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Kushinagar News: नई और पुरानी बिल्डिंग के बीच भटक रहे मरीज व तीमारदार
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मेडिकल कॉलेज में दवा वितरण काउंटर पर लगी महिला मरीजों की भीड़।संवाद
पडरौना। मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने आने वाले मरीजों व तीमारदारों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ओपीडी में हर दिन 1500-1800 मरीज पहुंच रहे हैं। मरीजों को न तो समय पर इलाज मिल पा रहा है और न ही पूरी दवाएं। पुरानी और नई बिल्डिंग के बीच भटकने, हर जगह काउंटर पर लंबी लाइनें और बाहर से दवा-जांच कराने की मजबूरी ने मरीजों का बुरा हाल कर रखा है। मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद हकीकत अब भी जिला अस्पताल से इतर नहीं है।
मेडिकल कॉलेज परिसर में कदम रखते ही अव्यवस्थाएं देखने को मिल रही हैं। सोमवार सुबह आठ बजे से ही पर्चा काउंटर से लेकर डॉक्टरों के कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लग गईं थीं। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर मरीज व तीमारदार नई और पुरानी बिल्डिंग के बीच दौड़-भाग करते दिखे। पर्चा नई बिल्डिंग में बनता है, तो वहीं डॉक्टर ओपीडी में मरीजों को देख ले रहे हैं लेकिन जांच और दवाइयों के लिए फिर पुरानी बिल्डिंग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ऐसे में धूप और गर्मी में गंभीर रूप से बीमार मरीजों और बुजुर्गों की परेशानी बढ़ गई है।
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काउंटर से आधी दवाएं और बाहर से जांच
अस्पताल के दवा वितरण काउंटर पर सिर्फ कुछ ही दवाएं उपलब्ध हैं। डाॅक्टरों की तरफ से लिखी जा रही मुख्य दवाएं अस्पताल के स्टोर से मरीजों को नहीं मिल रही हैं। उन्हें काउंटर पर तैनात स्वास्थ्य कर्मी मरीजों को बाहर से दवाएं लेने के लिए भेज रहे हैं। यही हाल जांच व्यवस्था का है। घंटों इंतजार के बाद किसी तरह एक्स-रे व पैथोलॉजी जांच हो भी गई तो रिपोर्ट के लिए दूसरे दिन बुलाया जा रहा है। लोगों को मजबूरी में बाहर से जांच करानी पड़ रही है।
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अव्यवस्था पर बोले मरीज व तीमारदार
डॉक्टर ने चार दवाइयां लिखी थीं, लेकिन काउंटर पर सिर्फ दो दवाएं ही मिलीं। बाकी दो दवाएं बाहर से लेने के लिए कहा गया है। सरकारी अस्पताल में इसलिए आई थीं, ताकि कम खर्च में बेहतर उपचार हो जाएगा, लेकिन यहां भी स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बाहर का ही सहारा है। - राजकुमारी, बिहार
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कान में दिक्कत है। डॉक्टर ने पर्ची पर चार दवाएं लिखी थींं। काउंटर पर सिर्फ दो ही मिलीं। वहां तैनात स्वास्थ्य कर्मचारी ने बाकी दो दवाएं बाहर से लेने की सलाह दी है। प्रशासन को अंदर ही दवाएं उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि मरीजों को राहत मिल सके। -सत्तन गुप्ता, पगरा पड़री
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पांच वर्षीय बेटे के इलाज के लिए सुबह 11 बजे से लाइन में लगकर पर्चा बनवाया। डॉक्टर ने सीबीसी जांच लिख दी। पुरानी बिल्डिंग पहुंचा। पंजीकरण के बाद खून का सैंपल दे दिया। रिपोर्ट के लिए अगले दिन बुलाया गया है। इससे खर्च व समय दोनों की बर्बादी हो रही है।- चंद्रभान, पकड़ी (तीमारदार)
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भाभी का इलाज कराने के लिए सुबह 10 बजे पहुंच गया था। काउंटर पर एक घंटे तक कतार में इंतजार किया। उसके बाद पर्चा बना। वहां से ओपीडी में पहुंचा तो वहां मरीजों की भीड़ जुटी रही। डाॅक्टर ने ईसीजी जांच कराने की सलाह दी है। - धर्मेंद्र, फुलवापट्टी (तीमारदार)
कोट:-
