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Kushinagar News: बच्चों, इस बार भी फर्श पर बैठकर करनी पड़ेगी पढ़ाई
Wed, 29 Mar 2023 12:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 29 Mar 2023 12:53 AM IST
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कन्या प्राथमिक विद्यालय साहबगंज में फर्श पर बैठकर पढ़ते विद्यार्थी।संवाद फाइल फोटो
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1670 स्कूलों में मुहैया नहीं हो सके फर्नीचर, नए सत्र में भी टाट-पट्टी का रहेगा सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिले के महज 32.02 प्रतिशत विद्यालयों में ही अब तक फर्नीचर की व्यवस्था हो सकी है, जबकि 67.98 फीसदी परिषदीय विद्यालय इस सुविधा से वंचित हैं। ऐसे में चार दिन बाद शुरू हो रहे नए शैक्षिक सत्र में भी 1670 विद्यार्थियों को टाट-पट्टी पर बैठक कर पढ़ाई करनी पड़ सकती है।
निजी विद्यालयों को टक्कर देने के लिए कायाकल्प योजना के तहत परिषदीय विद्यालयों में 18 बिंदुओं पर निर्माण कार्य के अलावा विद्यार्थियों की सुविधा के लिए फर्नीचर, पंखा, प्रोजेक्टर समेत अन्य संसाधन उपलब्ध करानी है, लेकिन विभागीय लापरवाही की वजह से जिले के महज 794 विद्यालयों में ही फर्नीचर लग सके हैं। 1670 परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थी टाट-पट्टी पर ही बैठक कर पढ़ाई करते हैं।
सबसे खराब स्थिति पडरौना, रामकोला, कप्तानगंज, हाटा, खड्डा, कसया और सेवरही ब्लॉक क्षेत्र की है। रामकोला ब्लॉक में एक, कप्तानगंज ब्लॉक में तीन, हाटा ब्लॉक में तीन, कसया ब्लॉक में दो, पडरौना ब्लॉक में दो, सेवरही ब्लॉक में एक विद्यालय में फर्नीचर की सुविधा उपलब्ध हो पाई है।
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खड्डा ब्लॉक के किसी भी विद्यालय में फर्नीचर की व्यवस्था नहीं हो सकी है, जबकि चार दिन बाद यानी एक अप्रैल से परिषदीय विद्यालयों में नए शैक्षिक सत्र शुरू होने वाला है। ऐसे में अधिकतर विद्यालयों में फर्नीचर नहीं होने से नए शैक्षिक सत्र में भी इन विद्यालयों के बच्चों को फर्श पर टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करनी होगी।
....
कोट
मार्च में कुछ विद्यालयों में फर्नीचर भिजवाया गया है। शेष विद्यालयों में भी अप्रैल माह के अंत तक फर्नीचर उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति भी मिलने की संभावना है। अप्रैल के अंत तक सभी विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
-डॉ. राम जियावन मौर्या, बीएसए
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संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिले के महज 32.02 प्रतिशत विद्यालयों में ही अब तक फर्नीचर की व्यवस्था हो सकी है, जबकि 67.98 फीसदी परिषदीय विद्यालय इस सुविधा से वंचित हैं। ऐसे में चार दिन बाद शुरू हो रहे नए शैक्षिक सत्र में भी 1670 विद्यार्थियों को टाट-पट्टी पर बैठक कर पढ़ाई करनी पड़ सकती है।
निजी विद्यालयों को टक्कर देने के लिए कायाकल्प योजना के तहत परिषदीय विद्यालयों में 18 बिंदुओं पर निर्माण कार्य के अलावा विद्यार्थियों की सुविधा के लिए फर्नीचर, पंखा, प्रोजेक्टर समेत अन्य संसाधन उपलब्ध करानी है, लेकिन विभागीय लापरवाही की वजह से जिले के महज 794 विद्यालयों में ही फर्नीचर लग सके हैं। 1670 परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थी टाट-पट्टी पर ही बैठक कर पढ़ाई करते हैं।
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सबसे खराब स्थिति पडरौना, रामकोला, कप्तानगंज, हाटा, खड्डा, कसया और सेवरही ब्लॉक क्षेत्र की है। रामकोला ब्लॉक में एक, कप्तानगंज ब्लॉक में तीन, हाटा ब्लॉक में तीन, कसया ब्लॉक में दो, पडरौना ब्लॉक में दो, सेवरही ब्लॉक में एक विद्यालय में फर्नीचर की सुविधा उपलब्ध हो पाई है।
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खड्डा ब्लॉक के किसी भी विद्यालय में फर्नीचर की व्यवस्था नहीं हो सकी है, जबकि चार दिन बाद यानी एक अप्रैल से परिषदीय विद्यालयों में नए शैक्षिक सत्र शुरू होने वाला है। ऐसे में अधिकतर विद्यालयों में फर्नीचर नहीं होने से नए शैक्षिक सत्र में भी इन विद्यालयों के बच्चों को फर्श पर टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करनी होगी।
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कोट
मार्च में कुछ विद्यालयों में फर्नीचर भिजवाया गया है। शेष विद्यालयों में भी अप्रैल माह के अंत तक फर्नीचर उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति भी मिलने की संभावना है। अप्रैल के अंत तक सभी विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
-डॉ. राम जियावन मौर्या, बीएसए