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Kushinagar News: यक्ष एप को नजरअंदाज करना पड़ा महंगा, एसपी ने आठ थानाध्यक्षों का रोका वेतन

Fri, 07 Aug 2026 02:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Fri, 07 Aug 2026 02:24 AM IST
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Prevent line losses, boost revenue collection: SE
कुशीनगर। जीरो टॉलरेंस की नीति से हटकर काम करने वाले पुलिसकर्मियों की खैर नहीं है। अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए बने यक्ष एप पर बीट सिपाहियों की रिपोर्टिंग नहीं होने से नाराज एसपी ने आठ थानाध्यक्षों का एक दिन का वेतन काटने का आदेश जारी किए हैं। निर्देश के बावजूद यक्ष एप पर बीट रिपोर्टिंग नहीं की जा रही है। सबसे खराब प्रदर्शन रविंद्र नगर धूस थानाध्यक्ष का है। एप पर इनकी बीट रिपोर्टिंग शून्य है। बीट सिपाही के रिपोर्ट भरने के बाद दरोगा, थानाध्यक्ष और सीओ ऑनलाइन रिपोर्ट लगाएंगे।
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अपराध की दुनिया पर नकेल कसने के लिए पुलिस अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है। यक्ष नामक एक नया एआई-आधारित एप्लीकेशन लांच किया गया है, जो देश के किसी भी कोने से अपराधियों को ढूंढ़ निकालने में सक्षम है। एक फरवरी से इस प्रणाली के लिए जिले में पुलिस कर्मियों ने डेटा डिजिटाइजेशन का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। यक्ष एप की सबसे बड़ी खासियत इसकी एआई आधारित पहचान प्रणाली है। इसमें उन्नत फेशियल एवं वॉयस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
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यदि कोई अपराधी हुलिया बदलकर या फर्जी नाम से रह रहा है, तो पुलिस उसकी फोटो लेकर एप के जरिये उसका पूरा काला चिट्ठा तुरंत खोल सकती है। एसपी के निर्देश के बावजूद तय लक्ष्य के हिसाब से यक्ष एपएप पर बीट रिपोर्टिंग नहीं की जा रही है। इसमें लापरवाही बरतने पर एसपी ने पडरौना कोतवाल ओमप्रकाश तिवारी, रविंद्र नगर धूस थानाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह, कुबेरस्थान थानाध्यक्ष हर्षवर्धन सिंह, कसया थानाध्यक्ष इत्यानंद पांडेय, अहिरौली बाजार थानाध्यक्ष विनय कुमार मिश्र, हनुमानगंज थानाध्यक्ष दिग्विजय नारायण राय, तमकुहीराज थानाध्यक्ष गिरिजेश उपाध्याय, चौराखास थानाध्यक्ष दिनेश कुमार का एक दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया है। कार्यप्रणाली में सुधार नहीं होने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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-यक्ष एपएप पर बीट सिपाहियों को कार्रवाई की रिपोर्टिंग करनी है। इससे अपराध और अपराधियों पर रोकथाम के अलावा पारदर्शिता बनी रहती है। इसके लिए सभी थानाध्यक्ष को निर्देश दिया गया है। बावजूद लापरवाही बरती जा रही है। आठ थानाध्यक्षों का एक दिन का वेतन काटा गया है और चेतावनी दी गई है। -केशव कुमार,एसपी कुशीनगर
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बीट पुलिसिंग होगी और भी स्मार्ट
-पुलिसकर्मियों को कागजी रजिस्टर लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी। बीट सिपाही सीधे अपराधी के घर जाकर यक्ष एप पर उसका भौतिक सत्यापन करेंगे। सिपाही की ओर से अपडेट की गई जानकारी सीधे वरिष्ठ अधिकारियों के स्मार्ट डैशबोर्ड पर रिफ्लेक्ट होगी, जिससे निगरानी की प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हो जाएगी। इसके लिए पुलिस अधीक्षक से लेकर बीट सिपाही तक की आईडी बनाई गई हैं।
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जियो टैगिंग का काम शुरू
पुलिस ने इस एप पर काम शुरू कर दिया है। पहली जिम्मेदारी बीट सिपाहियों की है। बीट सिपाहियों ने गली-मोहल्लों को जियो टैग करना शुरू कर दिया है। गली-मोहल्लों के बाद अपराधियों के घरों की टैगिंग की जाएगी। इधर, थाना प्रभारियों के स्तर से यक्ष एप पर सभी अपराधियों का डाटा फीड किया जा रहा है। फोटो आदि जुटाए जा रहे हैं।

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एप्लीकेशन के पांच मॉड्यूल
-यक्ष एप्लीकेशन पांच मॉड्यूल के साथ लांच हुआ है। इसमें अपराधी प्रोफाइलिंग मॉड्यूल, फिंगरप्रिंट और बायोमीट्रिक एकीकरण, रीयल-टाइम डेटा एक्सेस (ऑन फील्ड वाहनों के पंजीकरण, पुराने वारंट, गुमशुदा व्यक्ति की जानकारी), हॉट स्पॉट मैपिंग और एनालिटिक्स व इंटर-एजेंसी डेटा शेयरिंग (विभिन्न राज्यों व एजेंसियों से डेटा साझा)
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यक्ष एप की मुख्य विशेषताएं और कार्यप्रणाली
-अपराधी की पूरी कुंडली: एक क्लिक पर राज्य के सभी हिस्ट्रीशीटरों और सक्रिय अपराधियों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड मिल जाता है।
-जियो-टैगिंग और सत्यापन : बीट सिपाही मोहल्ले में जाकर अपराधियों के घरों की जियो-टैगिंग करते हैं और एप पर फोटो व सत्यापन रिपोर्ट अपलोड करते हैं।
-एआई तकनीक : इसमें फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानना), वॉयस सर्च और क्राइमजीपीटी जैसे आधुनिक फीचर्स हैं।
-रियल-टाइम अलर्ट: यदि कोई अपराधी अपना निवास स्थान बदलता है या नया अपराध करता है, तो नए क्षेत्र के बीट कर्मी को स्वतः अलर्ट मिल जाता है।
-जवाबदेही तय करना: बीट के अपराधी की जिम्मेदारी बीट सिपाही के नाम के सिद्धांत पर हर स्तर के अधिकारी डैशबोर्ड से निगरानी रखते हैं।
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