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खूंखार मगरमच्छों ने निगली कई बकरियां और कुत्ते
Lakhimpur
Updated Tue, 31 Jul 2012 12:00 PM IST
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जान जोखिम में डाल नाला पार करना मजबूरी
रमियाबेहड़ खीरी। कई बकरियों व कुत्ताें का निवाला बना चुके मगरमच्छों ने लोगों की नींद उड़ा दी है। ग्रामीणों को जान जोखिम में डाल रास्ते का नाला पार करना मजबूरी बना हुआ है।
कफारा ग्राम पंचायत में महमदपुर नाला इन दिनों मगरमच्छाें का ठिकाना बना है। इनके आतंक से महमदपुर व नयापुरवा के वाशिंदों को खेती बाड़ी के काम से निकलना भी मुश्किल हो गया है। नाला पर रपटा पुल है। महमदपुर निवासी श्री प्रकाश मौर्या बताते है कि लगभग एक दर्जन मगरमच्छ इस समय नाले में मौजूद हैं जो नाले के किनारे पानी पीने को जाने वाले जानवरों को अपना निवाला बना रहे हैं। रपटा के किनारे कटे होने के कारण गांव के लोगों को नाले के पानी से ही गुजरना पड़ता है जिससे मगरमच्छ कब किस ग्रामीण को अपना शिकार बना डालें, पता नहीं। उन्होंने बताया कि वह प्रतिदिन कफारा जाते है जहां उनकी पान की दुकान है। प्रात: काल रपटा के ऊपर दो-तीन मगरमच्छ बैठे दिखाई दे जाते हैं। कमोवेश यही स्थिति कालेराम, बृजमोहन, संतोष कुमार, राधेश्याम आदि की है जिनको प्रतिदिन किसी न किसी कार्य से नाला पार करना ही पड़ता है तथा जान जोखिम में डाल कर पशुआें का चारा खेतीबाड़ी देखना होती है।
ज्ञान भारती इंटर कालेज अभयपुर में लिपिक पद पर कार्यरत राधेश्याम करिगहा बताते है कि पिछले वर्ष ग्राम प्रधान द्वारा नाव की व्यवस्था हो जाने के कारण ज्यादा परेशानी नहीं हुई थी किंतु इस बार नाव की भी अभी तक व्यवस्था नहीं हुई है। कफारा के इस महमदपुर मजरा में अस्सी प्रतिशत तथा नयावुरवा में शत प्रतिशत अनुसूचित जाति की आबादी है। बावजूद इसके न तो तहसील प्रशासन ओर न ही कोई जनप्रतिनिधि इस समस्या का समाधान कर रहा है।
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मगरमच्छों ने किया इनका शिकार
मगरमच्छों ने दामोदर की दो बकरी, ब्रजमोहन की दो बकरी, कृष्णा की एक बकरी, केशव की दो बकरी तथा सत्यनरायन की तीन बकरियों को अब तक निवाला बनाया है। इसके अलावा पांच आवारा कुत्तों को भी मगरमच्छ निगल चुका है।
वर्जन---
मगरमच्छ नदी नालों में ही रहते हैं। उनका स्थान परिवर्तन संभव नहीं है। यदि किसी ने मगरमच्छों को नुकसान पहुंचाया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-एनएन पांडे, रेंजर
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दूसरे दिन फिर नजर आया मगरमच्छ
बिजुआ। दंबल टांडा में जिस स्थान पर रविवार को मगरमच्छ देखा गया था, दूसरे दिन उससे आगे पानी से बाहर मगरमच्छ केे देखे जाने से ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है।
रविवार को दंबलटांडास गांव के सामने मरैहिया में सोमवार को दोबारा मगरमच्छ नजर आया। इससे पहले रविवार को मगरमच्छ को देखे जाने के बाद ग्रामीणों की भीड़ लग गई थी, बताते हैं कि देरशाम को वन महकमे की टीम मौके पर आई थी, तब तक मगरमच्छ पानी में चला गया था। सोमवार को एक बार फिर मगरमच्छ नजर आया, जिसे देखने को गांव वालों का तांता लग गया। मरैहिया में मगरमच्छ के ठहरे रहने से ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है।
