामित्र और उसके परिवार के लोग नहीं माने। जब बीएसए ने इन लोगों से कहा कि वे चाहे तो हाईकोर्ट जा सकते हैं विभाग से कुछ भी नहीं किया जा सकता है तो यह लोग बीएसए कक्ष से बाहर आ गए और कार्यालय में हंगामा करना शुरू कर दिया।
शिक्षामित्र और उसके परिवार के लोग भूख हड़ताल की चेतावनी दे रहे थे आखिरकार बीएसए को पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस वालों ने किसी तरह समझाकर शिक्षामित्र और उसके परिवार के लोगों को शांत किया। शिक्षामित्र आजाद सिंह ने बताया कि वर्ष 2002 में उसका चयन हुआ था। मई 2008 तक उसका मानदेय विभाग ने दिया। इसके बाद से मानदेय रुका है। 16 दिसंबर 2011 को मानदेय भुगतान कराने का आदेश कोर्ट ने किया।
शिक्षामित्र ने बताया कि बीएसए डॉ. ओपी राय उसे तीन माह से दौड़ा रहे हैं। इसके बाद भी उसका मानदेय भुगतान नहीं हुआ।
इस संबंध में बीएसए डॉ.ओपीराय ने बताया कि इस मामले को पूर्व में बीएसए देवकी सिंह ने निस्तारित कर दिया था। इसकी आयु अधिक होने के कारण इसकी नियुक्ति रद्द की गई है। जिस मामले में उनके पूर्व के अधिकारी ने कार्रवाई है उसमें वे क्या कर सकते हैं आजाद सिंह चाहे तो हाईकोर्ट जा सकता है।
शिक्षामित्र आजाद सिंह और उसके परिवार के लोगाें ने सोमवार को बीएसए कार्यालय में जाकर मानदेय दिलाने की मांग के साथ ही हंगामा करना शुरू कर दिया। बीएसए के लाख समझाने पर भी शिक्षामित्र और उसके परिवार के लोग नहीं माने। जब बीएसए ने इन लोगों से कहा कि वे चाहे तो हाईकोर्ट जा सकते हैं विभाग से कुछ भी नहीं किया जा सकता है तो यह लोग बीएसए कक्ष से बाहर आ गए और कार्यालय में हंगामा करना शुरू कर दिया।
शिक्षामित्र और उसके परिवार के लोग भूख हड़ताल की चेतावनी दे रहे थे आखिरकार बीएसए को पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस वालों ने किसी तरह समझाकर शिक्षामित्र और उसके परिवार के लोगों को शांत किया। शिक्षामित्र आजाद सिंह ने बताया कि वर्ष 2002 में उसका चयन हुआ था। मई 2008 तक उसका मानदेय विभाग ने दिया। इसके बाद से मानदेय रुका है। 16 दिसंबर 2011 को मानदेय भुगतान कराने का आदेश कोर्ट ने किया।
शिक्षामित्र ने बताया कि बीएसए डॉ. ओपी राय उसे तीन माह से दौड़ा रहे हैं। इसके बाद भी उसका मानदेय भुगतान नहीं हुआ।
इस संबंध में बीएसए डॉ.ओपीराय ने बताया कि इस मामले को पूर्व में बीएसए देवकी सिंह ने निस्तारित कर दिया था। इसकी आयु अधिक होने के कारण इसकी नियुक्ति रद्द की गई है। जिस मामले में उनके पूर्व के अधिकारी ने कार्रवाई है उसमें वे क्या कर सकते हैं आजाद सिंह चाहे तो हाईकोर्ट जा सकता है।