-उपलब्ध संसाधनों में मरीजों के बेहतर इलाज का प्रयास किया जा रहा है। सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है ताकि जांच और इलाज में कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। डाॅक्टर को बाहर से दवा लिखने से मना किया गया है। अधिकतर जांच मेडिकल कॉलेज के अंदर हो रही हैं। भीड़ के चलते थोड़ी परेशानी जरूर हो रही है। डाॅक्टरों को बाहर से जांच के लिए दबाव बनाने या प्रेरित करने से मना किया गया है। शिकायत मिलने पर संबंधित डाॅक्टर को चेतावनी दी जाती है। जरूरत पड़ने पर नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण लिया जाता है। - डॉ. केपी गोड़, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज कुशीनगर
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मेडिकल कॉलेज परिसर में कदम रखते ही अव्यवस्थाएं देखने को मिल रही हैं। सोमवार सुबह आठ बजे से ही पर्चा काउंटर से लेकर डॉक्टरों के कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लग गईं थीं। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर मरीज व तीमारदार नई और पुरानी बिल्डिंग के बीच दौड़-भाग करते दिखे। पर्चा नई बिल्डिंग में बनता है, तो वहीं डॉक्टर ओपीडी में मरीजों को देख ले रहे हैं लेकिन जांच और दवाइयों के लिए फिर पुरानी बिल्डिंग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ऐसे में धूप और गर्मी में गंभीर रूप से बीमार मरीजों और बुजुर्गों की परेशानी बढ़ गई है।
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काउंटर से आधी दवाएं और बाहर से जांच
अस्पताल के दवा वितरण काउंटर पर सिर्फ कुछ ही दवाएं उपलब्ध हैं। डाॅक्टरों की तरफ से लिखी जा रही मुख्य दवाएं अस्पताल के स्टोर से मरीजों को नहीं मिल रही हैं। उन्हें काउंटर पर तैनात स्वास्थ्य कर्मी मरीजों को बाहर से दवाएं लेने के लिए भेज रहे हैं। यही हाल जांच व्यवस्था का है। घंटों इंतजार के बाद किसी तरह एक्स-रे व पैथोलॉजी जांच हो भी गई तो रिपोर्ट के लिए दूसरे दिन बुलाया जा रहा है। लोगों को मजबूरी में बाहर से जांच करानी पड़ रही है।
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अव्यवस्था पर बोले मरीज व तीमारदार
डॉक्टर ने चार दवाइयां लिखी थीं, लेकिन काउंटर पर सिर्फ दो दवाएं ही मिलीं। बाकी दो दवाएं बाहर से लेने के लिए कहा गया है। सरकारी अस्पताल में इसलिए आई थीं, ताकि कम खर्च में बेहतर उपचार हो जाएगा, लेकिन यहां भी स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बाहर का ही सहारा है। - राजकुमारी, बिहार
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कान में दिक्कत है। डॉक्टर ने पर्ची पर चार दवाएं लिखी थींं। काउंटर पर सिर्फ दो ही मिलीं। वहां तैनात स्वास्थ्य कर्मचारी ने बाकी दो दवाएं बाहर से लेने की सलाह दी है। प्रशासन को अंदर ही दवाएं उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि मरीजों को राहत मिल सके। -सत्तन गुप्ता, पगरा पड़री
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पांच वर्षीय बेटे के इलाज के लिए सुबह 11 बजे से लाइन में लगकर पर्चा बनवाया। डॉक्टर ने सीबीसी जांच लिख दी। पुरानी बिल्डिंग पहुंचा। पंजीकरण के बाद खून का सैंपल दे दिया। रिपोर्ट के लिए अगले दिन बुलाया गया है। इससे खर्च व समय दोनों की बर्बादी हो रही है।- चंद्रभान, पकड़ी (तीमारदार)
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भाभी का इलाज कराने के लिए सुबह 10 बजे पहुंच गया था। काउंटर पर एक घंटे तक कतार में इंतजार किया। उसके बाद पर्चा बना। वहां से ओपीडी में पहुंचा तो वहां मरीजों की भीड़ जुटी रही। डाॅक्टर ने ईसीजी जांच कराने की सलाह दी है। - धर्मेंद्र, फुलवापट्टी (तीमारदार)
कोट:-
-उपलब्ध संसाधनों में मरीजों के बेहतर इलाज का प्रयास किया जा रहा है। सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है ताकि जांच और इलाज में कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। डाॅक्टर को बाहर से दवा लिखने से मना किया गया है। अधिकतर जांच मेडिकल कॉलेज के अंदर हो रही हैं। भीड़ के चलते थोड़ी परेशानी जरूर हो रही है। डाॅक्टरों को बाहर से जांच के लिए दबाव बनाने या प्रेरित करने से मना किया गया है। शिकायत मिलने पर संबंधित डाॅक्टर को चेतावनी दी जाती है। जरूरत पड़ने पर नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण लिया जाता है। - डॉ. केपी गोड़, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज कुशीनगर