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Lakhimpur Kheri News: बुलंद की आवाज- 'कॉरपोरेट लुटेरों भारत छोड़ो- खेती छोड़ो'
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एसडीएम को ज्ञापन देते किसान नेता
गोला गोकर्णनाथ। किसान नेताओं ने ''कॉरपोरेट लुटेरों भारत छोड़ो-खेती छोड़ो'' की मांग बुलंद करते हुए अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा।
बुधवार को भारतीय किसान यूनियन टिकैत के प्रदेश महासचिव अमनदीप सिंह संधू ने राष्ट्रपति को संबोधित एसडीएम रत्नाकर मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा है कि ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ 9 अगस्त को पूरे देश में भारत छोड़ो आंदोलन हुआ था। इस साल केंद्र सरकार की कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के विरोध में कॉरपोरेट लुटेरों भारत छोड़ो, खेती छोड़ो'' की मांग के लिए अपनी सामूहिक आवाज उठा रहे हैं ।
केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकारों की नीतियों और असंवेदनशील प्रशासन के कारण लाखों किसान परिवार कंगाली और बदहाली के शिकार हो रहे हैं। नकदी फसल की कीमतों में गिरावट आई है। बीज, उर्वरक, कीटनाशक, बिजली, सिंचाई और पानी की आपूर्ति सहित सभी इनपुट सब्सिडी को खत्म किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन की लागत में भारी वृद्धि हुई। इस मौके पर मलिक सिंह, नरवैर सिंह, खूबचंद गौतम, सुरेंदर वर्मा ,मनदीप सिंह, आदि किसान मौजूद रहे।
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ये हैं मांगे
किसान नेताओं ने खड़ी फसलों के नुकसान के लिए 70,000 रुपये प्रति एकड़, जीवन के नुकसान के लिए 10 लाख रुपये, पूरी तरह से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए पांच लाख रुपये, मवेशियों के नुकसान पर 1 लाख रुपये, छोटे जुगाली करने वाले जानवरों के नुकसान पर 25,000 रुपये और मुर्गी पालन के नुकसान पर 500 रुपये प्रति मुर्गी मुआवजे की मांग की।
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बुधवार को भारतीय किसान यूनियन टिकैत के प्रदेश महासचिव अमनदीप सिंह संधू ने राष्ट्रपति को संबोधित एसडीएम रत्नाकर मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा है कि ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ 9 अगस्त को पूरे देश में भारत छोड़ो आंदोलन हुआ था। इस साल केंद्र सरकार की कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के विरोध में कॉरपोरेट लुटेरों भारत छोड़ो, खेती छोड़ो'' की मांग के लिए अपनी सामूहिक आवाज उठा रहे हैं ।
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केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकारों की नीतियों और असंवेदनशील प्रशासन के कारण लाखों किसान परिवार कंगाली और बदहाली के शिकार हो रहे हैं। नकदी फसल की कीमतों में गिरावट आई है। बीज, उर्वरक, कीटनाशक, बिजली, सिंचाई और पानी की आपूर्ति सहित सभी इनपुट सब्सिडी को खत्म किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन की लागत में भारी वृद्धि हुई। इस मौके पर मलिक सिंह, नरवैर सिंह, खूबचंद गौतम, सुरेंदर वर्मा ,मनदीप सिंह, आदि किसान मौजूद रहे।
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ये हैं मांगे
किसान नेताओं ने खड़ी फसलों के नुकसान के लिए 70,000 रुपये प्रति एकड़, जीवन के नुकसान के लिए 10 लाख रुपये, पूरी तरह से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए पांच लाख रुपये, मवेशियों के नुकसान पर 1 लाख रुपये, छोटे जुगाली करने वाले जानवरों के नुकसान पर 25,000 रुपये और मुर्गी पालन के नुकसान पर 500 रुपये प्रति मुर्गी मुआवजे की मांग की।