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Kushinagar News: सचिवों की हड़ताल से रबी की बोआई पर संकट, धान खरीद भी हो सकती है प्रभावित
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एक नवंबर से धान खरीद का बहिष्कार करने की चेतावनी, सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतन की कर रहे मांग
145 साधन सहकारी समितियों पर लगा ताला, किसान हो रहे परेशान
पडरौना। वेतन की मांग को लेकर सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल से जिले की 145 समितियों पर ताला लटका है। इससे किसानों को उर्वरक नहीं मिल पा रहा है और रबी की बोआई की तैयारी प्रभावित होने लगी है। सचिवों ने मांगें पूरी नहीं होने पर एक नवंबर से धान खरीद का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार 15 नवंबर से रबी की बोआई के लिए मौसम अनुकूल माना जाता है। गेहूं के बीज, उर्वरक की उपलब्धता कृषि विभाग और सहकारिता विभाग की ओर से कर लिया जाता है। 22 अक्तूबर से सचिवों के हड़ताल पर जाने से आधी-अधूरी तैयारी हुई है, जिन समितियों पर उर्वरक है, वहां ताला बंद है और किसानों को उर्वरक नहीं मिल पा रहा है। रबी की बोआई के लिए उर्वरक को लेकर किसान अभी से परेशान हैं। जिले के 35 समितियों पर धान क्रय केंद्र बनाया गया है। वहीं रबी की बोआई को लेकर होने वाले अग्रिम विभागीय तैयारी भी पूरा नहीं हो सकी है।
जिले में 35 समितियों पर धान क्रय केंद्र बनाया गया है, सरकार मांग पर विचार नहीं करती है तो सचिव धान की खरीदारी भी नहीं करेंगे। इसको लेकर सहकारिता विभाग परेशान है। समस्या के समाधान के लिए लगातार एआर कॉआपरेटिव सचिवों से वार्ता कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है। पैक्स सचिव वेलफेयर सोसाइटी जनपदीय शाखा कुशीनगर के अध्यक्ष रविंद्र त्रिपाठी ने बताया कि सचिवों को कमीशन से मानदेय मिलता है, जिससे जीवन यापन करना मुश्किल होता है।
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सरकारी कर्मचारियों की तरह सचिवों को वेतन सरकार दें, इलाज की सुविधा भी मुहैया कराए। जब तक मांग पूरा नहीं होगा, तब तक हड़ताल जारी रहेगा। कोई सचिव समिति पर नहीं जा रहा है और न ही उर्वरक का वितरण कर रहा है। धान खरीद का बहिष्कार भी किया जाएगा।
पिछड़ सकती है रबी की बोआई
जौरा बाजार। पूरे क्षेत्र में सहकारी समितियों में ताला बंद होने से किसानों में हाहाकार मचा है। ऊंचे खेतों में धान की फसल भी कट गई है। किसानों को उसमें सरसों की बोआई करनी है। किसानों खाद नहीं मिलने के कारण मजबूर होकर प्राइवेट दुकानों से खाद खरीद रहा है। सुनने में आया है कि हड़ताल अनिश्चितकालीन हो गया है। किसानों के लिए बहुत ही कष्टदायक साबित हो रहा है। किसानों की मांग है कि सरकार हड़ताल समाप्त करने का तत्काल प्रयास करना चाहिए। अगर हड़ताल समाप्त होने में देरी हुई तो किसानों को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।
उर्वरक मौजूद लेकिन ताला बंद
लक्ष्मीगंज। बहुउद्देश्यीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति लक्ष्मीगंज और खोटही में डीएपी खाद उपलब्ध हैं लेकिन सचिवों के हड़ताल से खाद वितरण नहीं हो पा रहा है। दोनों समितियों के सचिव सत्येंद्र कुमार ने बताया कि खोटही और लक्ष्मीगंज समितियों में 300-300 बोरी डीएपी खाद मौजूद हैं। अनुपस्थित होने से किसानों को खाद वितरित नहीं हो पाई हैं। सचिवों की हड़ताल चल रही हैं जिससे सचिव मांगों के समर्थन में सचिव 22 अक्तूबर से लखनऊ में धरना दे रहे हैं। इन समितियों से लालाछपरा, खोटही, पगार, दीउलिहा मनिया छपरा, फुलवरिया, आदि गांवों के किसान जुड़े हुए हैं।
स्पीकअप
15 नवंबर से गेहूं की बोआई शुरू हो जाती है, जिन खेतों में जलभराव नहीं हुआ है उन खेतों को तैयार किया जा रहा है। सचिवों के हड़ताल पर चले जाने से समितियों का ताला नहीं खुल रहा है। इससे बोआई पिछड़ सकती है।
-कृष्ण प्रकाश दीक्षित, दांदोपुर।
सचिवों के हड़ताल पर जाने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। बाजार में अधिक दाम पर उर्वरक मिल रहे हैं। किसान अभी से गेहूं की बोआई की तैयारी कर रहे हैं। सरकार को इसे गंभीरता से लेकर समाधान कराना चाहिए।
-महेंद्र सिंह, सहुआडीह।
वर्जन
अधिकांश समितियों पर उर्वरक उपलब्ध है। सचिवों से समितियों को खोलने के लिए बात की जा रही है। अगर सचिव समिति नहीं खोलते हैं तो विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। यह हड़ताल प्रदेशव्यापी है। उच्चाधिकारियों की ओर से इस पर विचार किया जा रहा है।
