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अनुमोदन के बाद घट गई प्रस्तावित जमीनें
अमित गुप्ता/लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 10 Feb 2016 11:16 PM IST
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किसानों को उनके ही आसपास बाजार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लाखों की लागत से 68 गांवों में बनाए गए एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब (एएमएच) के निर्माण में अफसरों की लापरवाही सामने आई है, जिससे 48 एएमएच अधूरे पड़े हैं। गांवों में प्रस्ताव बनाकर अनुमोदन करने के बाद अफसरों ने निर्माण के लिए निर्धारित मानकों की सुधि नहीं ली। अधिकांश एएमएच मानक के अनुरूप नहीं बने, बल्कि निर्माण इकाई ने भी प्रभावी कार्यवाही किए बगैर कम स्थान में चबूतरे का निर्माण करा दिया। इससे 68 में से 48 एएमएच में दुकानें नहीं बनाई जा सकीं।
जिले में छह मंडी समितियां लखीमपुर, पलिया, गोला, मोहम्मदी, तिकुनिया और मैैगलगंज हैं, जिनके 68 गांवों में एएमएच बनाए गए हैं। लखीमपुर मंडी क्षेत्र में 16, पलिया क्षेत्र में 14, गोला क्षेत्र में 11, मोहम्मदी क्षेत्र में आठ, तिकुनिया क्षेत्र में नौ और मैगलगंज क्षेत्र में नौ एएमएच बनाए गए, जिन्हें मंडी समिति की निर्माण इकाई ने बनाया है। विभाग की गाइड लाइन के मुताबिक प्रत्येक एएमएच में सी टाइप 10 दुकानें, एक छायादार नीलामी चबूतरा, दो हैंडपंप, खड़ंजा के साथ विद्युतीकरण के निर्देश हैैं, जिन पर 45 से 50 लाख रुपये अनुमानित व्यय तय किया गया था। इसके उलट जिले के एएमएच की हालत बेहद खस्ता है। सिर्फ 20 एएमएच में जगह की उपलब्धता के मुताबिक चार से आठ तक दुकानें और चबूतरे बनाए गए हैं। शेष 48 एएमएच में एक भी दुकानें नहीं बनाई गई हैं, जिससे इनके अस्तित्व से लेकर उपयोगिता तक धूमिल हो गई है। मितौली, बिलहरी, अजान, गढैया और खम्हरिया गांवों में दो-दो चबूतरे बनाए गए हैं, जबकि दुकान एक भी नहीं बनी है। गांवों में एएमएच के प्रस्ताव के समय 1200 वर्ग मीटर जमीन की डिमांड की गई थी, लेकिन नि:शुल्क की शर्त के साथ। लिहाजा ग्राम पंचायत, नगर पंचायत और सहकारिता विभाग से जमीन ली गई। सूत्र बताते हैं कि प्रस्ताव के मुताबिक मौके पर जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई, बल्कि आसपास के लोगों ने अपनी-अपनी जमीन का दावा करते हुए विरोध जताया। जबकि प्रस्ताव के समय ऐसा कुछ भी नहीं था। निर्माण इकाई ने इसकी सूचना अधिकारियों को भी दी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। लिहाजा निर्माण इकाई ने उपलब्ध जगह में ही खानापूर्ति कर आधे-अधूरे एएमएच निर्माण करा दिए। इससे सरकारी आंकड़ों में भले ही गांवों के किसानों को बाजार मिल गया, लेकिन असल हकीकत कुछ और ही है।
बाक्स=वर्जन
निर्माण कार्य शुरू करने के समय आसपास के ग्रामीणों ने विरोध जताकर अपनी जमीन बताई। इससे अवरोध उत्पन्न हुआ और उपलब्ध जगह में ही निर्माण कार्य कराया गया। जगह की उपलब्धता के हिसाब से चबूतरे और दुकानों का निर्माण कराया गया है।
