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मुआवजे के लालच ने भी बनाया हत्यारा

Fri, 04 Nov 2016 10:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी। Updated Fri, 04 Nov 2016 10:48 PM IST
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The lure of compensation made by the killer
हत्यारा - फोटो : अमर उजाला
पूर्व में भाई की हत्या पर मिला था मुआवजा
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रामानंद एक आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है। स्थानीय विधायक बाला प्रसाद अवस्थी से विवाद के चलते वह पहले भी जेल जा चुका है। इस केस से जुड़े वकील का कहना है कि हत्या के पीछे मुआवजे का लालच भी था। 
जेल से जमानत पर छूटने के बाद तो रामानंद ने बसपा विधायक पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए हंगामा भी खड़ा किया था। विधायक के खिलाफ कई शिकायती पत्र दिए लेकिन जांच में प्रशासन ने हर बार मामले समाप्त कर दिए तो नाराजगी जाहिर करते हुए रामानंद ने दूरसंचार के टावर पर चढ़कर खुदकुशी की धमकी दी थी, और मीडिया चैनलों के साथ ही स्थानीय समाचारपत्रों में भी सुर्खियां बटोरी थी। रामानंद ने इसी बीच विधायक से टकराव और उत्पीड़न के आरोपों के बीच सुनवाई न होने की बात कहते हुए यह कहकर मीडिया में सनसनी मचा दी थी कि उसकी सुनवाई नहीं हो रही है लिहाजा वह अपनी बीबी और बच्चों सहित इस्लाम धर्म कबूल कर रहा है। इस नाटक के बाद से एक बार फिर अधिकारी दबाव में आए थे, लेकिन वक्त के साथ फिर उसका मीटर डाउन हो गया। सूत्रों का कहना है कि परिवार के पांच लोगों की हत्या के पीछे की वजह अवैध संबंधों का दबाव के साथ मुआवजा भी थी। क्योंकि इससे पूर्व भाई की हत्या पर बसपा सरकार में  उसे पांच लाख का मुआवजा मिला था। 
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सीओ ने सामने ला दिया था सच
लखीमपुर खीरी। तत्कालीन धौरहरा सीओ और वर्तमान में एएसपी शाहजहांपुर एपी सिंह ने सेलफोन पर बताया कि रामानंद की कहानी गले नहीं उतर रही थी, घटना को लेकर दबाव ऐसा था कि तत्कालीन आईजी जोन केएल मीना खुद धौरहरा कोतवाली आए थे और उन्होंने आरोपियों को जेल भेज कर खुलासे पर जोर दिया था। वह कहते हैं कि खुलासे को महज 24 घंटे का समय मिला था और इतने समय में ही उन्होंने सच को सामने ला दिया। पूछताछ में ही रामानंद टूट गया था। वह अब खुद ही एक-एक घटनाक्रम बता रहा था।
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शुरू से ही महत्वाकांक्षी था रामानंद
लखीमपुर खीरी। इस जघन्य वारदात के पीछे महत्वाकांक्षी रामानंद के सपने थे शुरू से ही आपराधिक मानसिकता का रहा रामानंद बसपा में छुटभइया नेता बन गया था। वर्ष 2004 और 2008 में उसने अपने पैतृक गांव बसढीया में एक परिवार पर हत्या का आरोप लगाया था। इस दौरान एक मुकदमा इस पर भी दर्ज हुआ लेकिन वह फर्जीवाड़ा रचने में सफल रहा। इसके बाद वो हाई प्रोफाइल नेता बन गया। मां और भाई की मौत के बाद झूठे आरोप में दूसरे लोग जेल गए और रामानंद को मोटी रकम के साथ दो सुरक्षा कर्मी भी मिले। इसके बाद उसका हौसला आसमान छूने लगा। उसने नामदारपुरवा में नया घर बनाया और यहीं रहने लगा। बताते हैं कि इसी दौरान उसका गैर जिला निवासी युवती से प्रेम प्रसंग हुआ। रामानंद ने उससे शादी के लिए ही प्लान बना कर अपने पत्नी बच्चों को मौत के घाट उतारने की उसकी योजना थी कि इस तरह उसे शासन फिर मोटी रकम देगा और कुछ दुश्मन जेल जाएंगे। फिर वह प्रेमिका से शादी रचाएगा लेकिन उसे नहीं पता था कि मासूम बच्चों की चीखों से उसके पाप का घड़ा भर चुका है। शुक्रवार को उसे कोर्ट ने पत्नी और चार बेटियों की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुना दी।

‘कोर्ट के आदेश पर पैरवी की’
बचाव पक्ष के अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ ने बताया कि रामानंद की पैरवी करने वाला कोई नहीं था सो उन्हें कोर्ट ने सहयोग के लिए निर्देशित किया था। उन्हें खुशी है कि पूरी फाइल पर मेहनत की गई और सही ढंग से बचाव पक्ष अदालत मे रखा है, अदालत ने जो फैसला किया है उसकी प्रति उन्हें नही मिली है लिहाजा अभी कुछ ज्यादा कहने की स्थिति में नही हैं। 

‘इंसानियत के लिए शर्मिंदगी है रामानंद’ 
डीजीसी शिवराज सिंह यादव ने बताया कि उनकी पूरी वकालत मेें ऐसा घिनौनी वारदात की पहली फाइल है जिसमें हत्यारोपी ने अपने ही परिवार की पांच जिंदगी महज मुआवजा के लालच में खत्म कर दी है। उन्हें खुशी है कि अदालत ने परिवार और समाज के दर्द को समझा और हत्यारे को फांसी की सजा सुनाई है। 


अब तक पांचवी फांसी की सजा
जिले में जब सेशन अदालत आई तो पहली बार मितौली थाना क्षेत्र में बजरखा गांव में कई युवकों की हत्या कर उनकी लाश गांव में घुमाने के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी, इसके बाद मैगलगंज थाना क्षेत्र में एक दलित अपाहिज किशोरी के साथ दुराचार और हत्या के मामले में पदम कश्यप को एडीजे अमर सिंह ने फांसी की सजा सुनाई थी, अगली कड़ी में भीरा थाना क्षेत्र में पांच वर्षीय लड़की कुमारी वंदना की नर बलि चढ़ाने के मामले में मेवालाल तांत्रिक को फांसी की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद देश में बहुचर्चित मंजूनाथ हत्याकांड में प्रमुख आरोपी पवन मित्तल उर्फ मोनू मित्तल को फांसी की सजा सुनाई गई थी। हालांकि अब तक सभी मामलों में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा को उम्रकैद में परिवर्तित कर दिया गया है। 
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