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चीनी बिक्री की लिमिट की आड़ लेकर बजाज वालों ने भुगतान से खड़े किए हाथ

Fri, 19 Jul 2019 01:43 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jul 2019 01:43 AM IST
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चीनी बिक्री की लिमिट बताकर बजाज वालों ने खड़े किए हाथ
लखीमपुर खीरी। गन्ना किसानों का भुगतान 31 अगस्त तक करने पर सीएम योगी आदित्यनाथ कटिबद्घ हुए तो डीएम शैलेन्द्र कुमार सिंह ने भी सभी चीनी मिल के यूनिट हेड की बैठक बुला ली। इसमें बजाज ग्रुप की तीनों मिलों के अधिकारियों ने कैश क्रेडिट लिमिट और चीनी बिक्री की लिमिट का हवाला देकर ज्यादा भुगतान न कर पाने की बात कह दी। कहा कि जितनी चीनी बिक पाएगी, उतना ही वे भुगतान कर पाएंगे। अधिकारियों के इस बयान के बाद हजारों गन्ना किसानों का भुगतान लंबे समय अटकना तय हो गया है।
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कलेक्ट्रेट सभागार में समीक्षा के दौरान जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने चीनी मिलों पर बकाए की स्थिति रखते हुए बताया कि सभी नौ मिलों पर 14 अरब 15 करोड़ 27 लाख 25 हजार गन्ना मूल्य बकाया है, जिसमें से बजाज की तीनों मिलों पर सबसे अधिक नौ अरब 53 करोड़ 82 लाख सात हजार रुपये बकाया है। वहीं ऐरा मिल पर भी दो अरब 73 करोड़ 65 लाख 88 हजार रुपये बकाया है। डीएम ने इन मिलों के प्रतिनिधियों से जवाब मांगा, तो बजाज वालों ने भारत सरकार द्वारा चीनी बिक्री में लगाई लिमिट का तर्क देते हुए 31 अगस्त तक भुगतान करने से हाथ खड़े कर दिए। इस पर डीएम भी भौचक्के रह गए और उन्होंने चीनी मिल प्रतिनिधियों को आड़े हाथ लेते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश 31 अगस्त तक संपूर्ण गन्ना मूल्य भुगतान का हवाला दिया। उन्होंने समय से भुगतान करने की कार्ययोजना बनाकर प्रस्तुत करने के प्रतिनिधियों को निर्देश दिए हैं। इसके अलावा चडअीएम ने चीनी मिलों का मरम्मत कार्य समय सीमा के अंदर पूर्ण कराने के लिए कहा। गन्ना सर्वे की समीक्षा में डीएम ने सट्टा संचालन से पूर्व प्रत्येक सट्टे की कृषि योग्य भूमि का मिलान कराने का निर्देश दिया है।
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ट्रैक्टर-ट्राला से गन्ना ढुलाई पर रोक लगाने का उठा मुद्दा
समीक्षा बैठक में जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने चीनी मिलों द्वारा गन्ना ढुलाई के लिए ट्रैक्टर-ट्राला के प्रयोग करने पर आपत्ति जताई और इनसे होने वाले सड़क हादसों और सड़कों के क्षतिग्रस्त होने का जिक्र किया। डीएम ने इसे संज्ञान में लेते हुए ओवरलोड ट्राला पर बैन लगाने के निर्देश दिए हैं।
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सिर्फ एक यूनिट हेड ही बैठक में आए
गन्ना मूूल्य भुगतान को लेकर चीनी मिल मालिक किस कदर फिक्रमंद है, जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि डीएम की अध्यक्षता वाली समीक्षा में सिर्फ पलिया मिल के यूनिट हेड उपस्थित हुए, जबकि अन्य आठ मिलों से प्रतिनिधि के तौर पर जीएम केन उपस्थित हुए। इस पर डीएम ने नाराजगी जताई है।

छह मिलों पर भी करोड़ों में बकाया
बजाज और एडवंट्ज ग्रुप की चार मिलों पर अरबों रुपये बकाया हैं, तो अन्य पांच मिलों पर भी करोड़ों रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। अजबापुर मिल पर 21.47 करोड़, कुंभी पर 51.68 करोड़, गुलरिया पर 35.33 करोड़, बेलरायां पर 47.05 करोड़ और संपूर्णानगर पर 32.23 करोड़ रुपये बकाया है।

