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केवल खास अवसरों पर ही याद आते हैं महापुरूष

Sun, 11 Mar 2018 12:13 AM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
कुश्ाीनगर (ब्यूरो) Updated Sun, 11 Mar 2018 12:13 AM IST
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Remember only on special occasions, Legends
रानी लक्ष्मी बाइ् - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
पडरौना। आजादी की लड़ाई के सर्वाधिक चर्चित अध्याय में से एक गांधीजी की चंपारण यात्रा पडरौना के रास्ते गुजरी थी। शहर के कठकुइयां मोड़ पर पार्क में उनकी आदमकद प्रतिमा भी स्थापित है। लेकिन खास अवसरों पर ही उनकी इस प्रतिमा की चमक दिखती है। गांधी जी के ठीक सामने डॉक्टर अंबेडकर की वह प्रतिमा है जिसका लोकार्पण मुख्यमंत्री रहते मायावती ने किया था। परंतु वे भी खास अवसरों पर ही साफ-सुथरे दिखते हैं। यही हालात अन्य महापुरूषों की प्रतिमाओं का भी है। 
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शहर के प्रमुख चौराहों पर लगी महापुरूषों की प्रतिमाएं उपेक्षा और असुरक्षा की शिकार हैं। त्रिपुरा में लेनिन की प्रतिमा तोड़ने व पश्चिम बंगाल में डॉक्टर श्याम प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने के बाद देश भर में महापुरूषों की प्रतिमाओं को लेकर बहस छिड़ी है। सभी राजनैतिक दल एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। लेकिन धरातल पर महापुरूषों की प्रतिमाओं की उपेक्षा व असुरक्षा की स्थिति चिंताजनक है। पडरौना शहर के कठकुइयां मोड़ पर गांधीजी की आदमकद प्रतिमा लगी है। कई लाख रुपये खर्च कर वहां पार्क भी बनाया गया। परंतु प्रतिमा के सामने अब ठेला-खोमचा वालों का कब्जा है। नियमित सफाई का भी कोई इंतजाम नहीं है। यहीं सड़क के दूसरे तरफ डॉक्टर अंबेडकर की भी आदमकद प्रतिमा स्थापित है। इस प्रतिमा का लोकार्पण मुख्यमंत्री रहते मायावती ने किया था। बगल में ही पार्क भी है। परंतु प्रतिमा की सफाई केवल खास अवसरों पर ही होती है। प्रतिमा पर हर वक्त धूल नजर आता है। सबसे खराब स्थिति तो तिलक चौक पर लगी बाल गंगाधर तिलक की प्रतिमा की है। अति व्यस्त चौराहे पर लगी छोटी सी प्रतिमा के आगे ही रिक्शा, साइकिल व अन्य वाहन खड़ा किए जाते हैं। इसके अलावा वहां के फल विक्रेता ठेला भी लगाते हैं। ठेले पर सामान रखने की जगह नहीं बचती तो तिलक की प्रतिमा के चबूतरे का उपयोग भी फल रखने के लिए कर लिया जाता है। 
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बावली चौराहे से महज 50 मीटर की दूरी पर हाइवे के किनारे रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा एक वर्ष से लावारिश हालत में पड़ी है। जमीन पर रखी प्रतिमा की सफाई तो दू, यहां रखने की वजह बताने वाला भी कोई नहीं है। आते-जाते लोग सड़क के किनारे खड़ी इस प्रतिमा को देखते हुए निकल जाते हैं। किसी राजनैतिक दल या सामाजिक संगठन की श्रद्घा इस प्रतिमा को देखकर जागृत नहीं हो रही है। 
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शहर के प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता व चिकित्सक अरुण गौतम कहते हैं कि चौराहों पर लगी महापुरूषों की प्रतिमाओं से किसी का भावात्मक लगाव नहीं रहा। इनका उपयोग केवल राजनैतिक व व्यक्तिगत स्वार्थवश हो रहा है। इसीलिए इसकी सफाई या सुरक्षा को लेकर किसी को चिंता नहीं है। यूएनपीजी कालेज के प्राचार्य व राजनीति शास्त्र के प्रवक्ता डॉक्टर अयोध्या नाथ त्रिपाठी का कहना है कि आने वाली पीढ़ियों को अच्छा संदेश मिले इसके लिए महापुरूषों की प्रतिमाएं स्थापित होती हैं। परंतु हालात को देखते हुए अब इनकी स्थापना, सुरक्षा एवं सफाई के लिए भी कानून बनना चाहिए। 


एसपी यमुना प्रसाद का कहना है कि शासन के निर्देश तथा देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही घटनाओं को ध्यान में रखते हुए जिले भर में स्थापित महापुरूषों की प्रतिमाओं की सुरक्षा के लिए संबंधित क्षेत्र के थानेदारों को जिम्मेदारी दी गई है। पुलिस इनकी निगरानी कर रही है। 


पडरौना नगर पालिका के चेयरमैन विनय जायसवाल का कहना है कि महापुरूषों की प्रतिमा को साफ रखना हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। नगर क्षेत्र में स्थापित प्रतिमाओं की नियमित सफाई के लिए नगर पालिका की तरफ से व्यवस्था बनाई जाएगी। 
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