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कुख्यात अपराधी अजय तिवारी को एसटीएफ ने दबोचा

Sat, 05 Sep 2015 11:01 PM IST
लखीमपुर खीरी/ लखनऊ
लखीमपुर खीरी/ लखनऊ Updated Sat, 05 Sep 2015 11:01 PM IST
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Ajay Tiwari notorious criminals arrested by STF
एसटीएफ ने लखीमपुर खीरी की जिला जेल से फरार चल रहे कुख्यात इनामी अपराधी अजय तिवारी को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया। इसे चारबाग रेलवे स्टेशन के लोको वर्कशाप के पास से गिरफ्तार किया गया है। अजय तिवारी वर्ष 2014 में लखीमपुर खीरी की जेल से बिलकुल फिल्मी अंदाज में फरार हुआ था। इसने जेल के सुरक्षा कर्मियों की कनपटी पर असलहा लगाकर अपने साथी रवीन्द्र लोध के साथ मिलकर यहां से भागा था। इस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
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अजय तिवारी वर्ष 1995 में हुई एक हत्या के मामले में जिला कारागार बहराइच में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। इसी मामले में उसके पिता मुनीजर तिवारी को भी आजीवन कारावास की सजा हुई थी। वह आज भी बहराइच जेल में बंद हैं। अजय तिवारी वर्ष 2010 में भी पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया था।
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फरारी के दौरान ही जनपद लखीमपुर में इसने अपने साथियो के साथ मिलकर एक स्वर्ण व्यवसायी से 25 किलो चांदी लूट ली। कुछ समय बाद ही अजय को पुलिस ने गिरफतार कर लिया था। वर्ष 2014 में लखीमपुर जेल में निरूद्ध रहने के दौरान अजय तिवारी अपने साथी रवीन्द्र लोध के साथ असलहे के बल पर जेल कर्मियों को डराते हुए फरार हो गए थे। इसके बाद इन लोगों ने मोटरसाइकिल भी लूटी थी।
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इसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का पुरस्कार घोषित किया गया था। इसकी गिरफतारी का जिम्मा एसटीएफ को सौंपा गया। इसी के बाद एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक शहाब रशीद खान के नेतृृत्व में पुलिस उपाधीक्षक आलोक सिंह को इसके बारे में जानकारी जुटाने का जिम्मा दिया गया।
एसटीएफ को सूचना मिली कि अजय तिवारी नेपाल के लम्ही कस्बे में पुलिस से छिपकर रह रहा है। वह बीच-बीच में यूपी में अपराध को भी अंजाम दे रहा है। एसटीएफ को पता चला कि अजय तिवारी लखनऊ के चारबाग लखनऊ रेलवे स्टेशन के लोको वर्कशॉप साईड स्थित दुपहिया वाहन स्टैंड के पास अपने किसी परिचित से मिलने आ रहा है। इस सूचना पर एसटीएफ इसे गिरफ्तार कर लिया। एसटीएफ ने गिरफ्तार अभियुक्त को थाना आलमबाग लखनऊ में दाखिल कर उसके विरुद्ध केस दर्ज करा दिया है। इस पर आगे की कार्रवाई स्थानीय पुलिस कर रही है।
इस तरह जेल से हुए थे फरार
गिरफ्तार अभियुक्त ने पूछताछ में बताया कि लखीमपुर जिला कारागार में बंद रहने के दौरान कारागार से भागने के लिए उसने अभियुक्त अरविन्द मिश्रा के साथ भागने की योजना तैयार की थी। अरविन्द मिश्रा ने जिला कारागार, लखीमपुर से सटे हुए अस्पताल परिसर की छत से पिस्टल, तमंचा व कारतूस जेल में फिकवाया था। इसे जेल के अंदर ही जमीन खोदकर छिपा दिया गया था। इसी बीच अभियुक्त अरविन्द मिश्रा को लखीमपुर जेल से सीतापुर जेल भेज दिया गया। इसके बाद उसने अभियुक्त रवीन्द्र लोध के साथ भागने की योजना बनाई। 30 जुलाई 2014 को जिला कारागार, लखीमपुर से योजना के मुताबिक असलहों की नोक पर जेल के कर्मियों को लेकर यह जेल से बाहर आ गए। सड़क से एक मोटरसाइकिल लूटकर उससे यह बिलकुल फिल्मी अंदाज में फरार हो गये थे। उसने बताया कि लूट जैसे जघन्य अपराध को करने के लिए असलहे से ज्यादा साहस की जरूरत होती है। यही वजह है कि जेल में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद वे लोग भागने में सफल हुए।
आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज है अजय तिवारी पर
अजय तिवारी उर्फ दद्दू उर्फ मुन्नू उर्फ पुन्नु पुत्र मुनीजर तिवारी उर्फ लोकनाथ तिवारी निवासी ग्राम सिकारी चौरा, थाना मल्हीपुर जनपद श्रावस्ती पर आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। यह मुकदमें श्रावस्ती, बहराइच व लखीमपुर खीरी के विभिन्न थानों में पंजीकृत हैं। इनका हालिया पता घसियारीपुरा, थाना कोतवाली नगर, जनपद.बहराइच है। इनके पास से एक फर्जी मतदाता पहचान पत्र 1675 रुपये की नेपानी मुद्रा, 1520 रुपये की भारतीय मुद्रा व मोबाइल फोन बरामद हुआ है।