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-एसआर सक्सेना, उपनिदेशक, निर्माण
बाक्स=वर्जन
नि:शुल्क जमीन प्राप्त कर उस पर एएमएच निर्माण कराने का प्राविधान है। उसी के मुताबिक संस्थाओं से जमीनें ली गई। कई जगह प्रस्ताव होने के बावजूद तय जमीन नहीं मिली, जिससे मानक के अनुरूप एएमएच नहीं बन सके।
-उमेश यादव, मंडी सचिव, लखीमपुर
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जिले में छह मंडी समितियां लखीमपुर, पलिया, गोला, मोहम्मदी, तिकुनिया और मैैगलगंज हैं, जिनके 68 गांवों में एएमएच बनाए गए हैं। लखीमपुर मंडी क्षेत्र में 16, पलिया क्षेत्र में 14, गोला क्षेत्र में 11, मोहम्मदी क्षेत्र में आठ, तिकुनिया क्षेत्र में नौ और मैगलगंज क्षेत्र में नौ एएमएच बनाए गए, जिन्हें मंडी समिति की निर्माण इकाई ने बनाया है। विभाग की गाइड लाइन के मुताबिक प्रत्येक एएमएच में सी टाइप 10 दुकानें, एक छायादार नीलामी चबूतरा, दो हैंडपंप, खड़ंजा के साथ विद्युतीकरण के निर्देश हैैं, जिन पर 45 से 50 लाख रुपये अनुमानित व्यय तय किया गया था। इसके उलट जिले के एएमएच की हालत बेहद खस्ता है। सिर्फ 20 एएमएच में जगह की उपलब्धता के मुताबिक चार से आठ तक दुकानें और चबूतरे बनाए गए हैं। शेष 48 एएमएच में एक भी दुकानें नहीं बनाई गई हैं, जिससे इनके अस्तित्व से लेकर उपयोगिता तक धूमिल हो गई है। मितौली, बिलहरी, अजान, गढैया और खम्हरिया गांवों में दो-दो चबूतरे बनाए गए हैं, जबकि दुकान एक भी नहीं बनी है। गांवों में एएमएच के प्रस्ताव के समय 1200 वर्ग मीटर जमीन की डिमांड की गई थी, लेकिन नि:शुल्क की शर्त के साथ। लिहाजा ग्राम पंचायत, नगर पंचायत और सहकारिता विभाग से जमीन ली गई। सूत्र बताते हैं कि प्रस्ताव के मुताबिक मौके पर जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई, बल्कि आसपास के लोगों ने अपनी-अपनी जमीन का दावा करते हुए विरोध जताया। जबकि प्रस्ताव के समय ऐसा कुछ भी नहीं था। निर्माण इकाई ने इसकी सूचना अधिकारियों को भी दी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। लिहाजा निर्माण इकाई ने उपलब्ध जगह में ही खानापूर्ति कर आधे-अधूरे एएमएच निर्माण करा दिए। इससे सरकारी आंकड़ों में भले ही गांवों के किसानों को बाजार मिल गया, लेकिन असल हकीकत कुछ और ही है।
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निर्माण कार्य शुरू करने के समय आसपास के ग्रामीणों ने विरोध जताकर अपनी जमीन बताई। इससे अवरोध उत्पन्न हुआ और उपलब्ध जगह में ही निर्माण कार्य कराया गया। जगह की उपलब्धता के हिसाब से चबूतरे और दुकानों का निर्माण कराया गया है।
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-एसआर सक्सेना, उपनिदेशक, निर्माण
बाक्स=वर्जन
नि:शुल्क जमीन प्राप्त कर उस पर एएमएच निर्माण कराने का प्राविधान है। उसी के मुताबिक संस्थाओं से जमीनें ली गई। कई जगह प्रस्ताव होने के बावजूद तय जमीन नहीं मिली, जिससे मानक के अनुरूप एएमएच नहीं बन सके।
-उमेश यादव, मंडी सचिव, लखीमपुर