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Lakhimpur Kheri News: आईजीआरएस में लापरवाही बरतने पर डीएम ने सीएमओ का वेतन रोका
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लखीमपुर खीरी। आईजीआरएस के माध्यम से लोगों की शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण व समय से निस्तारण हो सके, इसको लेकर लगातार शासन से अधिकारियों को कहा जाता है। वहीं जिले के स्वास्थ्य महकमे की मनमानी की वजह से सूबे में जिले की रैंकिंग गिर गई है। इस पर डीएम ने सीएमओ का जुलाई का वेतन रोकते हुए तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस जारी किया है।
गोला क्षेत्र के महुरेना गांव निवासी मूलचंद्र पुत्र मथुरा प्रसाद ने बताया कि उसने पैर का ऑपरेशन शहर के मेला मैदान स्थित सलूजा नर्सिंग होम में कराया था। यहां उसके पैर का गलत इलाज कर पैसे वसूल लिए गए। उसने इसकी शिकायत सात अप्रैल 2025 को आईजीआरएस के माध्यम से की थी। मामले की जांच 15 अप्रैल को होनी थी, जबकि उसे इसकी सूचना तीन दिन बाद 18 अप्रैल को डाक के माध्यम से दी गई।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा देर से सूचना देने की वजह से वह अपने साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया। वहीं इस संबंध में पोर्टल पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी की तरफ से 18 जून को कहा गया कि उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जांच सौंपी गई थी, जिसमें तय तिथि पर दोनों पक्ष मौजूद ही नहीं हुए।
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मामले में लापरवाही देख डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता को गुणवत्ताविहीन निस्तारण को लेकर नोटिस जारी करते हुए कहा कि 11 जुलाई को असंतुष्ट फीडबैक होने के कारण आयुक्त ने इस मामले को लेकर सी-श्रेणी कर दिया है। इस वजह से जनपद की रैंकिंग प्रभावित हुई। इसको लेकर उन्होंने तीन दिन के अंदर कारण बताने व जुलाई का वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं।
डीएम ने नोटिस में सीएमओ से पूछे यह सवाल
- जांच 15 अप्रैल को थी तो शिकायतकर्ता को 18 अप्रैल को देरी से सूचना क्यों दी गई, उसको फोन या व्हाटसएप से जानकारी क्यों नहीं दी गई।
- शासनादेश का उल्लंघन करते अंतरिम आख्या अपलोड क्यों की गई।
- यदि समय से शिकायत का निराकरण किया जाता तो असंतुष्ट फीडबैक न मिलता और यह संदर्भ सी-श्रेणी नहीं किया जाता।
- आख्या के साथ आवेदक का संतुष्टिपरक बयान संलग्न नहीं किया गया।
- जांच के समय की कोई फोटो भी अपलोड नहीं की गई।
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गोला क्षेत्र के महुरेना गांव निवासी मूलचंद्र पुत्र मथुरा प्रसाद ने बताया कि उसने पैर का ऑपरेशन शहर के मेला मैदान स्थित सलूजा नर्सिंग होम में कराया था। यहां उसके पैर का गलत इलाज कर पैसे वसूल लिए गए। उसने इसकी शिकायत सात अप्रैल 2025 को आईजीआरएस के माध्यम से की थी। मामले की जांच 15 अप्रैल को होनी थी, जबकि उसे इसकी सूचना तीन दिन बाद 18 अप्रैल को डाक के माध्यम से दी गई।
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा देर से सूचना देने की वजह से वह अपने साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया। वहीं इस संबंध में पोर्टल पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी की तरफ से 18 जून को कहा गया कि उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जांच सौंपी गई थी, जिसमें तय तिथि पर दोनों पक्ष मौजूद ही नहीं हुए।
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मामले में लापरवाही देख डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता को गुणवत्ताविहीन निस्तारण को लेकर नोटिस जारी करते हुए कहा कि 11 जुलाई को असंतुष्ट फीडबैक होने के कारण आयुक्त ने इस मामले को लेकर सी-श्रेणी कर दिया है। इस वजह से जनपद की रैंकिंग प्रभावित हुई। इसको लेकर उन्होंने तीन दिन के अंदर कारण बताने व जुलाई का वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं।
डीएम ने नोटिस में सीएमओ से पूछे यह सवाल
- जांच 15 अप्रैल को थी तो शिकायतकर्ता को 18 अप्रैल को देरी से सूचना क्यों दी गई, उसको फोन या व्हाटसएप से जानकारी क्यों नहीं दी गई।
- शासनादेश का उल्लंघन करते अंतरिम आख्या अपलोड क्यों की गई।
- यदि समय से शिकायत का निराकरण किया जाता तो असंतुष्ट फीडबैक न मिलता और यह संदर्भ सी-श्रेणी नहीं किया जाता।
- आख्या के साथ आवेदक का संतुष्टिपरक बयान संलग्न नहीं किया गया।
- जांच के समय की कोई फोटो भी अपलोड नहीं की गई।