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Lakhimpur Kheri News: दुधवा टाइगर रिजर्व में खोजी गईं मकड़ियों की 52 प्रजातियां
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दुधवा टाइगर रिजर्व में खोजी गयी मकड़ी की प्रजाति
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में 52 प्रजातियों की मकड़ियां पाई गई हैं। पिछले सप्ताह दुधवा में हुए एक अध्ययन के दौरान मकड़ियों की इन प्रजातियों को खोजा गया है। जीव वैज्ञानिकों की टीम ने तीन दिनों तक दुधवा में मकडि़यों की विविधता और संरचना को लेकर एक विशेष अध्ययन किया है।
जीव वैज्ञानिकों ने मकड़ी विविधता पर अध्ययन के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व में तीन अध्ययन क्षेत्र बनाए थे। इनमें एक एक बेलरायां रेंज का बेलापरसुआ, दूसरा दुधवा रेंज का दुधवा रेलवे स्टेशन और किशनपुर रेंज किशनपुर कैंप। प्रत्येक साइट पर तीन-तीन वैज्ञानिकों की टीम ने काम किया। जीव विज्ञानियों ने सुबह से लेकर देर रात तक सैंपलिंग की। साथ ही दूसरी टीमों के साथ ऑनलाइन डाटा एक्सचेंज भी किया। अध्ययन में माइक्रोलेंस और शक्तिशाली डिजिटल कैमरों का उपयोग किया गया।
अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक, मकड़ियों की सबसे ज्यादा प्रजातियां पहली साइट बेलापरसुआ में पाई गईं। यहां मकड़ियों की कुल 22 प्रजातियां पाई गई हैं। दुधवा स्टेशन पर 16 प्रजातियां और किशनपुर सेंक्चुरी में 14 प्रजातियां मिली हैं। इस तरह तीन दिन के अध्ययन में दुधवा में मकड़ियों की कुल 52 प्रजातियां खोजी गईं।
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दुधवा में मकड़ियों पर पहली बार अध्ययन किया गया। इसके लिए जीव वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई गई थी, जिसमें दुधवा टाइगर रिजर्व की जीव विज्ञानी अपूर्वा गुप्ता, डॉ. दया शंकर और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के रोहित रवि भी शामिल थे। 14 से 16 अप्रैल तक टीम ने तीन हिस्सों में बंट कर तीनों साइटों पर अलग-अलग अध्ययन किया।
अनुकूल है दुधवा लैंडस्केप
अध्ययन में पाया गया कि मकड़ी विविधता के लिहाज से दुधवा टाइगर रिजर्व काफी अनुकूल है। यहां की नम जलवायु, दलदली भूमि, हर वर्ष आने वाली बाढ़, घना वुड लैंड, विस्तृत ग्रासलैंड और वेटलैंड मकड़ियों के लिए अनुकूल वातावरण बनाती है। यहां मकड़ी प्रजातियों की संख्या और ज्यादा हो सकती है। इसके लिए विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता बताई गई। मकड़ियां जंगल के लिए हानिकारक कीटों को नष्ट करती हैं। इसके चलते दुधवा टाइगर रिजर्व की जैव और वानस्पतिक विविधता में इनकी बड़ी उपयोगिता है।
दुधवा में पाई गईं मकड़ियों की प्रजातियां
दुधवा टाइगर रिजर्व में तीन दिन के वैज्ञानिक अध्ययन में जंपिंग स्पाइडर, रेड वीवर एंट मिमिकिंग स्पाइडर, आर्ब स्पाइडर, स्पनी बैक्ड आर्ब वीवर, लांग जाव्ड आर्ब वीवर, स्ट्रप्डि लिनेक्स स्पाइडर और गोल्डेन आर्ब वीवर आदि 52 प्रजातियां पाई गई हैं। भारत वर्ष में अब तक मकड़ियों की 1940 प्रजातियां खोजी जा चुकी हैँ। जीव वैज्ञानिकों का कहना है कि व्यापक अध्ययन से दुधवा में मकड़ियों की और प्रजातियां खोजी जा सकती हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व में पिछले सप्ताह 14 अप्रैल से 16 अप्रैल तक दुधवा की जीव वैज्ञानिकों की टीम ने मकड़ियों की प्रजातियों अध्ययन किया है। इस अध्ययन के दौरान दुधवा की तीन साइटों पर मकड़ियों की 52 प्रजातियां खोजी गई हैं। भविष्य में दुधवा की मकड़ियों पर व्यापक अध्ययन कराया जाएगा।
