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Kushinagar News: ईश्वर की प्राप्ति है मानव जीवन का उद्देश्य
Sun, 20 Oct 2024 04:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 20 Oct 2024 04:01 AM IST
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फाजिलनगर। कस्बे के पावानगर महावीर इंटर काॅलेज में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की तरफ से आयोजित पांच दिवसीय हरि कथामृत के चौथे दिन मानव जीवन का उद्देश्य पर चर्चा की गई। कथा वाचक ने कहा कि मानव जीवन पाने का उद्देश्य ईश्वर को प्राप्त करना है।
कथा वाचक साध्वी सुबुद्धा भारती ने कहा कि दुर्लभ मानव जीवन का उद्देश्य भोग-विलास का जीवन जीना नहीं है, अपितु जीवन का प्रमुख उद्देश्य भगवत प्राप्ति एवं मोक्ष प्राप्त कर जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पाना है। मनुष्य को ईश्वर की सर्वोत्तम कृति कहा गया है, मानव जीवन क्षणभंगुर होने के कारण धन, स्त्री, संतान आदि की प्राप्ति ही जीवन का उद्देश्य मान लेता है। भौतिक संसाधनों की प्राप्ति से मनुष्य को क्षणिक सुख भले ही मिल जाए, लेकिन स्थाई सुख एवं आनंद की प्राप्ति केवल ईश्वर की शरण में परमानंद की प्राप्ति से ही संभव है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत गीता में यह कहा गया है कि मनुष्य शरीर प्राप्त करके भी, जो परमात्मा को पाने का प्रयास नहीं करता वह आत्महंता की तरह है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश देते हुए यही कहा था कि मनुष्य को अपने उद्धार के लिए स्वयं प्रयत्नशील होना चाहिए। कथा का शुभारंभ विधायक सुरेंद्र कुमार कुशवाहा और रामकोला विधायक विनय प्रकाश गोंड ने दीप प्रज्वलित और व्यास गद्दी का पूजन कर किया।
इस दौरान प्रधानाचार्य डॉ. अक्षयवर पांडेय, मनंजय तिवारी, जीतेंद्र प्रजापति, दुर्गेश सिंह, रामाधार वर्मा, शेषमुनि गुप्ता आदि मौजद रहे।
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कथा वाचक साध्वी सुबुद्धा भारती ने कहा कि दुर्लभ मानव जीवन का उद्देश्य भोग-विलास का जीवन जीना नहीं है, अपितु जीवन का प्रमुख उद्देश्य भगवत प्राप्ति एवं मोक्ष प्राप्त कर जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पाना है। मनुष्य को ईश्वर की सर्वोत्तम कृति कहा गया है, मानव जीवन क्षणभंगुर होने के कारण धन, स्त्री, संतान आदि की प्राप्ति ही जीवन का उद्देश्य मान लेता है। भौतिक संसाधनों की प्राप्ति से मनुष्य को क्षणिक सुख भले ही मिल जाए, लेकिन स्थाई सुख एवं आनंद की प्राप्ति केवल ईश्वर की शरण में परमानंद की प्राप्ति से ही संभव है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत गीता में यह कहा गया है कि मनुष्य शरीर प्राप्त करके भी, जो परमात्मा को पाने का प्रयास नहीं करता वह आत्महंता की तरह है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश देते हुए यही कहा था कि मनुष्य को अपने उद्धार के लिए स्वयं प्रयत्नशील होना चाहिए। कथा का शुभारंभ विधायक सुरेंद्र कुमार कुशवाहा और रामकोला विधायक विनय प्रकाश गोंड ने दीप प्रज्वलित और व्यास गद्दी का पूजन कर किया।
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इस दौरान प्रधानाचार्य डॉ. अक्षयवर पांडेय, मनंजय तिवारी, जीतेंद्र प्रजापति, दुर्गेश सिंह, रामाधार वर्मा, शेषमुनि गुप्ता आदि मौजद रहे।