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चंदनचौकी में पर्यटकों के लिए थारू शिल्प ग्राम बनकर हुआ तैयार
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थारू के पारंपरिक व्यंजनों का मिलेगा आनंद
थारू नृत्य, हस्तशिल्प और जड़ी-बूटियों से भी हो सकेंगे रूबरू
लखीमपुर खीरी। इंडो-नेपाल बॉर्डर पर बीएडीपी (बार्डर एरिया डेवलपमेंट कार्यक्रम) के तहत चंदन चौकी में थारू शिल्प ग्राम बनकर तैयार हो गया है। दुधवा नेशनल पार्क से करीब 15 किमी दूर स्थित इस शिल्प ग्राम में पर्यटकों के ठहरने और थारू के पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था रहेगी। इसमें थारू नृत्य, हस्तशिल्प और जड़ी-बूटियों का बाजार भी उपलब्ध होगा, जिसके लिए 10 दुकानें भी बनाई गई हैं। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने थारू शिल्प ग्राम का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया है।
एकीकृत जनजाति विकास परियोजना के अधिकारी यूके सिंह ने बताया कि जनजाति की पारंपरिक संस्कृति, हस्तशिल्प एवं परिधान को संरक्षित करके राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटकों के माध्यम से पहचान दिलाने के उद्देश्य से शिल्प ग्राम का निर्माण कराया गया है। जिसमें पर्यटकों के ठहरने के लिए चार सूट और एक म्यूजियम बनाए गए हैं। थारू के पारंपरिक व्यंजनों के लिए थारू रेस्टोरेंट, थारू नृत्य और संगीत के लिए ऑडिटोरियम भी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि थारू शिल्प ग्राम संचालन के लिए इच्छुक होटल और रेस्टोरेंट व्यापारियों से 13 जनवरी 2020 तक आवेदन मांगे गए हैं।
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थारू नृत्य, हस्तशिल्प और जड़ी-बूटियों से भी हो सकेंगे रूबरू
लखीमपुर खीरी। इंडो-नेपाल बॉर्डर पर बीएडीपी (बार्डर एरिया डेवलपमेंट कार्यक्रम) के तहत चंदन चौकी में थारू शिल्प ग्राम बनकर तैयार हो गया है। दुधवा नेशनल पार्क से करीब 15 किमी दूर स्थित इस शिल्प ग्राम में पर्यटकों के ठहरने और थारू के पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था रहेगी। इसमें थारू नृत्य, हस्तशिल्प और जड़ी-बूटियों का बाजार भी उपलब्ध होगा, जिसके लिए 10 दुकानें भी बनाई गई हैं। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने थारू शिल्प ग्राम का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया है।
एकीकृत जनजाति विकास परियोजना के अधिकारी यूके सिंह ने बताया कि जनजाति की पारंपरिक संस्कृति, हस्तशिल्प एवं परिधान को संरक्षित करके राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटकों के माध्यम से पहचान दिलाने के उद्देश्य से शिल्प ग्राम का निर्माण कराया गया है। जिसमें पर्यटकों के ठहरने के लिए चार सूट और एक म्यूजियम बनाए गए हैं। थारू के पारंपरिक व्यंजनों के लिए थारू रेस्टोरेंट, थारू नृत्य और संगीत के लिए ऑडिटोरियम भी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि थारू शिल्प ग्राम संचालन के लिए इच्छुक होटल और रेस्टोरेंट व्यापारियों से 13 जनवरी 2020 तक आवेदन मांगे गए हैं।
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