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बहनों ने भाईयों को रक्षा सूत्र बांधकर की शीघ्र रिहाई की कामना   

Mon, 07 Aug 2017 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो   लखीमपुर खीरी। 
अमर उजाला ब्यूरो   लखीमपुर खीरी।  Updated Mon, 07 Aug 2017 11:32 PM IST
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Brothers wished for early release of brothers by tying defense formula
jail - फोटो : amar ujala
जिला जेल पर उमड़ा बहनों का प्यार, जेल प्रशासन का छूटा पसीना        
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जिला कारागार पर उम्मीद से कई गुना ज्यादा बहनों की भीड़ उमड़ पड़ी। भीड़ ने पिछले पांच सालों का रिकार्ड तोड़ दिया। इस बार 1500 से अधिक महिलाओं ने सींखचों के पीछे निरूद्ध अपने भाइयों के माथे पर तिलक कर रक्षा सूत्र बांधा और मिष्ठान खिलाकर शीघ्र रिहाई की कामना की। भाइयों ने भी रक्षा करने का संकल्प लिया। भारी भीड़ होने से जेल प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं, लेकिन जेल प्रशासन की सूझबूझ और पुख्ता प्रबंध से महिलाओं को कोई खास दिक्कत नहीं उठानी पड़ी।
सोमवार की सुबह से ही जिला गेट पर महिलाओं की भारी भीड़ जुटने लगी। हालत यह हो गई कि जिला कारागार का बाहरी कैंपस महिलाओं से खचाखच भर गया। जेल प्रशासन ने बहनों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए काफी पुख्ता इंतजाम किए थे। साथ ही चोर, उचक्कों से निपटने के लिए खास सतर्कता बरती गई। भीड़भाड़ को देखते हुए मुलाकाती पर्ची के तीन काउंटर खोले गए थे, जिन पर लंबी लाइनें लगीं थीं। सघन तलाशी के बाद महिलाओं को अंदर प्रवेश दिया गया। तलाशी के दौरान ही बंदी रक्षकों ने साथ लाए गए मिष्ठान को पहले महिलाओं को खिलाया बाद में उसे अंदर ले जाने दिया। जिला जेल में निरूद्ध 1627 कैदी और बंदी हैं।  
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उमस भरी गर्मी पर भारी पड़ा बहनों का प्यार 
सोमवार को आसमान में बादल तो छाए रहे, लेकिन उमस भरी गर्मी से जिला कारागार परिसर में महिलाएं पसीने से तर-बतर थीं, लेकिन उनमें भाइयों को रक्षा सूत्र बांधने का जब्जा था सो वह घंटों कतारों और इधर-उधर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करती रहीं।  
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पहली बार नि:शुल्क बनी मुलाकाती पर्ची  
यह पहला मौका है कि जब रक्षाबंधन त्योहार पर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रोडवेज बस में फ्री यात्रा का बहनों को तोहफा दिया तो जेल प्रशासन ने मुलाकाती पर्ची नि:शुल्क उपलब्ध कराकर बहनों को सहूलियत दी। इससे महिलाओं में काफी खुशी दिखी। मुलाकाती पर्ची लेखक अनिल शुक्ला ने बताया कि पांच सालों में यह पहला ऐसा मौका है कि बहनों की इतनी भीड़ उमड़ी। इससे पहले कभी इतनी भीड़ नहीं रही। जेल प्रशासन ने भी पिछले पांच सालों में पांच से लेकर सात सौ तक संख्या पहुंचने की बात कही है।  
 
48 भाइयों ने जेल पहुंचकर बंधाई राखी  
इस बार भाइयों की संख्या भी दो गुनी रही। जेल में विभिन्न मामलों में 69 महिलाएं बंद हैं। बंदी और कै दी महिलाओं के भाई भी त्योहार पर पीछे नहीं रहे। 48 भाइयों ने जेल पहुंचकर अपनी बहनों से राखी बंधवाई और उनकी रक्षा करने का संकल्प लिया।  

  
1500 से अधिक महिलाओं ने जेल पहुंचकर भाइयों को रक्षा सूत्र बांधा है। 48 पुरुषों ने भी जेल पहुंचकर बहनों से राखी बंधवाई है। बहनों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए पुख्ता प्रबंध किए गए थे। मुलाकाती पर्ची भी फ्री बनवाई गई है। यह प्रयास रहा है कि कोई भी बहन रक्षा सूत्र बांधे बिना जेल गेट से वापस न हो। 
आरबी पटेल, जेल अधीक्षक  
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