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एसएसबी के 57वें बल स्थापना दिवस पर हुए रंगारंग कार्यक्रम
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महंगापुर। 39वीं वाहिनी एसएसबी गदनियां मुख्यालय पर एसएसबी का 57वां बल स्थापना दिवस मनाया गया। इसमें एसएसबी के जवानों ने रंगारंग कार्यक्रम पेश किए। जिसकी सभी ने सराहना की। मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद सांसद अजय मिश्र टेनी ने कार्यक्रम को संबोधित कर एसएसबी के साहस को सराहा तो वहीं कमानडेंट ने एसएसबी के बारे में मौजूद लोगों को विस्तार से जानकारियां दीं।
एसएसबी गदनियां मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि सांसद अजय मिश्र टेनी ने दीप जलाकर की। इसके बाद एसएसबी जवानों ने कार्यक्रम पेश किए। वाहिनी कमानडेंट मुन्ना सिंह व संदीक्षा अध्यक्षा किरन सिंह ने आए हुए अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। सांसद ने संबोधित करते हुए कहा कि वह जवानों के हौसलों को नमन करते हुए अपने आप को गौरवान्वित समझ रहे हैं जो संगीनों के साथ रहने वालों के बीच में खड़े हैं। कमानडेंट मुन्ना सिंह ने कहा कि 1962 भारत-चीन युद्ध के बाद 20 दिसंबर 1963 को स्पेशल सर्विस ब्यूरो के नाम से इसका गठन हुआ था जिसका काम सूचनाओं को एकत्र करना था। फोर्स की क्षमता को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2003 में इसका नाम बदलकर सशस्त्र सीमा बल कर दिया और इंडो-नेपाल व भूटान सीमा की सुरक्षा का दायित्व दिया। जिसका निर्वाह अभी तक बल के जवान करते आ रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि ने रस्साकशी सहित अन्य प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस मौके पर सांसद प्रतिनिधि निघासन अरविंद सिंह संजय, प्रतिनिधि पलिया दीक तलवार, संपूर्णानगर मिल जीएम आजाद भगत सिंह आदि उपस्थित रहे।
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एसएसबी गदनियां मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि सांसद अजय मिश्र टेनी ने दीप जलाकर की। इसके बाद एसएसबी जवानों ने कार्यक्रम पेश किए। वाहिनी कमानडेंट मुन्ना सिंह व संदीक्षा अध्यक्षा किरन सिंह ने आए हुए अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। सांसद ने संबोधित करते हुए कहा कि वह जवानों के हौसलों को नमन करते हुए अपने आप को गौरवान्वित समझ रहे हैं जो संगीनों के साथ रहने वालों के बीच में खड़े हैं। कमानडेंट मुन्ना सिंह ने कहा कि 1962 भारत-चीन युद्ध के बाद 20 दिसंबर 1963 को स्पेशल सर्विस ब्यूरो के नाम से इसका गठन हुआ था जिसका काम सूचनाओं को एकत्र करना था। फोर्स की क्षमता को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2003 में इसका नाम बदलकर सशस्त्र सीमा बल कर दिया और इंडो-नेपाल व भूटान सीमा की सुरक्षा का दायित्व दिया। जिसका निर्वाह अभी तक बल के जवान करते आ रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि ने रस्साकशी सहित अन्य प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस मौके पर सांसद प्रतिनिधि निघासन अरविंद सिंह संजय, प्रतिनिधि पलिया दीक तलवार, संपूर्णानगर मिल जीएम आजाद भगत सिंह आदि उपस्थित रहे।
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