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मां महा सरस्वती के रूप में पूजा जाता है बंकटा देवी को
लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 24 Mar 2015 07:53 PM IST
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शहर के हाथीपुर कोठार मोहल्ले में स्थित प्राचीन बंकटा देवी मंदिर की मूर्ति तो मां दुर्गा का भान कराती है लेकिन यह मां महासरस्वती के रूप में पूजित है। संभवत: संगमरमर की यह प्रतिमा बाद में स्थापित की गई होगी। इसीलिए मूर्ति का स्वरूप अपने प्राचीन पूजित स्वरूप से भिन्न है। बंकटादेवी मंदिर शहर की घनी आबादी के बीच बेहद सादगी लिए हुए है।
यह देवी मंदिर भी मां संकटादेवी और शीतला देवी के ही समकालीन माना जाता है। यहां मां संकटादेवी महालक्ष्मी, मां शीतला देवी महागौरी और मां बंकटादेवी महासरस्वती के रूप में प्रतिष्ठित है। पहले कभी यहां छोटी सी मठिया में देवी प्रतिमा स्थापित थी। 19 वीं शताब्दी की शुरुआत में इस मंदिर का निर्माण हुआ। संभवत: तभी मंदिर में नई मूर्ति की स्थापना भी हुई।
मंदिर पक्की लखौरी ईंटो से निर्मित है। मंदिर की उंचाई करीब 10 मीटर है। मुख्य द्वार पूरब की ओर है। इसमें कपाट नहीं है। मेहराबों पर गुंबदादार छत है। गर्भ गृह में सफेद संगमरमर की सादगी पूर्ण प्रतिमा स्थापित है। सिंहवाहिनी देवी के हाथों में त्रिशूल, धनुष, अंकुश, पाश सुशोभित हैं। मूर्ति दुर्गा देवी का भान कराती है।
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यहां पूरी नवरात्र भक्तों की भारी भीड़ रहती है। पूरे नवरात्र धार्मिक आयोजन होते हैं।
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यह देवी मंदिर भी मां संकटादेवी और शीतला देवी के ही समकालीन माना जाता है। यहां मां संकटादेवी महालक्ष्मी, मां शीतला देवी महागौरी और मां बंकटादेवी महासरस्वती के रूप में प्रतिष्ठित है। पहले कभी यहां छोटी सी मठिया में देवी प्रतिमा स्थापित थी। 19 वीं शताब्दी की शुरुआत में इस मंदिर का निर्माण हुआ। संभवत: तभी मंदिर में नई मूर्ति की स्थापना भी हुई।
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मंदिर पक्की लखौरी ईंटो से निर्मित है। मंदिर की उंचाई करीब 10 मीटर है। मुख्य द्वार पूरब की ओर है। इसमें कपाट नहीं है। मेहराबों पर गुंबदादार छत है। गर्भ गृह में सफेद संगमरमर की सादगी पूर्ण प्रतिमा स्थापित है। सिंहवाहिनी देवी के हाथों में त्रिशूल, धनुष, अंकुश, पाश सुशोभित हैं। मूर्ति दुर्गा देवी का भान कराती है।
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