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एसएमसी में महिलाओं की 50 फीसदी भागीदारी अनिवार्य, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद पर महिला को वरीयता

Mon, 30 Nov 2020 01:05 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 30 Nov 2020 01:05 AM IST
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लखीमपुर खीरी। कोरोना काल में बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों में विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) का नए सिरे से गठन किया जाएगा, जिसके लिए बीएसए बुद्धप्रिय सिंह ने चार और पांच दिसंबर 2020 को खुली बैठक के माध्यम से गठन कराने के निर्देश दिए हैं। एसएमसी में महिला अभिभावकों की 50 फीसदी भागीदारी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जानी है, जिसमें अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद पर महिलाओं के चयन को वरीयता दी जाएगी। ब्लॉकवार नामित नोडल अधिकारियों की देखरेख में एसएमसी का गठन कराया जाना है।
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लॉकडाउन के बाद सरकारी स्कूलों में प्राइवेट स्कूलों के बच्चों के नामांकन कराए गए हैं। खासकर जो अभिभावक प्राइवेट स्कूलों की मोटी फीस जमा नहीं कर पाए, तो उन्होंने अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराया है। एसएमसी गठन में ऐसे अभिभावक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जो सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। बीएसए बुद्ध प्रिय सिंह ने बताया कि जिले के गैर अनुदानित विद्यालयों के अलावा समस्त विद्यालयों में एसएमसी का गठन कराया जाएगा और नवगठित समिति दिसंबर 2020 से ही क्रियाशील होंगी। समितियों के गठन के दौरान अभिभावकों की खुली बैठक में कोविड-19 के प्रोटोकाल का शत-प्रतिशत अनुपालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) प्रत्येक विद्यालय में एसएमसी के चुनाव की तिथि की मुनादी कराएंगे। ब्लॉकवार नोडल अधिकारी संबंधित बीडीओ नामित किए गए हैं, जो निर्धारित तिथियों में प्रबंध समिति का गठन कराएंगे।
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पारदर्शी एवं निष्पक्ष ढंग से समिति के गठन पर जोर
एसएमसी का पारदर्शी और निष्पक्ष गठन कराने पर जोर रहेगा, जिसके लिए आम सहमति से गठन की प्राथमिकता रहेगी। यदि आम सहमति से चयन नहीं होगा, तो हाथ उठाकर बहुमत के आधार पर चयन कराया जाएगा। विवाद की स्थिति में खंड शिक्षा अधिकारी अपनी उपस्थिति में गोपनीय मतदान से निराकरण कराएंगे। संबंधित प्रधानाध्यापक का दायित्व है कि विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्रा के माता-पिता या संरक्षक से व्यक्तिगत संपर्क करते हुए एसएमसी की खुली बैठक की तिथि की जानकारी देंगे।
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50 प्रतिशत अभिभावकों का कोरम पूरा होना जरूरी
विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों की कुल संख्या के सापेक्ष कम से कम 50 प्रतिशत बच्चों के माता-पिता एवं संरक्षक की उपस्थित होने की स्थिति में ही एसएमसी का चयन किया जाएगा। कोरम को पूरा करने का दायित्व संबंधित प्रधानाध्यापक का होगा। समिति में विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के माता-पिता/संरक्षक ही समिति के सदस्य बनने के पात्र होंगे। चयनित सदस्यों में से एक अध्यक्ष एवं एक उपाध्यक्ष का चयन किया जाएगा। समिति के सदस्यों में एक सदस्य अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और कमजोर वर्ग के बालक के माता-पिता या संरक्षक शामिल किए जाएंगे। समिति में प्रत्येक कक्षा से एक बालक के माता-पिता या संरक्षक समिति में अवश्य शामिल किया जाएगा।
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अध्यक्ष के तौर पर अभिभावकों को मिलेंगे वित्तीय अधिकार
एसएमसी के गठन में अध्यक्ष के तौर पर अभिभावक का चयन किया जाएगा, जबकि सचिव पद पर संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक नामित होंगे। उपाध्यक्ष पद पर भी अभिभावक नामित होंगे। इसके अलावा कई सदस्य भी अभिभावक ही बनेंगे। गठन के बाद अध्यक्ष और सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से एसएमसी के बैंक खाते का संचालन किया जाएगा, जिसमें यूनिफार्म, पुस्तकालय, कंपोजिट ग्रांट आदि मदों से बजट मिलेगा। इससे एसएमसी अध्यक्ष के तौर पर विद्यालय के संचालन में अभिभावक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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सभी बीईओ को एसएमसी गठन कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके संबंध में डीएम द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। एसएमएसी गठन के लिए चार और पांच दिसंबर 2020 की तिथियां निर्धारित की गई हैं।
-बुद्ध प्रिय सिंह, बीएसए
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