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न गौशाला और न ही जीआईसी का निर्माण हो सका पूरा

Thu, 17 Feb 2022 12:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 17 Feb 2022 12:17 AM IST
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Half-hearted work is teasing the public in Malani
मैलानी में निर्माणाधीन जीआईसी - फोटो : LAKHIMPUR
मैलानी। मतदान बहुत दूर नहीं है। गोला विधानसभा क्षेत्र के कस्बा मैलानी में दो अधूरे काम खास तौर से चर्चा में हैं। इन दोनों के ही पूरा होने से लोगों को बड़ा लाभ मिलता. निकटवर्ती ग्राम पंचायत सलावत नगर में कान्हा गोशाला और राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) भवन का निर्माण अर्से से अधर में होने से लोगों को मलाल है। लोगों का मानना है कि गोशाला बन जाने से नगर और आसपास के किसानों को छुट्टा पशुुओं से निजात तो जीआईसी से क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षण सुविधा मिलती। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि 2019 में दोनों ही काम शुरू तो हुए लेकिन बीच में अटके हुए हैं।
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लगभग दो साल पहले नगर पंचायत की ओर से ग्राम पंचायत सलावत नगर के कुरियानी गांव के पास कान्हा गोशाला और लोकसभा चुनाव 2019 से पहले सलावत नगर में जीआईसी भवन का शिलान्यास हुआ था। नगर पंचायत ने दीनदयाल उपाध्याय योजना के तहत पानी की टंकी के पास एक पार्क और भीरा रोड पर वन निगम डिपो के पास बरातघर का निर्माण की कराया गया। एक करोड़, 64 लाख रुपये की लागत से बनने वाली गोशाला की 82 लाख रुपये की एक किश्त आने पर निर्माण शुरू हुआ, लेकिन अब तक दूसरी किश्त न आने से कार्य रुका हुआ है।
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इससे छुट्टा गोवंशीय पशु किसानों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। रखवाली और तार फेंसिंग के बावजूद ये पशु खेतों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जीआईसी भवन पूर्ण होने का लक्ष्य दिसंबर 2021 था, लेकिन अब तक उसका निर्माण भी पूरा नहीं हो सका है। सबसे रोचक बात यह है कि विधायक अरविंद गिरि ने पिछले साल जून में पार्क और बरातघर का लोकार्पण भी कर दिया था, जबकि बरातघर और पार्क दोनों के काम अधूरे थे। इसी वजह से नगर पंचायत ने दोनों को अभी तक हस्तगत नहीं किया है। अधूरे निर्माण कार्य चुनाव में प्रमुख मुद्दे बनकर उभरे हैं।
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ठेके पर काश्तकारी करने वाले मैलानी निवासी उमाशंकर ने बताया कि खेती में तमाम लागत लगती है और ठेका भी देना होता है। एक तो लागत बढ़ गई है, ऊपर से छुट्टा पशु खेतों में नुकसान कर जाते हैं। गौशाला बन जाती, तो पशुओं के नुकसान से बच जाते।
कुरियानी निवासी काश्तकार बीपी सिंह ने बताया कि छुट्टा गोवंशीय पशु खेती के लिए मुसीबत बने हैं। गांव के पास गोशाला बनने का काम शुरू हुआ, तो लगा कि पशुओं से निजात मिल जाएगी, लेकिन दो वर्षों में भी गोशाला बन नहीं सकी है, बल्कि अब तो अधूरी गोशाला मुंह चिढ़ा रही है।
मैलानी निवासी काश्तकार सनव्वर अली ने बताया कि खेत में पौधे निकलते ही छुट्टा पशु खेतों में पहुंचकर फसल बर्बाद करना शुरू कर देते हैं। तार की बाड़ आदि लगाने के बावजूद पशुुुओं से फसल बचाना मुश्किल हो जाता है। गोशाला बन जाए, तो पशुओं से निजात मिल सके।
मैलानी निवासी मोहम्मद फहीम ने बताया कि बरातघर का लोकार्पण हो हुए लगभग आठ माह हो चुके हैं, लेकिन उसे अभी तक शुरू नहीं किया जा सका है। लिहाजा जरूरत पर आम आदमी को बरातघर का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं पार्क में भी बच्चे मनोरंजन से वंचित हैं।
मैलानी निवासी नोटरी एडवोकेट का कहना है कि नगर में सिर्फ एकमात्र मान्यता प्राप्त इंटर कॉलेज है। जीआईसी का निर्माण शुरू होने पर क्षेत्रवासियों में बेहतर शिक्षा की उम्मीद जगी थी, लेकिन तीन साल होने पर भी भवन पूरा नहीं हो सका है। जीआईसी बने तो बच्चों का लाभ मिले।
श्री लाल बहादुर शास्त्री इंटर कॉलेज के हाईस्कूल के छात्र मोहम्मद फरहान अंसारी ने कहा कि तीन साल पहले जीआईसी का निर्माण शुरू होने पर मन में बेहद खुशी थी कि उसे इंटर साइंस पढ़ने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन तीन साल में जीआईसी शुरू नहीं हो सका।

श्री लाल बहादुर शास्त्री इंटर कॉलेज की ही छात्र मोहम्मद रेेहान अंसारी ने कहा कि तीन साल पहले जीआईसी बनना शुरू होने पर सोचा था कि उसे इंटर साइंस की पढ़ाई यहीं करने को मिलेगी, लेकिन अब तक जीआईसी का भवन तक नहीं बन सका है, लिहाजा अगला सत्र शुरू होना मुश्किल ही है।

मैलानी में बना पार्क

मैलानी में बना पार्क- फोटो : LAKHIMPUR

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