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वैज्ञानिक थे भारत के ऋषि-महर्षि : प्राचार्य
Sun, 17 Dec 2023 01:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 17 Dec 2023 01:11 AM IST
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पडरौना। भारतीय ज्ञान परंपरा अत्यंत गौरवशाली है। भारत के ऋषि-महर्षि वैज्ञानिक थे। उन्होंने जीवन के प्रत्येक पहलू जैसे- नैतिक, भौतिक, आध्यात्मिक, चारित्रिक, व्यावसायिक आदि का गहन अध्ययन कर सुस्थिर समाज का निर्माण किया था।
ये बातें प्राचार्य प्रोफेसर ममता मणि त्रिपाठी ने कहीं। वे शनिवार को उदित नारायण पीजी कॉलेज के संवाद भवन में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान की तरफ से आयोजित भारतीय ज्ञान परंपरा : सुस्थिर जीवन शैली विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहीं थीं। उन्हाेंने कहा कि आज का समाज पाश्चात्य सभ्यता के मोह में फंसकर अपनी गौरवशाली परंपरा और उत्कृष्ट ज्ञान भंडार से दूर होता जा रहा है। हमें अपनी गौरवशाली परंपरा को समझने की जरूरत है। लोगों को प्राचीन परंपरा के अनुरूप जीवन को स्वस्थ और सुस्थिर बनाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
श्रीलाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृति विश्वविद्यालय नई दिल्ली के प्रोफेसर रमेश प्रसाद पाठक ने कहा कि वर्तमान पाठ्यक्रमों से विभिन्न क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स तैयार हो रहे हैं। उनमें मानव निर्माण की शिक्षा का नितांत अभाव है। भारतीय ज्ञान और संस्कृति पर आधारित ज्ञान विद्यार्थियों तक पहुंचानी होगी, ताकि भारतीय लोगों को स्वस्थ, संतुलित और सुस्थिर जीवन प्रदान मिल सके। संगोष्ठी को प्रोफेसर बृजेश कुमार पांडेय, डॉ. चंद्रप्रकाश सिंह आदि ने संबोधित किया। संगोष्ठी का संचालन डॉ. विजेंद्र सिंह ने किया। इस दौरान डॉ. नरेंद्र तिपाठी, समशेर मल्ल, डॉ. संजय सिंह, आशुतोश सिंह, डॉ. हरिओम मिश्र आदि मौजूद रहे।
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ये बातें प्राचार्य प्रोफेसर ममता मणि त्रिपाठी ने कहीं। वे शनिवार को उदित नारायण पीजी कॉलेज के संवाद भवन में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान की तरफ से आयोजित भारतीय ज्ञान परंपरा : सुस्थिर जीवन शैली विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहीं थीं। उन्हाेंने कहा कि आज का समाज पाश्चात्य सभ्यता के मोह में फंसकर अपनी गौरवशाली परंपरा और उत्कृष्ट ज्ञान भंडार से दूर होता जा रहा है। हमें अपनी गौरवशाली परंपरा को समझने की जरूरत है। लोगों को प्राचीन परंपरा के अनुरूप जीवन को स्वस्थ और सुस्थिर बनाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
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श्रीलाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृति विश्वविद्यालय नई दिल्ली के प्रोफेसर रमेश प्रसाद पाठक ने कहा कि वर्तमान पाठ्यक्रमों से विभिन्न क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स तैयार हो रहे हैं। उनमें मानव निर्माण की शिक्षा का नितांत अभाव है। भारतीय ज्ञान और संस्कृति पर आधारित ज्ञान विद्यार्थियों तक पहुंचानी होगी, ताकि भारतीय लोगों को स्वस्थ, संतुलित और सुस्थिर जीवन प्रदान मिल सके। संगोष्ठी को प्रोफेसर बृजेश कुमार पांडेय, डॉ. चंद्रप्रकाश सिंह आदि ने संबोधित किया। संगोष्ठी का संचालन डॉ. विजेंद्र सिंह ने किया। इस दौरान डॉ. नरेंद्र तिपाठी, समशेर मल्ल, डॉ. संजय सिंह, आशुतोश सिंह, डॉ. हरिओम मिश्र आदि मौजूद रहे।
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