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शारदा ने लील ली कई एकड़ जमीन
पलिया कलां
Updated Mon, 03 Aug 2015 10:49 PM IST
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शारदा नदी के कटान का कहर जंगल नंबर छह के खेतों में जारी है। नदी यहां दर्जनों एकड़ से ज्यादा जमीन निगल चुकी है। बड़े पैमाने पर हो रहे कटान से ग्रामीणों के चेहरे मुरझा गए हैं और उन्हें खाना बदोशी का डर सताने लगा है। जमीनें नदी में जाने से किसान परेशान हैं। वहीं प्रशासन की ओर से कटान रोकने के इंतजाम अभी तक नहीं किए गए हैं।
शारदा नदी मझौरा ग्राम पंचायत के गांव जंगल नंबर छह के खेतों में लगातार कटान कर रही है। नदी ने यहां सूरज प्रसाद, जगदीश सिंह, सेवा सिंह, छोटे सिंह, नन्हें सिंह, रामसनेही, लालाराम, नेकीराम, भरोसे, माता प्रसाद, जयलाल, रघुनंदन, शिव भगवान, सत्यप्रकाश, रामलोटन, रामगोपाल, अशोक, सुधीर, महेश, सुरेश, अच्छे कुमार, सालिकराम, राजाराम, लालधर, पारसनाथ, नरेश, रामवचन, करमपाल, पिस्तीराम, खटालू, स्वामीदयाल, पटवारी आदि ग्रामीणों की दर्जनों एकड़ से ज्यादा खेतों को निगल लिया है और कई के खेतों को अपने निशाने पर लेकर दिन पर दिन निगल रही है। खेतों के कटने से ग्रामीण बदहाल होते जा रहे हैं और कटान की तेजी को देख ग्रामीणों के चेहरों की हवाइयां उड़ी हैं। प्रशासन ने जानकारी के बाद भी कटान रोकने के कोई इंतजाम नहीं किए हैं। उधर कटान की तेजी देख निशाने पर आए खेतों के मालिक अब फसले काट रहे हैं। उन्हें डर है कि आधी अधूरी फसलें भी नदी में समा जाएंगी। इसके चलते वह अधूरी फसलों को काटकर जानवरों चारे के इस्तेमाल में लेने लगे हैं।
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शारदा नदी मझौरा ग्राम पंचायत के गांव जंगल नंबर छह के खेतों में लगातार कटान कर रही है। नदी ने यहां सूरज प्रसाद, जगदीश सिंह, सेवा सिंह, छोटे सिंह, नन्हें सिंह, रामसनेही, लालाराम, नेकीराम, भरोसे, माता प्रसाद, जयलाल, रघुनंदन, शिव भगवान, सत्यप्रकाश, रामलोटन, रामगोपाल, अशोक, सुधीर, महेश, सुरेश, अच्छे कुमार, सालिकराम, राजाराम, लालधर, पारसनाथ, नरेश, रामवचन, करमपाल, पिस्तीराम, खटालू, स्वामीदयाल, पटवारी आदि ग्रामीणों की दर्जनों एकड़ से ज्यादा खेतों को निगल लिया है और कई के खेतों को अपने निशाने पर लेकर दिन पर दिन निगल रही है। खेतों के कटने से ग्रामीण बदहाल होते जा रहे हैं और कटान की तेजी को देख ग्रामीणों के चेहरों की हवाइयां उड़ी हैं। प्रशासन ने जानकारी के बाद भी कटान रोकने के कोई इंतजाम नहीं किए हैं। उधर कटान की तेजी देख निशाने पर आए खेतों के मालिक अब फसले काट रहे हैं। उन्हें डर है कि आधी अधूरी फसलें भी नदी में समा जाएंगी। इसके चलते वह अधूरी फसलों को काटकर जानवरों चारे के इस्तेमाल में लेने लगे हैं।
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