बजाज ग्रुप की चीनी मिलों की कैश क्रेडिट लिमिट न बन पाने के कारण चीनी और अन्य उत्पाद की बिक्री से होने वाली आय का 85 प्रतिशत किसानों के खातों में भेज दिया जाता है। चूंकि चीनी बिक्री का कोटा केन्द्र सरकार निर्धारित करती है, इसलिए एक निश्चित मात्रा में ही चीनी बेचकर भुगतान किया जा रहा है। शेष 15 प्रतिशत से मिल के खर्चे पूरे किए जाते हैं। बैठक में बताया गया कि सरकार अनुदान दे अथवा चीनी बिक्री का कोटा बढ़ाया जाए, तभी भुगतान संभव है।
राकेश यादव, यूनिट हेड, बजाज चीनी मिल, पलिया।

बजाज और एडवंट्ज ग्रुप की चार मिलों पर सबसे अधिक गन्ना मूल्य बकाया है, जिसका 31 अगस्त 2019 तक हर हाल में ब्याज सहित भुगतान करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अन्य चीनी मिलों के प्रतिनिधियों ने संपूर्ण भुगतान करने का आश्वासन दिया है। समय सीमा में भुगतान न करने वाली मिलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर वसूली की कार्रवाई की जाएगी।
शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम

बैंक की शर्तें पूरी नहीं कर पा रहीं बजाज की मिलें
डीसीओ ब्रजेश पटेल ने बताया कि बजाज ग्रुप की तीनों मिलें गोला, पलिया और खंभारखेड़ा पांच वर्षों से बैंक की शर्तों को पूरा नहीं कर पा रही हैं। इस कारण कोई भी बैंक इनकी कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) नहीं बना रहा हैै। बजाज ने पॉवर प्रोजेक्ट लगाने के लिए बैंको से लोन लिया था, जिसे चुका नहीं पाए। इससे बैंक ने तीनों मिलों को डिफाल्टर की श्रेणी में रखते हुए इनकी सीसीएल नहीं बनाई है। इसके अलावा हाल में प्रदेश सरकार द्वारा चीनी मिलों को दिए गए सॉफ्ट लोन की प्रक्रिया में भी शर्तों को पूरा न कर पाने से बजाज की मिलों को सॉफ्ट लोन नहीं दिया गया। यही वजह है कि यह मिलें चीनी बेचकर भुगतान कर रही हैं, जिससे यह किसानों को पैसा देने पाने में पीछे हैं।


चीनी बेचकर भी पलिया नहीं कर पाएगी भुगतान
बजाज की पलिया मिल पर तीन अरब 15 करोड़ 60 लाख 36 हजार रुपये गन्ना मूल्य बकाया है, जबकि मिल के गोदाम में पांच लाख 15 हजार 581 क्विंटल चीनी स्टाक है। इसका संभावित बाजार मूल्य एक अरब 61 करोड़ नौ लाख 99 हजार रुपये हैं। लिहाजा पलिया मिल पूरी चीनी बेचकर भी किसानों का बकाया भुगतान नहीं कर पाएगी। इसी तरह गोला पर बकाया तीन अरब 76 करोड़ 74 लाख 67 हजार के सापेक्ष गोदाम में 11 लाख 66 हजार 940 क्विंटल चीनी स्टाक है, जिसका संभावित मूल्य तीन अरब 79 करोड़ 25 लाख 55 हजार रुपये है। खंभारखेड़ा मिल पर बकाया दो अरब 61 करोड़ 47 लाख चार हजार के सापेक्ष नौ लाख 23 हजार 49 क्विंटल चीनी स्टाक है, जिसका संभावित बाजार मूल्य दो अरब 93 करोड़ 87 लाख 23 हजार रुपये है। इसी तरह ऐरा मिल पर दो अरब 73 करोड़ 65 लाख 88 हजार रुपये बकाया है, जिसके सापेक्ष 11 लाख 63 हजार 160 क्विंटल चीनी स्टाक है। इसका संभावित बाजार मूल्य तीन अरब 65 करोड़ नौ लाख 13 हजार रुपये हैै।
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