24 वर्षों में 30 फरार, दो मुठभेड़ में ढेर
वर्ष 1991 के बाद से 30 से अधिक कैदी/बंदी फरार हो चुके हैं लेकिन इनमें से नौ अभी भी फरार ही हैं। इनमें शातिर अपराधी और कैदी सचिन गुप्ता उर्फ डालू के साथ कचहरी से सिपाही की हत्या कर फरार होने वाला कैदी बग्गा सिंह भी शामिल है। हालांकि फरार होने वालों में कुछ महीने पहले कैदी डालू गुप्ता और दिसंबर 1998 में अल्लीपुर थाना हैदराबाद निवासी रामनरेश पुलिस की मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं।
एसपी अरविंद सेन ने बताया कि अजय तिवारी उर्फ दद्दू तिवारी को एसटीएफ ने लखनऊ में गिरफ्तार कर लिया गया है। अभी वह एसटीएफ के ही कब्जे में है और उससे पूछताछ की जा रही है। दद्दू तिवारी पर 25 हजार के ईनाम की संस्तुति की गई है जबकि उसके साथ फरार रविंदर पर 15 हजार का ईनाम घोषित किया गया है।
ये नहीं अब तक पकडे़ गए
-1991 में फरधान क्षेत्र के खेतौसा निवासी मो. शमी पाकशाला से भाग निकला।
-1993 में गोला के अर्जुननगर निवासी गोविंद न्यायालय परिसर से भाग निकला।
-अक्तूबर 1995 में महोली जिला सीतापुर निवासी धोखे गैंगेस्टर कोर्ट लखनऊ से फरार हो गया।
-सितंबर 1997 में रायपुर थाना नीमगांव निवासी नत्थू न्यायालय परिसर से भाग निकला।
-सितंबर 1997 में ही पिपरिया बरखेड़ा पीलीभीत निवासी रामबहादुर भी न्यायालय परिसर से भाग गया।
-मई 2003 में नरैनाबाद थाना धौरहरा निवासी भगवती केजीएमयू से फरार हो गया।
-जनवरी 2006 में चतरैया महोली जिला सीतापुर निवासी दारा उर्फ चिलबिलौआ न्यायालय परिसर से भाग निकला।
-सितंबर 2013 में बग्गा सिंह लखीमपुर न्यायालय परिसर से भाग निकला।
-जून 2014 में ढखवा गोला निवासी रविंदर लोध कारागार के मुख्य गेट से फरार हो गया।

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