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स्कूलों में रसोइया लगा रहे झाड़ू, नहीं आ रहे सफाई कर्मी
Updated Tue, 10 Jul 2018 11:04 PM IST
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स्कूलों से सफाईकर्मी नदारद, झाडू लगा रही रसोइया
प्रधान के घर तक सीमित है सफाईकर्मी का आना
पिपरिया धनी। साहबगंज ग्रंट के गांव रामनगर स्थित प्राथमिक विद्यालय की सफाई करने के लिए सफाईकर्मी नहीं जा रहे हैं। इस कारण रसोइयों को स्कूल की साफ सफाई करनी पड़ रही है।
गांव और वहां के स्कूल साफ सुथरे रहें। इसके लिए गावों में सफाई कर्मचारी नियुक्त किए गए थे, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता और प्रधानों की सांठ-गांठ से सफाईकर्मी न तो गांव में ही सफाई कर रहे हैं और न ही स्कूलों की ही। गांव से लेकर स्कूल परिसार में गंदगी का अंबार है। इस कारण बच्चे गंदगी के बीच पढ़ने के लिए मजबूर हैं। सफाई कर्मचारियों के न आने पर स्कूल की साफ सफाई रसोइयों को करनी पड़ती है। गांव के लोगों का कहना है कि सफाई कर्मचारी कभी नहीं आता। सिर्फ प्रधान के घर तक आकर लौट जाता है। वहीं शिक्षामित्र सुनील कुमार का कहना है कि कई बार सफाई कर्मचारी से स्कूल की सफाई करने को कहा, लेकिन जब वह नहीं आया तो प्रधान को भी बताया, लेकिन उन्होंने स्कूल की सफाई कराना जरूरी नहीं समझा। रसोइया वीरा देवी, वीरमति, कुसमा का कहना है कि गंदगी के बीच खाना कैसे बन सकता है। इसलिए स्वयं सफाई कर लेते हैं।
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स्कूलों से सफाईकर्मी नदारद, झाडू लगा रही रसोइया
प्रधान के घर तक सीमित है सफाईकर्मी का आना
पिपरिया धनी। साहबगंज ग्रंट के गांव रामनगर स्थित प्राथमिक विद्यालय की सफाई करने के लिए सफाईकर्मी नहीं जा रहे हैं। इस कारण रसोइयों को स्कूल की साफ सफाई करनी पड़ रही है।
गांव और वहां के स्कूल साफ सुथरे रहें। इसके लिए गावों में सफाई कर्मचारी नियुक्त किए गए थे, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता और प्रधानों की सांठ-गांठ से सफाईकर्मी न तो गांव में ही सफाई कर रहे हैं और न ही स्कूलों की ही। गांव से लेकर स्कूल परिसार में गंदगी का अंबार है। इस कारण बच्चे गंदगी के बीच पढ़ने के लिए मजबूर हैं। सफाई कर्मचारियों के न आने पर स्कूल की साफ सफाई रसोइयों को करनी पड़ती है। गांव के लोगों का कहना है कि सफाई कर्मचारी कभी नहीं आता। सिर्फ प्रधान के घर तक आकर लौट जाता है। वहीं शिक्षामित्र सुनील कुमार का कहना है कि कई बार सफाई कर्मचारी से स्कूल की सफाई करने को कहा, लेकिन जब वह नहीं आया तो प्रधान को भी बताया, लेकिन उन्होंने स्कूल की सफाई कराना जरूरी नहीं समझा। रसोइया वीरा देवी, वीरमति, कुसमा का कहना है कि गंदगी के बीच खाना कैसे बन सकता है। इसलिए स्वयं सफाई कर लेते हैं।
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