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‘ग्यारह प्रतिशत बच्चों की होती है डायरिया से मौत’
लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 07 Aug 2015 07:08 PM IST
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बच्चों की होने वाली कुल मौतों में ग्यारह प्रतिशत मौतें डायरिया से होती हैं। यदि डायरिया पर नियंत्रण कर लिया जाए तो शिशु मृत्युदर में बहुत हद तक कमी लाई जा सकती है। इसके लिए जिले में सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा चलाया जाएगा। इसके तहत पांच वर्ष तक के बच्चों वाले घरों में ओआरएस के पैकेट और जिंक की गोलियां वितरित की जाएंगी।
एनआरएचएम प्रभारी डॉ.वीबीराम ने बताया कि डायरिया पर प्रभावी नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा शुरू किया है। इसके तहत पहले सप्ताह आशाएं जिन घरों में पांच वर्ष तक के बच्चे हैं वहां जाकर ओआरएस के पैैकेट और जिंक की 14 गोलियां देंगी। आशाएं इन घरों में ओआरएस घोल बनाने की जानकारी भी देंगी। इस कार्य के लिए आशाओं को प्रति पैकेट एक रुपया प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। उन्होंने बताया डायरिया का एक बड़ा कारण बच्चों में कुपोषण है। अधिकतर माताएं बच्चों को अपना दूध नहीं पिलाती हैं। उन्होंने बताया मां का जो पहला गाढ़ा पीला दूध होता है उससे बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। मां का दूध पिलाने से डायरिया का खतरा लगभग समाप्त हो जाता है। इसके अलावा मां का दूध पिलाने से बच्चे का मानसिक विकास तेजी से होता है। दूसरे चरण में आशाएं बच्चों को मां का दूध पिलाने के लिए प्रेरित करेंगी। उन्होंने बताया छह माह के बाद बच्चे को दाल का पानी, केला, खीर, दलिया, मीसा हुआ चावल और आलू दिया जा सकता है। इससे बच्चे का पोषण ठीक होगा। डायरिया का तीसरा कारण गंदगी है। तीसरे चरण में आशाएं स्कूलों में जाकर बच्चों को खाने से पहले और शौच के बाद हाथ धोने का सही तरीका बताएंगी। चौथे चरण में आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर माह बच्चे का वजन किया जाएगा। उन्होंने बताया, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने सघन अभियान शुरू किया है। इस दौरान प्रोग्राम मैनेजर सुजीत कुमार सहित तमाम लोग उपस्थित थे।
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एनआरएचएम प्रभारी डॉ.वीबीराम ने बताया कि डायरिया पर प्रभावी नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा शुरू किया है। इसके तहत पहले सप्ताह आशाएं जिन घरों में पांच वर्ष तक के बच्चे हैं वहां जाकर ओआरएस के पैैकेट और जिंक की 14 गोलियां देंगी। आशाएं इन घरों में ओआरएस घोल बनाने की जानकारी भी देंगी। इस कार्य के लिए आशाओं को प्रति पैकेट एक रुपया प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। उन्होंने बताया डायरिया का एक बड़ा कारण बच्चों में कुपोषण है। अधिकतर माताएं बच्चों को अपना दूध नहीं पिलाती हैं। उन्होंने बताया मां का जो पहला गाढ़ा पीला दूध होता है उससे बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। मां का दूध पिलाने से डायरिया का खतरा लगभग समाप्त हो जाता है। इसके अलावा मां का दूध पिलाने से बच्चे का मानसिक विकास तेजी से होता है। दूसरे चरण में आशाएं बच्चों को मां का दूध पिलाने के लिए प्रेरित करेंगी। उन्होंने बताया छह माह के बाद बच्चे को दाल का पानी, केला, खीर, दलिया, मीसा हुआ चावल और आलू दिया जा सकता है। इससे बच्चे का पोषण ठीक होगा। डायरिया का तीसरा कारण गंदगी है। तीसरे चरण में आशाएं स्कूलों में जाकर बच्चों को खाने से पहले और शौच के बाद हाथ धोने का सही तरीका बताएंगी। चौथे चरण में आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर माह बच्चे का वजन किया जाएगा। उन्होंने बताया, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने सघन अभियान शुरू किया है। इस दौरान प्रोग्राम मैनेजर सुजीत कुमार सहित तमाम लोग उपस्थित थे।
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