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श्रद्धापूर्वक पूजे गए नागदेवता
ब्यूरो/अमर उजाला कुशीनगर
Updated Sun, 07 Aug 2016 11:31 PM IST
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पूजे गए।
- फोटो : अमर उजाला
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नागदेवता की पूजा का त्योहार नागपंचमी रविवार को जिले भर में परंपरागत ढंग से मनाई गई। श्रद्धालुओं ने कटहल के पत्ते पर दूध-लावा चढ़ाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की तथा नागदेवता से परिवार पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की।
श्रद्धालुओं ने सुबह ही अपने घरों की साफ-सफाई करने के बाद पूजा की प्रक्रिया शुरू कर दी। मंत्रोच्चारित गाय के गोबर से अपने दरवाजे पर नागदेवता की आकृतियां बनाई। उसके बाद कटहल के पत्ते पर गाय का दूध और लावा चढ़ाकर पूजा की। मंदिरों में भी नागदेवता की आकृति पर श्रद्धालुओं ने दूध-लावा चढ़ाया। खेतों में भी नागदेवता की पूजा की गई। दोपहर तक यह सिलसिला चलता रहा।
तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार तहसील क्षेत्र के तमकुहीरोड, राजपुर, ब्रह्मपुर, पिरोजहां, मिश्रौली, सलेमगढ़, तरयासुजान, बभनौली, मेहदिया, अहिरौलीदान, जंगलीपट्टी, परसा, घघवा जगदीश, बेदूपार, टिकुलिया, भुलिया सहित अन्य सभी गांवों में नागपंचमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। वहीं सपेरों की ओर से लाए गए नागों का बड़ी संख्या में लोगों ने दर्शन किया। लोगों का कहना था कि नागपंचमी के दिन नागों का दर्शन और पूजन विशेष फलदायी होता है। पं. नागेंद्र द्विवेदी का कहना था कि नागपंचमी पर्व के साथ अन्य पर्वों के मनाने का सिलसिला प्रारंभ हो गया है, जो कार्तिक पूर्णिमा तक चलेगा।
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श्रद्धालुओं ने सुबह ही अपने घरों की साफ-सफाई करने के बाद पूजा की प्रक्रिया शुरू कर दी। मंत्रोच्चारित गाय के गोबर से अपने दरवाजे पर नागदेवता की आकृतियां बनाई। उसके बाद कटहल के पत्ते पर गाय का दूध और लावा चढ़ाकर पूजा की। मंदिरों में भी नागदेवता की आकृति पर श्रद्धालुओं ने दूध-लावा चढ़ाया। खेतों में भी नागदेवता की पूजा की गई। दोपहर तक यह सिलसिला चलता रहा।
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तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार तहसील क्षेत्र के तमकुहीरोड, राजपुर, ब्रह्मपुर, पिरोजहां, मिश्रौली, सलेमगढ़, तरयासुजान, बभनौली, मेहदिया, अहिरौलीदान, जंगलीपट्टी, परसा, घघवा जगदीश, बेदूपार, टिकुलिया, भुलिया सहित अन्य सभी गांवों में नागपंचमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। वहीं सपेरों की ओर से लाए गए नागों का बड़ी संख्या में लोगों ने दर्शन किया। लोगों का कहना था कि नागपंचमी के दिन नागों का दर्शन और पूजन विशेष फलदायी होता है। पं. नागेंद्र द्विवेदी का कहना था कि नागपंचमी पर्व के साथ अन्य पर्वों के मनाने का सिलसिला प्रारंभ हो गया है, जो कार्तिक पूर्णिमा तक चलेगा।
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