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बालू का संकट होगा दूर, तीन घाटों का हुआ पट्टा

Fri, 22 Dec 2017 12:15 AM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
कुश्ाीनगर (ब्यूरो) Updated Fri, 22 Dec 2017 12:15 AM IST
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sand crises will be far away, the three leased strap
बालू खनन। - फोटो : कुश्‍ाीनगर ब्यूरो
पडरौना।  पिछले तीन वर्षों से जनपद में बंद पड़े निर्माण कार्य जल्द ही शुरू हो जाने की उम्मीद है, क्योंकि बड़ी गंडक पर तीन बालू घाटों का पट्टा हो चुका है तथा वहां खनन शुरू कराने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसी नदी पर दो अन्य बालू घाटों का भी टेंडर होने जा रहा है। खनन विभाग का कहना है कि एक पखवारे के अंदर बड़ी गंडक में बालू खनन शुरू हो जाएगा। उसके बाद सरकारी और घरेलू उपयोग के लिए बालू की कोई किल्लत नहीं रहेगी। 
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कुुशीनगर जिले की सीमा से होकर बड़ी गंडक (नारायणी नदी), छोटी गंडक और बांसी नदी होकर गुजरती हैं, जिनमें बालू खनन के लिए पट्टा होता रहा है। इधर, पिछले तीन वर्षों से किसी न किसी कारण से इन नदियों में बालू खनन के लिए पट्टा की प्रक्रिया ज्यों ही शुरू होती थी तो शासन या हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लग जाती थी। कुशीनगर जिले की सीमा में इन नदियों के बालू घाटों का पट्टा न होने की वजह से बिहार या अन्य जनपदों का बालू यहां लाकर बेचा जाता है या फिर अवैध खनन होता है। 
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बाद में बालू तस्कर सक्रिय हो गए, जो रात के अंधेरे में बालू खनन कराने से लेकर अवैध तरीके से बालू की ढुलाई और भंडारण करते हैं। नतीजा यह है कि बालू की कीमत चार से पांच गुना अधिक बढ़ गई है। निजी घर बनवाने से लेकर सरकारी योजनाओं के तहत आवास, सड़क, आंगनबाड़ी केंद्र, शौचालय, आरसीसी सड़क निर्माण आदि पूरी तरह बंद हो गया है।
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अब बालू का यह संकट जल्द दूर होने की पूरी उम्मीद है। जल्दी ही पांच बालू घाट बड़ी गंडक नदी पर तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में शुरू होने वाले हैं। खनन विभाग की मानी जाए तो बिरवट कोन्हवलिया के निकट बड़ी गंडक पर दस-दस एकड़ के दो तथा सवा तीन एकड़ के एक बालू घाट का 12 दिसंबर को पट्टा हो गया है। यहां खनन कराने के लिए संबंधित ठेकेदारों को लखनऊ से पर्यावरण सुरक्षा प्रमाण पत्र के तहत माइनिंग प्लान लाना है, जिसे वे जिला विशेषज्ञ प्राधिकरण निर्धारण कमेटी को सौंपेंगे, जिस पर अध्यक्ष डीएम व अन्य सदस्यों की स्वीकृति मिलने के बाद बालू खनन की मंजूरी दे दी जाएगी।
इसके अलावा बड़ी गंडक पर तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के ही जवहीं दयाल में दस एकड़ और चैनपट्टी में ढाई एकड़ के बालू घाटों के लिए 27 से 30 दिसंबर तक टेंडर पड़ना है। इनके पट्टा की प्रक्रिया पूरी होते ही यहां भी बालू खनन प्रारंभ हो जाएगा।

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पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल के बालू घाटों के लिए जिले स्तर से ही एनओसी दे दी जाती है, जबकि उससे अधिक क्षेत्रफल होने पर लखनऊ से एनओसी लानी पड़ती है। पंद्रह दिनों के भीतर तीन बालू घाटों से खनन शुरू हो जाएगा। दो और बालू घाटों का टेंडर भी इसी बीच होना है। उसके बाद जिले से बालू संकट खत्म हो जाएगा तथा सरकारी एवं निजी क्षेत्र के निर्माण कार्यों में भी तेजी आ जाएगी। क्योंकि तीन वर्षों से जिले के सभी बालूघाट बंद थे। इन बालू घाटों का सर्वे राजस्व टीम के साथ मौके पर जाकर खुद की गई है। बालू की गुणवत्ता अच्छी है।
सौरभ गुप्त,
जिला खनन अधिकारी।
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