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फूलबेहड़ के खेतौसा में नवनिर्मित शौचालयों में पकड़ी गड़बडिय़ां

Sat, 18 Nov 2017 10:58 PM IST
Updated Sat, 18 Nov 2017 10:58 PM IST
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फूलबेहड़ के खेतौसा में नवनिर्मित शौचालयों में पकड़ी गड़बडिय़ां
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लखीमपुर खीरी।
अक्तूबर 2018 तक गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) करने की कोशिशों को झटका लगा है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत नवनिर्मित शौचालय मानकों पर फेल हो रहे हैं, जिससे इन शौचालयों का प्रयोग नहीं किया जा रहा। जिला पंचायत राज अधिकारी ने निरीक्षण करके सदर ब्लॉक की ग्राम पंचायत केशवपुर गुरेला के बाद फूलबेहड़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत खेतौसा में बनाए गए शौचालयों की स्थिति देखी तो उनमें तकनीकी और गुणवत्ता की खामियां पाई गईं। किसी में पाइप कम डाली गई और किसी में दो के बजाय एक गड्ढा ही बनाया गया।
कई शौचालयों के निर्माण में खामियां उजागर हुई हैं। यह हाल तब है कि राजगीर मिस्त्रियों को कई बार प्रशिक्षण दिया गया था। डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने शौचालय निर्माण में खामी पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। कार्रवाई के लिए निरीक्षण रिपोर्ट डीएम और सीडीओ को भेजी है।
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खेतौसा ग्राम पंचायत में वर्ष 2017-18 में 100 शौचालयों का निर्माण कराने के लिए प्रथम किस्त जारी की गई थी। डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने टीम के साथ गांव में शौचालय और विकास कार्यों का निरीक्षण किया, जिसमें मुजफ्फर, जावीर, नसीम, सहलन, सकीरा, सईद, मुनीर, जाकिर, उमर, रोज अली के निर्माणाधीन शौचालय में तकनीकी और गुणवत्ता की कमियां पाई गईं। डीपीआरओ के मुताबिक शौचालय का चैंबर वाई आकार का नहीं बनाया गया, पाइप कम डाली गई। दो के बजाय एक गड्ढा बनाया गया, उसमें भी ठोस रद्दा नही है। चैंबर और गड्ढों के बीच की दूरी कम मिली है। इसी तरह वर्ष 2016-17 में निर्मित सद्दीक के शौचालय के गड्ढों पर पिट कवर नहीं पाया गया, जिससे लाभार्थी शौचालय का प्रयोग नहीं कर रहा है। जबकि रामश्री की ओर से स्वयं के संसाधनों से 2016-17 में बनाया गया शौचालय उपयोग में नहीं पाया गया है।
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नवनिर्मित शौचालयों में मिली कमियों के लिए सीधे तौर पर खंड प्रेरक, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी और एडीओ पंचायत दोषी हैं, जिनकी लापरवाही से मानक के अनुरूप शौचालयों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। सभी को लगातार पर्यवेक्षण के निर्देश हैं, जिसका पालन नहीं हो रहा है। ऐसे कर्मियों के खिलाफ समुचित कार्रवाई की जाएगी।
-चंद्रिका प्रसाद, डीपीआरओ
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