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न्याय और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं श्रीकृष्ण : डाॅ. इंद्रजीत पांडेय
Sun, 10 Nov 2024 01:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 10 Nov 2024 01:59 AM IST
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उजारनाथ। अमरवा खुर्द में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमयी भागवत कथा के सातवें दिन शुक्रवार को कथा वाचक डाॅ. इंद्रजीत पांडेय ने श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म और उनकी लीलाएं हमें धर्म, न्याय और सत्य मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। उनका जन्म धर्म स्थापना के लिए हुआ था।
उन्होंने कहा कि मथुरा का राजा कंस एक अत्याचारी राजा था। उसने अपने पिता उग्रसेन को बंदी बना लिया और स्वयं राजा बन बैठा। कंस की बहन देवकी का विवाह वसुदेव जी से हुआ था। विवाह के समय आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस का वध करेगी। इस भविष्यवाणी को सुनकर कंस बहुत डर गया और उसने देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया। कंस ने देवकी की सात संतानें जैसे ही जन्म लेतीं, उन्हें मार डाला। वह चाहता था कि भविष्यवाणी झूठी साबित हो, लेकिन वह इस बात से अनजान था कि उसकी यह क्रूरता ही उसे उसके विनाश के करीब ले जाएगी। देवकी की आठवीं संतान कृष्ण का जन्म आधी रात को भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र में हुआ। वासुदेव जी कृष्ण को टोकरी में लेकर गोकुल पहुंचे, जहां उन्होंने कृष्ण को नंद बाबा और यशोदा माता के पास छोड़ दिया। इस दौरान प्रभुनाथ सिंह, संदीप सिंह,राजकुमार पाण्डेय, अजीत सिंह,शाश्वत पाण्डेय,रविप्रकाश पाण्डेय, उदयभान सिंह, जीतबहादुर राव, अनुराग, राघवेन्द्र राव, शशिभूषण राय, कैलाश सिंह, मोहित कुमार, चंद्रावती देवी, रीता देवी, लक्ष्मी देवी, रिंकी देवी, सपना देवी आदि उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि मथुरा का राजा कंस एक अत्याचारी राजा था। उसने अपने पिता उग्रसेन को बंदी बना लिया और स्वयं राजा बन बैठा। कंस की बहन देवकी का विवाह वसुदेव जी से हुआ था। विवाह के समय आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस का वध करेगी। इस भविष्यवाणी को सुनकर कंस बहुत डर गया और उसने देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया। कंस ने देवकी की सात संतानें जैसे ही जन्म लेतीं, उन्हें मार डाला। वह चाहता था कि भविष्यवाणी झूठी साबित हो, लेकिन वह इस बात से अनजान था कि उसकी यह क्रूरता ही उसे उसके विनाश के करीब ले जाएगी। देवकी की आठवीं संतान कृष्ण का जन्म आधी रात को भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र में हुआ। वासुदेव जी कृष्ण को टोकरी में लेकर गोकुल पहुंचे, जहां उन्होंने कृष्ण को नंद बाबा और यशोदा माता के पास छोड़ दिया। इस दौरान प्रभुनाथ सिंह, संदीप सिंह,राजकुमार पाण्डेय, अजीत सिंह,शाश्वत पाण्डेय,रविप्रकाश पाण्डेय, उदयभान सिंह, जीतबहादुर राव, अनुराग, राघवेन्द्र राव, शशिभूषण राय, कैलाश सिंह, मोहित कुमार, चंद्रावती देवी, रीता देवी, लक्ष्मी देवी, रिंकी देवी, सपना देवी आदि उपस्थित रहे।
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