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Kushinagar News: पुलिस की घेराबंदी से बौखलाए मोरंग धंधेबाज हुए दुस्साहसी
Fri, 21 Aug 2026 02:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 21 Aug 2026 02:37 AM IST
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कुशीनगर। प्रशासनिक घेराबंदी से बौखलाए बालू और मोरंग के धंधेबाज दुस्साहसी हो गए हैं। तरयासुजान थाना क्षेत्र में मोरंग लदे ट्रक को रोकने का प्रयास कर रहे बाइक सवार बाइक सवार सिपाही पर वाहन चढ़ाकर उसे जान से मारने की कोशिश ने पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी है। इस गिरोह से जुड़े चार लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। इस वारदात ने सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय अवैध खनन और परिवहन नेटवर्क को फिर उजागर किया है।
बिहार से कुशीनगर के रास्ते यूपी में अंतरराजीय परिवहन पास (आईएसटीपी) शुल्क की चोरी कर बालू और मोरंग लदे ट्रक एंट्री कराने का खेल काफी समय से चल रहा है। धंधेबाज तरयासुजान थाना क्षेत्र के बहादुरपुर पुलिस चौकी के रास्ते जिले में एंट्री कराते हैं और पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में भेजते हैं। करोड़ों के राजस्व चोरी के भंडाफोड़ के बाद प्रशासन-पुलिस सक्रिय हुआ और बिहार को जोड़ने वाले लोकल रूटों पर पुलिस ने 24 घंटे पहरेदारी के साथ ही हाईवे से ही मोरंग लदे ट्रकों की एंट्री पर जोर देेने लगा। हाईवे से एंट्री करने वाले ट्रकों की पूरी लोकेशन बार्डर पर लगे सीसी टीवी कैमरे में कैद होने लगी।
इसके बाद धंधेबाज ट्रकों का नंबर बदलकर, नंबर प्लेट पर कपड़ा या मोबिल लगाकर ट्रकों को एंट्री कराने लगे। इससे ऑनलाइन चालान व जांच में दिक्कतें आने लगी। एसपी केशव कुमार के सख्त रुख और लगातार कार्रवाई के बाद पुलिसकर्मी भी ऐसे लोगों से दूरी बनाने लगे हैं। ढिलाई बरतने के आरोप में तरयासुजान थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर धनवीर सिंह और बहादुरपुर चौकी प्रभारी धर्मवीर सिंह लाइनहाजिर हो चुके हैं। कुछ पुलिसकर्मियों का तबादला जिले से बाहर किया गया, जबकि कई को हाईवे ड्यूटी से हटाया गया है।
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मोरंग लदे ट्रकों की एंट्री कराने वाले माफिया का सिंडिकेट वैसे तो गोपालगंज से लेकर पूर्वांचल के कई जिलों तक फैला है लेकिन केंद्र बिंदु तरयासुजान और तमकुहीराज थाना क्षेत्र के कुछ चर्चित गांव हैं। बुधवार की रात जिस ट्रक को सिपाही पर चढ़ाया गया, वह ट्रक बसडिला गांव के एक व्यक्ति का है। उस पर बिना नंबर के ओवरलोड वाहन का यूपी में एंट्री कराने का आरोप है। सिपाही पर ट्रक चढ़ाने की घटना के बाद गिरोह के गुर्गे मोबाइल बंद कर भूमिगत हो गए हैं।
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सीसीटीवी और शिफ्टवार ड्यूटी से कसा शिकंजा
अवैध कारोबार पर निगरानी के लिए सीमावर्ती इलाकों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या और सक्रियता बढ़ाई गई है। बिहार के पटना, अरवल और आरा समेत कई जिलों से बालू और मोरंग लदे ट्रक तरयासुजान, तमकुहीराज और पटहेरवा थाना क्षेत्रों के सीमावर्ती रास्तों से यूपी में प्रवेश करते हैं। बहादुरपुर, नैनुपहर और टड़वा समेत सीमा से सटे इलाकों में मोरंग और बालू लदे वाहनों की जांच के लिए शिफ्टवार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। क्रॉस चेकिंग के लिए सीओ स्तर के अधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी गई है। निगरानी की कमान एसपी केशव कुमार के हाथ में है।
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‘लाल सोना’ के कारोबार पर 24 घंटे पहरा
-सीमावर्ती इलाकों में मोरंग को ‘लाल सोना’ कहा जाता है। मोरंग लदे ट्रकों की चौबीस घंटे नाकेबंदी और जांच से कारोबारियों और कथित इंट्री गिरोह की मुश्किलें बढ़ी हैं। इस दौरान पुलिस और अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के आमने-सामने आने की घटनाएं भी हुई हैं। प्रशासनिक स्तर पर सूझबूझ से स्थितियों को संभाल लिया गया।
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लाइनर और एंट्री मैन बने ट्रांसपोर्टर
-पिछले वर्षों में कथित रूप से लाइनर और एंट्री मैन की भूमिका निभाने वाले कुछ लोग अब ट्रांसपोर्टर बन गए हैं। उनके चल-अचल संपत्ति अर्जित करने की भी चर्चाएं हैं। प्रशासनिक सख्ती के बाद अब मोरंग और बालू लदे वाहनों को आईएसटीपी और अन्य निर्धारित करों की भरपाई के बाद ही जिले की सीमा में प्रवेश की अनुमति मिल रही है। इससे अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क की आमदनी पर असर पड़ने का दावा किया जा रहा है।
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छह मई को बिहार में रुके थे करीब डेढ़ सौ वाहन
