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Lakhimpur Kheri News: सहकारी समितियां इस बार नहीं चलाएंगी धान खरीद केंद्र

Wed, 26 Aug 2026 11:46 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Wed, 26 Aug 2026 11:46 PM IST
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Cooperative societies will not run paddy procurement centers this time
प्रेसवार्ता करते हुए सहकारी समन्वय समिति उत्तर प्रदेश के प्रांतीय संयोजक मनोज अग्रवाल। संवाद
लखीमपुर खीरी। सहकारी समन्वय समिति उत्तर प्रदेश के प्रांतीय संयोजक मनोज अग्रवाल ने बुधवार को आवास पर प्रेसवार्ता कर खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए।
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उन्होंने कहा कि खाद्य विभाग सुनियोजित ढंग से सहकारी समितियों के धान खरीद केंद्र घटा रहा है। चेतावनी दी कि इस बार सहकारी समितियां धान खरीद का कोई केंद्र नहीं चलाएंगी। यदि खाद्य विभाग सक्षम है तो सभी खरीद केंद्र खुद संचालित करे। इस संबंध में जिलाधिकारी और सहकारिता मंत्री को ज्ञापन भेजा गया है।
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मनोज ने कहा कि सहकारी समितियों की आय धान-गेहूं खरीद, ऋण वितरण और खाद बिक्री जैसे सीमित कार्यों से होती है। इसी से कर्मचारियों का वेतन निकलता है। आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में सहकारी समितियों के 127 केंद्र थे, जो घटकर 99 रह गए हैं। वहीं खाद्य विभाग अपने केंद्र लगातार बढ़ा रहा है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि खाद्य विभाग के अधिकांश केंद्र ऐसी जगह हैं, जहां किसानों की पहुंच आसान नहीं है। ऐसे केंद्रों पर वास्तविक खरीद के बजाय कागजी औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। उन्होंने मितौली ब्लॉक के एक केंद्र का उदाहरण देते हुए खरीद व्यवस्था पर सवाल उठाए। प्रांतीय संयोजक ने डिप्टी आरएम पर कथित फर्जी खरीद का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों के केंद्रों की बार-बार जांच कराकर उनका उत्पीड़न किया जाता है। इसका उद्देश्य समितियों के केंद्र बंद कराना है।
मनोज ने आरोप लगाया कि सहकारिता विभाग के कार्यों को धीरे-धीरे छीना जा रहा है। विपणन विभाग में ऐसे निरीक्षक तैनात हैं, जिनकी कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं। उनके केंद्रों पर एक लाख क्विंटल तक खरीद दिखाई जाती है, लेकिन वास्तविक खरीद नहीं होती है।
उन्होंने बताया कि इस बार खाद्य विभाग ने 55 खरीद केंद्र बनाए हैं। आरोप लगाया कि विभाग में फर्जी खरीद का जाल बुना जा रहा है। सहकारी समितियां अपने खरीद केंद्र नहीं लगाएंगी। इसके बजाय अपनी टीम के माध्यम से खाद्य विभाग के खरीद केंद्रों की निगरानी और जांच कराएंगी।

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सभी आरोप निराधार हैं। अभी तक सेंटर फाइनल ही नहीं हुए हैं तो पहले से यह कैसे कहा जा सकता है कि खाद्य विभाग के सेंटर बढ़ाए और सहकारिता के कम किए गए हैं। पिछले साल कुल 146 सेंटर थे। इनमें 99 सहकारिता, 44 खाद्य विभाग, एक मंडी और दो एफसीआई के थे। इस बार भी इसी तरह सेंटर बनाए जाने की तैयारी है। एडीएम की निगरानी में सेंटर तय होते हैं।
-नमन पांडेय, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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