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बारिश से आलू की बुआई में एक सप्ताह की देरी
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ाजकीय आलू प्रक्षेत्र (बरवां फार्म) में बारिश से आलू बीजोत्पादन के लिए खेत तैयार करने में आ रही मुश?
- फोटो : KUSHINAGAR
बारिश से आलू की बुआई में एक सप्ताह की देरी
- 10 हेक्टेयर में 10 लाख रुपये खर्च कर होगी आलू की खेती
- दो हजार क्विंटल आलू उत्पादन का लक्ष्य
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। बेमौसम बारिश के चलते बरवा फार्म स्थित राजकीय आलू प्रक्षेत्र में आलू की बुआई एक सप्ताह की देरी से होगी। इसका असर आलू के बीजोत्पादन पर भी पड़ेगा। इसको लेकर फार्म के कर्मचारी चिंतित हैं। हालांकि आलू की बुआई के लिए तैयारी जोरशोर से चल रही थी।
सोमवार और मंगलवार को हुई बारिश से बरवाफार्म में तैयार किए जा रहे खेतों में पानी भर गया। इसके कारण आलू बुआई पूर्व निधारित समय से नहीं हो सकेगी। फार्म में हर साल वृहद स्तर पर आलू के बीज का उत्पादन किया जाता रहा है। इस बार रबी सीजन 2022-23 में दस हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू बीजोत्पादन के लिए खेती करने का लक्ष्य निर्धारित है।
इसमें 400 क्विंटल कुफरी सिंदूरी व कुफरी ख्याति का आलू का बीज लगेगा। इसे राजकीय शीतगृह अलीगंज (लखनऊ) से मंगाया जा रहा है। बुवाई 20 अक्तूबर से होनी तय थी, लेकिन बीते एक सप्ताह से रुक-रुक कर हो रही बारिश से फार्म के खेतों में पानी भर गया है।
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इसकी वजह से बुवाई के लिए जुताई समेत अन्य कृषि कार्य बाधित हैं। फार्म कर्मियों के मुताबिक बारिश से अब बुवाई इस महीने के अंतिम सप्ताह में ही शुरू होने संभावना जताई जा रही है। इसमें करीब 10 लाख रुपये खर्च होगा।
कुफरी सिंदूरी व कुफरी प्रजाति के आलू की होगी बुुआई
कुफरी सिंदूरी व कुफरी प्रजाति की आलू बीज की बुआई होगी। इस प्रजाति के आलू में सड़न बहुत कम होती है। तीन से चार माह तक सामान्य वातावरण में भी सुरक्षित रखा जा सकता है। इस प्रजाति के लिए पूर्वांचल की जलवायु उपयुक्त मानी जाती है। 110 से 130 दिन में फसल तैयार हो जाती है। इसकी उत्पान क्षमता 210 से 230 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
10 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कुफरी सिंदुरी और कुफरी ख्याति प्रजाति के आलू की खेती की जाएगी। बीजोत्पादन के लिए बीज राजकीय शीतगृह अलीगंज लखनऊ से 400 क्विंटल बीज आवंटित हो चुका है। बारिश से बुवाई की तैयारी का काम प्रभावित हो रहा है। बुवाई से लेकर उत्पादन तक लगभग 10 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस खर्च में बीज की कीमत नहीं शामिल होगी। उत्पादन का लक्ष्य दो हजार क्विंटल रखा गया है।
- अजीत प्रताप सिंह, उद्यान निरीक्षक
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- 10 हेक्टेयर में 10 लाख रुपये खर्च कर होगी आलू की खेती
- दो हजार क्विंटल आलू उत्पादन का लक्ष्य
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। बेमौसम बारिश के चलते बरवा फार्म स्थित राजकीय आलू प्रक्षेत्र में आलू की बुआई एक सप्ताह की देरी से होगी। इसका असर आलू के बीजोत्पादन पर भी पड़ेगा। इसको लेकर फार्म के कर्मचारी चिंतित हैं। हालांकि आलू की बुआई के लिए तैयारी जोरशोर से चल रही थी।
सोमवार और मंगलवार को हुई बारिश से बरवाफार्म में तैयार किए जा रहे खेतों में पानी भर गया। इसके कारण आलू बुआई पूर्व निधारित समय से नहीं हो सकेगी। फार्म में हर साल वृहद स्तर पर आलू के बीज का उत्पादन किया जाता रहा है। इस बार रबी सीजन 2022-23 में दस हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू बीजोत्पादन के लिए खेती करने का लक्ष्य निर्धारित है।
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इसमें 400 क्विंटल कुफरी सिंदूरी व कुफरी ख्याति का आलू का बीज लगेगा। इसे राजकीय शीतगृह अलीगंज (लखनऊ) से मंगाया जा रहा है। बुवाई 20 अक्तूबर से होनी तय थी, लेकिन बीते एक सप्ताह से रुक-रुक कर हो रही बारिश से फार्म के खेतों में पानी भर गया है।
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इसकी वजह से बुवाई के लिए जुताई समेत अन्य कृषि कार्य बाधित हैं। फार्म कर्मियों के मुताबिक बारिश से अब बुवाई इस महीने के अंतिम सप्ताह में ही शुरू होने संभावना जताई जा रही है। इसमें करीब 10 लाख रुपये खर्च होगा।
कुफरी सिंदूरी व कुफरी प्रजाति के आलू की होगी बुुआई
कुफरी सिंदूरी व कुफरी प्रजाति की आलू बीज की बुआई होगी। इस प्रजाति के आलू में सड़न बहुत कम होती है। तीन से चार माह तक सामान्य वातावरण में भी सुरक्षित रखा जा सकता है। इस प्रजाति के लिए पूर्वांचल की जलवायु उपयुक्त मानी जाती है। 110 से 130 दिन में फसल तैयार हो जाती है। इसकी उत्पान क्षमता 210 से 230 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
10 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कुफरी सिंदुरी और कुफरी ख्याति प्रजाति के आलू की खेती की जाएगी। बीजोत्पादन के लिए बीज राजकीय शीतगृह अलीगंज लखनऊ से 400 क्विंटल बीज आवंटित हो चुका है। बारिश से बुवाई की तैयारी का काम प्रभावित हो रहा है। बुवाई से लेकर उत्पादन तक लगभग 10 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस खर्च में बीज की कीमत नहीं शामिल होगी। उत्पादन का लक्ष्य दो हजार क्विंटल रखा गया है।
- अजीत प्रताप सिंह, उद्यान निरीक्षक