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रखवालले ही लूट रहे जंगल का खुला खजाना
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल को उसके रखवाले ही उजाड़ने पर आमादा हैं। संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध रूप से हो रहे पेड़ों के कटान में कहीं अधिकारियों और वन कर्मियों की संलिप्तता सामने आ रही है, तो कहीं वे अपने अपराध छिपाने के लिए जंगल में आग लगाने से भी बाज नहीं आ रहे हैं।
हाल ही में दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में संदिग्ध हालात में लगी आग की जांच में यह तथ्य सामने आ रहे हैं कि जंगल में हुए अवैध कटान के अपराध को छुपाने के लिए कुछ वनाधिकारियों की सह पर वन कर्मियों ने ही आग लगा दी। मामले की जांच किशनपुर सेंक्चुरी के वार्डेन तौफीक अहमद कर रहे हैं। अप्रैल माह में किशनपुर सेंक्चुरी में ही 15 दिन के अंतराल पर दो जगहों पर आग लगी थी। इसमें 50 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र में कई सूखे पेड़ों के जलने की बात कही गई थी। सूत्रों के मुताबिक संरक्षित वन क्षेत्र में काटे गए पेड़ों की मुड़ढियों को जलाने के लिए ही यह आग लगाई गई थी।
हाल ही में किशनपुर सेंक्चुरी में रेंजर आवास पर छापा मारकर दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक मनोज सोनकर ने बड़ी मात्रा में साखू की चिरान की हुई लकड़ी बरामद की थी। इससे पहले इसी रेंज की तारकोठी वन चौकी में भी चिरान की लकड़ी बरामद हुई थी। इन मामलों की हुई जांच में किशनपुर सेंक्चुरी के रेंजर राम बरन यादव प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने रेंजर को सस्पेंड कर दिया है।
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लॉकडाउन के दौरान जंगल में लोगों की आवाजाही कम होने से हो रहे वन अपराधों की जांच में मिल रहे चौंकाने वाले यह तथ्य दुधवा टाइगर रिजर्व की वन संपदा की सुरक्षा पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं।
अप्रैल माह में किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में लगी आग की जांच कराई जा रही है। प्रथम दृष्टया इस जांच में वन कर्मियों की संलिप्तता सामने आ रही है। जांच के बाद दोषी वन कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
- मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क
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हाल ही में दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में संदिग्ध हालात में लगी आग की जांच में यह तथ्य सामने आ रहे हैं कि जंगल में हुए अवैध कटान के अपराध को छुपाने के लिए कुछ वनाधिकारियों की सह पर वन कर्मियों ने ही आग लगा दी। मामले की जांच किशनपुर सेंक्चुरी के वार्डेन तौफीक अहमद कर रहे हैं। अप्रैल माह में किशनपुर सेंक्चुरी में ही 15 दिन के अंतराल पर दो जगहों पर आग लगी थी। इसमें 50 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र में कई सूखे पेड़ों के जलने की बात कही गई थी। सूत्रों के मुताबिक संरक्षित वन क्षेत्र में काटे गए पेड़ों की मुड़ढियों को जलाने के लिए ही यह आग लगाई गई थी।
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हाल ही में किशनपुर सेंक्चुरी में रेंजर आवास पर छापा मारकर दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक मनोज सोनकर ने बड़ी मात्रा में साखू की चिरान की हुई लकड़ी बरामद की थी। इससे पहले इसी रेंज की तारकोठी वन चौकी में भी चिरान की लकड़ी बरामद हुई थी। इन मामलों की हुई जांच में किशनपुर सेंक्चुरी के रेंजर राम बरन यादव प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने रेंजर को सस्पेंड कर दिया है।
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लॉकडाउन के दौरान जंगल में लोगों की आवाजाही कम होने से हो रहे वन अपराधों की जांच में मिल रहे चौंकाने वाले यह तथ्य दुधवा टाइगर रिजर्व की वन संपदा की सुरक्षा पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं।
अप्रैल माह में किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में लगी आग की जांच कराई जा रही है। प्रथम दृष्टया इस जांच में वन कर्मियों की संलिप्तता सामने आ रही है। जांच के बाद दोषी वन कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
- मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क