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पालिकाध्यक्ष पर अब हत्या का आरोप लगा

Sun, 20 Sep 2015 11:25 PM IST
पलियाकलां
पलियाकलां Updated Sun, 20 Sep 2015 11:25 PM IST
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 But Palikadhyksh Accused of murder
पालिकाध्यक्ष केबी गुप्ता पर मुसीबतों का आना कम नहीं हो रहा है। अब उन पर उनके खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराने वाले ठेकेदार रमेश चंद्र मिश्रा ने अपने पुत्र योगेश की हत्या का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि उनकी शिकायत पर वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज होने की रंजिश में पालिकाध्यक्ष ने अपने सहयोगियों के साथ उनके पुत्र की हत्या कर इसे दुर्घटना की रूप देने की कोशिश की है। उन्होंने नामजद तहरीर भीरा थाने में दी है।
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तहरीर में कहा गया है कि उनका एक मात्र पुत्र योगेश 15 सितंबर को लखीमपुर गया था। वहां से जब वह रात्रि में नहीं लौटा तो उसकी तलाश शुरू की गई। लेकिन कुछ भी नहीं पता चला। वह और उनकी पत्नी अहमदाबाद गुजरात गए थे। 16 सितंबर की सुबह करीब 5.30 बजे योगेश का शव मलूकापुर थाना भीरा के पास सड़क किनारे एक गड्ढे में बाइक के ऊपर पड़ा मिला। रात भर उसका मोबाइल नंबर 7703030306 नहीं लगा। सुबह 5.30 बजे यह नंबर मिला तब किसी ने उनके पुत्र की मृत्यु की सूचना दी। उनके पुत्र का पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया गया। वह 16 सितंबर की रात पलिया पहुंचा और 17 सितंबर को पुत्र का दाह संस्कार किया। उन्होंने पुत्र का शव देखा था तथा पोस्टमार्टम देखने के बाद उन्हें विश्वास हुआ कि उनके पुत्र की साजिश के तहत हत्या की गई। तहरीर में उन्होंने कहा है कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि इस घटना को पालिकाध्यक्ष केबी गुप्ता व उनके साथियों ने कारित किया है। क्योंकि उनके द्वारा पालिकाध्यक्ष के खिलाफ जनहित में पालिका के भ्रष्टाचार व वित्तीय अनियमितताओं को शासन में शिकायत की गई थी जिसकी जांच के बाद पालिकाध्यक्ष के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार 11 सितंबर को सीज कर दिए गए थे। आरोप लगाया है कि वह उनसे और उनके पुत्र से रंजिश मानते थे और इसी के कारण षडयंत्रपूर्वक उसकी हत्या कर दी। उन्होंने मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
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पालिकाध्यक्ष-पलियाकलां केबी गुप्ता ने बताया कि मैं उस दिन वैश्य समाज के सम्मेलन में हरदोई था और वहां से लखनऊ चला गया था। आरोप साजिशन लगाए जा रहे हैं। मैं और मेरा परिवार आपराधिक प्रवृत्ति का नहीं हैं। जानकारी मिली तो मुझे बहुत दुख हुआ और मुझे अफसोस है। मैं उनके घर भी गया था और दाह संस्कार में भी गया था।
...तो दूसरे दिन ही पहुंचे थे भीरा थाने
रमेश चंद्र मिश्रा का कहना है कि वह घटना के दूसरे ही दिन भीरा थाने मुकदमा दर्ज कराने गए थे उस समय उन्हें बताया गया कि एसओ बाहर हैं और उनके आने पर दर्ज कर लिया जाएगा। इसके बाद वह 19 सितंबर को थाने पहुंचे और कार्यवाहक एसओ को तहरीर दी। उनके मुताबिक कार्यवाहक एसओ ने तहरीर लेकर रिपोर्ट दर्ज करने की बात कहते हुए प्रति सोमवार 21 सितंबर को ले लेने की बात कही है। उन्होंने बताया है कि उन्होंने तहरीर को पंजीकृत डाक से भी भेजा है।
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