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रमियाबेहड़ खीरी। कई बकरियों व कुत्ताें का निवाला बना चुके मगरमच्छों ने लोगों की नींद उड़ा दी है। ग्रामीणों को जान जोखिम में डाल रास्ते का नाला पार करना मजबूरी बना हुआ है।
कफारा ग्राम पंचायत में महमदपुर नाला इन दिनों मगरमच्छाें का ठिकाना बना है। इनके आतंक से महमदपुर व नयापुरवा के वाशिंदों को खेती बाड़ी के काम से निकलना भी मुश्किल हो गया है। नाला पर रपटा पुल है। महमदपुर निवासी श्री प्रकाश मौर्या बताते है कि लगभग एक दर्जन मगरमच्छ इस समय नाले में मौजूद हैं जो नाले के किनारे पानी पीने को जाने वाले जानवरों को अपना निवाला बना रहे हैं। रपटा के किनारे कटे होने के कारण गांव के लोगों को नाले के पानी से ही गुजरना पड़ता है जिससे मगरमच्छ कब किस ग्रामीण को अपना शिकार बना डालें, पता नहीं। उन्होंने बताया कि वह प्रतिदिन कफारा जाते है जहां उनकी पान की दुकान है। प्रात: काल रपटा के ऊपर दो-तीन मगरमच्छ बैठे दिखाई दे जाते हैं। कमोवेश यही स्थिति कालेराम, बृजमोहन, संतोष कुमार, राधेश्याम आदि की है जिनको प्रतिदिन किसी न किसी कार्य से नाला पार करना ही पड़ता है तथा जान जोखिम में डाल कर पशुआें का चारा खेतीबाड़ी देखना होती है।
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ज्ञान भारती इंटर कालेज अभयपुर में लिपिक पद पर कार्यरत राधेश्याम करिगहा बताते है कि पिछले वर्ष ग्राम प्रधान द्वारा नाव की व्यवस्था हो जाने के कारण ज्यादा परेशानी नहीं हुई थी किंतु इस बार नाव की भी अभी तक व्यवस्था नहीं हुई है। कफारा के इस महमदपुर मजरा में अस्सी प्रतिशत तथा नयावुरवा में शत प्रतिशत अनुसूचित जाति की आबादी है। बावजूद इसके न तो तहसील प्रशासन ओर न ही कोई जनप्रतिनिधि इस समस्या का समाधान कर रहा है।
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मगरमच्छों ने किया इनका शिकार
मगरमच्छों ने दामोदर की दो बकरी, ब्रजमोहन की दो बकरी, कृष्णा की एक बकरी, केशव की दो बकरी तथा सत्यनरायन की तीन बकरियों को अब तक निवाला बनाया है। इसके अलावा पांच आवारा कुत्तों को भी मगरमच्छ निगल चुका है।
वर्जन---
मगरमच्छ नदी नालों में ही रहते हैं। उनका स्थान परिवर्तन संभव नहीं है। यदि किसी ने मगरमच्छों को नुकसान पहुंचाया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-एनएन पांडे, रेंजर
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दूसरे दिन फिर नजर आया मगरमच्छ
बिजुआ। दंबल टांडा में जिस स्थान पर रविवार को मगरमच्छ देखा गया था, दूसरे दिन उससे आगे पानी से बाहर मगरमच्छ केे देखे जाने से ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है।
रविवार को दंबलटांडास गांव के सामने मरैहिया में सोमवार को दोबारा मगरमच्छ नजर आया। इससे पहले रविवार को मगरमच्छ को देखे जाने के बाद ग्रामीणों की भीड़ लग गई थी, बताते हैं कि देरशाम को वन महकमे की टीम मौके पर आई थी, तब तक मगरमच्छ पानी में चला गया था। सोमवार को एक बार फिर मगरमच्छ नजर आया, जिसे देखने को गांव वालों का तांता लग गया। मरैहिया में मगरमच्छ के ठहरे रहने से ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है।