-नीरज गौंड़, एआर कॉआपरेटिव कुशीनगर।
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145 साधन सहकारी समितियों पर लगा ताला, किसान हो रहे परेशान
पडरौना। वेतन की मांग को लेकर सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल से जिले की 145 समितियों पर ताला लटका है। इससे किसानों को उर्वरक नहीं मिल पा रहा है और रबी की बोआई की तैयारी प्रभावित होने लगी है। सचिवों ने मांगें पूरी नहीं होने पर एक नवंबर से धान खरीद का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार 15 नवंबर से रबी की बोआई के लिए मौसम अनुकूल माना जाता है। गेहूं के बीज, उर्वरक की उपलब्धता कृषि विभाग और सहकारिता विभाग की ओर से कर लिया जाता है। 22 अक्तूबर से सचिवों के हड़ताल पर जाने से आधी-अधूरी तैयारी हुई है, जिन समितियों पर उर्वरक है, वहां ताला बंद है और किसानों को उर्वरक नहीं मिल पा रहा है। रबी की बोआई के लिए उर्वरक को लेकर किसान अभी से परेशान हैं। जिले के 35 समितियों पर धान क्रय केंद्र बनाया गया है। वहीं रबी की बोआई को लेकर होने वाले अग्रिम विभागीय तैयारी भी पूरा नहीं हो सकी है।
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जिले में 35 समितियों पर धान क्रय केंद्र बनाया गया है, सरकार मांग पर विचार नहीं करती है तो सचिव धान की खरीदारी भी नहीं करेंगे। इसको लेकर सहकारिता विभाग परेशान है। समस्या के समाधान के लिए लगातार एआर कॉआपरेटिव सचिवों से वार्ता कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है। पैक्स सचिव वेलफेयर सोसाइटी जनपदीय शाखा कुशीनगर के अध्यक्ष रविंद्र त्रिपाठी ने बताया कि सचिवों को कमीशन से मानदेय मिलता है, जिससे जीवन यापन करना मुश्किल होता है।
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सरकारी कर्मचारियों की तरह सचिवों को वेतन सरकार दें, इलाज की सुविधा भी मुहैया कराए। जब तक मांग पूरा नहीं होगा, तब तक हड़ताल जारी रहेगा। कोई सचिव समिति पर नहीं जा रहा है और न ही उर्वरक का वितरण कर रहा है। धान खरीद का बहिष्कार भी किया जाएगा।
पिछड़ सकती है रबी की बोआई
जौरा बाजार। पूरे क्षेत्र में सहकारी समितियों में ताला बंद होने से किसानों में हाहाकार मचा है। ऊंचे खेतों में धान की फसल भी कट गई है। किसानों को उसमें सरसों की बोआई करनी है। किसानों खाद नहीं मिलने के कारण मजबूर होकर प्राइवेट दुकानों से खाद खरीद रहा है। सुनने में आया है कि हड़ताल अनिश्चितकालीन हो गया है। किसानों के लिए बहुत ही कष्टदायक साबित हो रहा है। किसानों की मांग है कि सरकार हड़ताल समाप्त करने का तत्काल प्रयास करना चाहिए। अगर हड़ताल समाप्त होने में देरी हुई तो किसानों को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।
उर्वरक मौजूद लेकिन ताला बंद
लक्ष्मीगंज। बहुउद्देश्यीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति लक्ष्मीगंज और खोटही में डीएपी खाद उपलब्ध हैं लेकिन सचिवों के हड़ताल से खाद वितरण नहीं हो पा रहा है। दोनों समितियों के सचिव सत्येंद्र कुमार ने बताया कि खोटही और लक्ष्मीगंज समितियों में 300-300 बोरी डीएपी खाद मौजूद हैं। अनुपस्थित होने से किसानों को खाद वितरित नहीं हो पाई हैं। सचिवों की हड़ताल चल रही हैं जिससे सचिव मांगों के समर्थन में सचिव 22 अक्तूबर से लखनऊ में धरना दे रहे हैं। इन समितियों से लालाछपरा, खोटही, पगार, दीउलिहा मनिया छपरा, फुलवरिया, आदि गांवों के किसान जुड़े हुए हैं।
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15 नवंबर से गेहूं की बोआई शुरू हो जाती है, जिन खेतों में जलभराव नहीं हुआ है उन खेतों को तैयार किया जा रहा है। सचिवों के हड़ताल पर चले जाने से समितियों का ताला नहीं खुल रहा है। इससे बोआई पिछड़ सकती है।
-कृष्ण प्रकाश दीक्षित, दांदोपुर।
सचिवों के हड़ताल पर जाने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। बाजार में अधिक दाम पर उर्वरक मिल रहे हैं। किसान अभी से गेहूं की बोआई की तैयारी कर रहे हैं। सरकार को इसे गंभीरता से लेकर समाधान कराना चाहिए।
-महेंद्र सिंह, सहुआडीह।
वर्जन
अधिकांश समितियों पर उर्वरक उपलब्ध है। सचिवों से समितियों को खोलने के लिए बात की जा रही है। अगर सचिव समिति नहीं खोलते हैं तो विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। यह हड़ताल प्रदेशव्यापी है। उच्चाधिकारियों की ओर से इस पर विचार किया जा रहा है।
-नीरज गौंड़, एआर कॉआपरेटिव कुशीनगर।