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होली के पकवानों से सज गईं दुकानें
ब्यूरो /लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 16 Mar 2016 10:39 PM IST
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पकवान
- फोटो : अमर उजाला
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मावा बनने के कारण अभी से शुरू हो गई दूध की किल्लत
कपड़े और किराने की दुकानों पर उमड़ रही ग्राहकों की भीड़
होली को महज एक सप्ताह का समय रह गया है। बाजार अभी से होली के रंग में रंगा नजर आने लगा है। होली के मौके पर बनने वाले परंपरागत पकवान अभी घरों में बनने भले ही शुरू न हुए हों लेकिन मिठाइयों की दुकानें इन पकवानों से सज गई हैं। खासकर गुझिया, खस्ता और विभिन्न तरह की नमकीन का बनना तेजी से जारी है।
होली के लिए घरों में पापड़, चिप्स आदि बहुत पहले से बनना शुरू हो गए थे। होली पर एक दूसरे को उपहार देने के लिए लोगों ने अभी से पकवानों की पैकिंग कराना शुरू कर दी है। होली के मौके पर रिश्तेदारों विशेषकर बेटियों और बहनों की ससुराल में रंग, गुलाल, पिचकारी के साथ होली के पकवान भेजने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। इसके लिए लोग मिठाई की दुकानों पर आर्डर देकर गुझिया, नमकीन और मिठाइयां तैयार करा रहे हैं।
होली के पहले बाजार में सबसे ज्यादा बिक्री किराने के सामान की हो रही है। इसमें सूजी, मैदा, बेसन, नमकीन बनने में इस्तेमाल होने वाली दालें, सूखे मेवे, घी, रिफाइंड तेल, सरसों का तेल और मसालों की बिक्री हो रही है। इस समय तेजी से मावा बनने के कारण दूध की किल्लत शुरू हो गई है।
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रंग, गुलाल और पिचकारियों की बिक्री अभी बाजार में ठीक से शुरू नहीं हुई है लेकिन कपड़ों की खरीद फरोख्त काफी तेजी से हो रही है। कपड़े सिलवाने के झंझट से बचने के लिए लोग रेडीमेड गारमेंट को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। अवध क्षेत्र में होली के मौके पर नए कपड़े पहनने की परंपरा है। इसलिए होली पर नए कपड़े और जूते चप्पल खरीदने को दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है।
व्यापारियों का कहना है कि बाजार पर होली का रंग धीरे-धीरे चढ़ना शुरू हो गया है लेकिन अभी बहुत तेजी नहीं आई है। कपड़ा और किराना व्यवसाय अपने चरम पर है। दो तीन दिनों में बाजार तेजी पकड़ेगा। इस बार पिछले साल की अपेक्षा होली पर अच्छा व्यवसाय होने की उम्मीद है।
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कपड़े और किराने की दुकानों पर उमड़ रही ग्राहकों की भीड़
होली को महज एक सप्ताह का समय रह गया है। बाजार अभी से होली के रंग में रंगा नजर आने लगा है। होली के मौके पर बनने वाले परंपरागत पकवान अभी घरों में बनने भले ही शुरू न हुए हों लेकिन मिठाइयों की दुकानें इन पकवानों से सज गई हैं। खासकर गुझिया, खस्ता और विभिन्न तरह की नमकीन का बनना तेजी से जारी है।
होली के लिए घरों में पापड़, चिप्स आदि बहुत पहले से बनना शुरू हो गए थे। होली पर एक दूसरे को उपहार देने के लिए लोगों ने अभी से पकवानों की पैकिंग कराना शुरू कर दी है। होली के मौके पर रिश्तेदारों विशेषकर बेटियों और बहनों की ससुराल में रंग, गुलाल, पिचकारी के साथ होली के पकवान भेजने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। इसके लिए लोग मिठाई की दुकानों पर आर्डर देकर गुझिया, नमकीन और मिठाइयां तैयार करा रहे हैं।
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होली के पहले बाजार में सबसे ज्यादा बिक्री किराने के सामान की हो रही है। इसमें सूजी, मैदा, बेसन, नमकीन बनने में इस्तेमाल होने वाली दालें, सूखे मेवे, घी, रिफाइंड तेल, सरसों का तेल और मसालों की बिक्री हो रही है। इस समय तेजी से मावा बनने के कारण दूध की किल्लत शुरू हो गई है।
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रंग, गुलाल और पिचकारियों की बिक्री अभी बाजार में ठीक से शुरू नहीं हुई है लेकिन कपड़ों की खरीद फरोख्त काफी तेजी से हो रही है। कपड़े सिलवाने के झंझट से बचने के लिए लोग रेडीमेड गारमेंट को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। अवध क्षेत्र में होली के मौके पर नए कपड़े पहनने की परंपरा है। इसलिए होली पर नए कपड़े और जूते चप्पल खरीदने को दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है।
व्यापारियों का कहना है कि बाजार पर होली का रंग धीरे-धीरे चढ़ना शुरू हो गया है लेकिन अभी बहुत तेजी नहीं आई है। कपड़ा और किराना व्यवसाय अपने चरम पर है। दो तीन दिनों में बाजार तेजी पकड़ेगा। इस बार पिछले साल की अपेक्षा होली पर अच्छा व्यवसाय होने की उम्मीद है।