-बी. प्रभाकर फील्ड डायरेक्टर दुधवा टाइगर रिजर्व
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जीव वैज्ञानिकों ने मकड़ी विविधता पर अध्ययन के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व में तीन अध्ययन क्षेत्र बनाए थे। इनमें एक एक बेलरायां रेंज का बेलापरसुआ, दूसरा दुधवा रेंज का दुधवा रेलवे स्टेशन और किशनपुर रेंज किशनपुर कैंप। प्रत्येक साइट पर तीन-तीन वैज्ञानिकों की टीम ने काम किया। जीव विज्ञानियों ने सुबह से लेकर देर रात तक सैंपलिंग की। साथ ही दूसरी टीमों के साथ ऑनलाइन डाटा एक्सचेंज भी किया। अध्ययन में माइक्रोलेंस और शक्तिशाली डिजिटल कैमरों का उपयोग किया गया।
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अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक, मकड़ियों की सबसे ज्यादा प्रजातियां पहली साइट बेलापरसुआ में पाई गईं। यहां मकड़ियों की कुल 22 प्रजातियां पाई गई हैं। दुधवा स्टेशन पर 16 प्रजातियां और किशनपुर सेंक्चुरी में 14 प्रजातियां मिली हैं। इस तरह तीन दिन के अध्ययन में दुधवा में मकड़ियों की कुल 52 प्रजातियां खोजी गईं।
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दुधवा में मकड़ियों पर पहली बार अध्ययन किया गया। इसके लिए जीव वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई गई थी, जिसमें दुधवा टाइगर रिजर्व की जीव विज्ञानी अपूर्वा गुप्ता, डॉ. दया शंकर और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के रोहित रवि भी शामिल थे। 14 से 16 अप्रैल तक टीम ने तीन हिस्सों में बंट कर तीनों साइटों पर अलग-अलग अध्ययन किया।
अनुकूल है दुधवा लैंडस्केप
अध्ययन में पाया गया कि मकड़ी विविधता के लिहाज से दुधवा टाइगर रिजर्व काफी अनुकूल है। यहां की नम जलवायु, दलदली भूमि, हर वर्ष आने वाली बाढ़, घना वुड लैंड, विस्तृत ग्रासलैंड और वेटलैंड मकड़ियों के लिए अनुकूल वातावरण बनाती है। यहां मकड़ी प्रजातियों की संख्या और ज्यादा हो सकती है। इसके लिए विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता बताई गई। मकड़ियां जंगल के लिए हानिकारक कीटों को नष्ट करती हैं। इसके चलते दुधवा टाइगर रिजर्व की जैव और वानस्पतिक विविधता में इनकी बड़ी उपयोगिता है।
दुधवा में पाई गईं मकड़ियों की प्रजातियां
दुधवा टाइगर रिजर्व में तीन दिन के वैज्ञानिक अध्ययन में जंपिंग स्पाइडर, रेड वीवर एंट मिमिकिंग स्पाइडर, आर्ब स्पाइडर, स्पनी बैक्ड आर्ब वीवर, लांग जाव्ड आर्ब वीवर, स्ट्रप्डि लिनेक्स स्पाइडर और गोल्डेन आर्ब वीवर आदि 52 प्रजातियां पाई गई हैं। भारत वर्ष में अब तक मकड़ियों की 1940 प्रजातियां खोजी जा चुकी हैँ। जीव वैज्ञानिकों का कहना है कि व्यापक अध्ययन से दुधवा में मकड़ियों की और प्रजातियां खोजी जा सकती हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व में पिछले सप्ताह 14 अप्रैल से 16 अप्रैल तक दुधवा की जीव वैज्ञानिकों की टीम ने मकड़ियों की प्रजातियों अध्ययन किया है। इस अध्ययन के दौरान दुधवा की तीन साइटों पर मकड़ियों की 52 प्रजातियां खोजी गई हैं। भविष्य में दुधवा की मकड़ियों पर व्यापक अध्ययन कराया जाएगा।
-बी. प्रभाकर फील्ड डायरेक्टर दुधवा टाइगर रिजर्व