पुलिस की सख्ती का असर छह मई को भी देखने को मिला था। बहादुरपुर चौकी पर नाकेबंदी के बाद बिना कागजात के करीब डेढ़ सौ मोरंग लदे वाहन बिहार की सीमा में ही रुके रहे थे। प्रशासन का दावा है कि लगातार निगरानी और कार्रवाई से बिना राजस्व दिए जिले में प्रवेश करने वाले वाहनों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा रहा है।
केस एक
आठ मई को बालू व मोरंग कारोबार से जुड़े 13 लोगों के खिलाफ तरयासुजान थाने मेें तत्कालीन जिला खनन अधिकारी की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। गिरोह से जुड़े गुर्गे पर बिहार से आने वाले बिना कागजात के मोरंग व बालू लदे ट्रकों को बार्डर पार कराने का आरोप लगा। इसके अलावा गिरोह के गुर्गे जांच टीमों की सूचनाएं भी लीक करते थे।
केस दो
- 14 मई को सीओ तमकुहीराज जयंत कुमार के नेतृत्व में बिहार बार्डर के कोटनरहवां से जिले की सीमा में दाखिल हो रहे बिना कागजात के मोरंग लदे तीन ट्रकों को पकड़ा गया। जांच के बाद पुलिस ने तीनों ट्रक मालिकों व चालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
केस तीन
- 7 अगस्त को तरया सुजान थाना क्षेत्र के हाईवे स्थित बहादुरपुर पुलिस चौकी के समीप जांच के दौरान संदिग्ध एक मोरंग लदे ट्रेलर को पकड़ा गया। मोरंग लदे ट्रेलर के आगे और पीछे अलग-अलग नंबर प्लेट लगे मिले। पूछताछ में पता चला कि एक ही आईएसटीपी पर दो मोरंग लदे ट्रेलर बार्डर पार कराए जाते थे। पुलिस ने ट्रेलर मालिक व चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
केस चार
-19 अगस्त को तमकुहीराज थाना क्षेत्र के हाईवे स्थित मंझरिया के समीप मोरंग लदे ट्रक को ग्रामीणों ने पकड़ा। मोरंग लदे ट्रक के आगे और पीछे अलग-अलग नंबर प्लेट लगी थी। ग्रामीणों ने मोरंग लदे ट्रक को पुलिस को सुपुर्द किया।
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बिहार से कुशीनगर के रास्ते यूपी में अंतरराजीय परिवहन पास (आईएसटीपी) शुल्क की चोरी कर बालू और मोरंग लदे ट्रक एंट्री कराने का खेल काफी समय से चल रहा है। धंधेबाज तरयासुजान थाना क्षेत्र के बहादुरपुर पुलिस चौकी के रास्ते जिले में एंट्री कराते हैं और पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में भेजते हैं। करोड़ों के राजस्व चोरी के भंडाफोड़ के बाद प्रशासन-पुलिस सक्रिय हुआ और बिहार को जोड़ने वाले लोकल रूटों पर पुलिस ने 24 घंटे पहरेदारी के साथ ही हाईवे से ही मोरंग लदे ट्रकों की एंट्री पर जोर देेने लगा। हाईवे से एंट्री करने वाले ट्रकों की पूरी लोकेशन बार्डर पर लगे सीसी टीवी कैमरे में कैद होने लगी।
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इसके बाद धंधेबाज ट्रकों का नंबर बदलकर, नंबर प्लेट पर कपड़ा या मोबिल लगाकर ट्रकों को एंट्री कराने लगे। इससे ऑनलाइन चालान व जांच में दिक्कतें आने लगी। एसपी केशव कुमार के सख्त रुख और लगातार कार्रवाई के बाद पुलिसकर्मी भी ऐसे लोगों से दूरी बनाने लगे हैं। ढिलाई बरतने के आरोप में तरयासुजान थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर धनवीर सिंह और बहादुरपुर चौकी प्रभारी धर्मवीर सिंह लाइनहाजिर हो चुके हैं। कुछ पुलिसकर्मियों का तबादला जिले से बाहर किया गया, जबकि कई को हाईवे ड्यूटी से हटाया गया है।
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मोरंग लदे ट्रकों की एंट्री कराने वाले माफिया का सिंडिकेट वैसे तो गोपालगंज से लेकर पूर्वांचल के कई जिलों तक फैला है लेकिन केंद्र बिंदु तरयासुजान और तमकुहीराज थाना क्षेत्र के कुछ चर्चित गांव हैं। बुधवार की रात जिस ट्रक को सिपाही पर चढ़ाया गया, वह ट्रक बसडिला गांव के एक व्यक्ति का है। उस पर बिना नंबर के ओवरलोड वाहन का यूपी में एंट्री कराने का आरोप है। सिपाही पर ट्रक चढ़ाने की घटना के बाद गिरोह के गुर्गे मोबाइल बंद कर भूमिगत हो गए हैं।
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सीसीटीवी और शिफ्टवार ड्यूटी से कसा शिकंजा
अवैध कारोबार पर निगरानी के लिए सीमावर्ती इलाकों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या और सक्रियता बढ़ाई गई है। बिहार के पटना, अरवल और आरा समेत कई जिलों से बालू और मोरंग लदे ट्रक तरयासुजान, तमकुहीराज और पटहेरवा थाना क्षेत्रों के सीमावर्ती रास्तों से यूपी में प्रवेश करते हैं। बहादुरपुर, नैनुपहर और टड़वा समेत सीमा से सटे इलाकों में मोरंग और बालू लदे वाहनों की जांच के लिए शिफ्टवार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। क्रॉस चेकिंग के लिए सीओ स्तर के अधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी गई है। निगरानी की कमान एसपी केशव कुमार के हाथ में है।
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‘लाल सोना’ के कारोबार पर 24 घंटे पहरा
-सीमावर्ती इलाकों में मोरंग को ‘लाल सोना’ कहा जाता है। मोरंग लदे ट्रकों की चौबीस घंटे नाकेबंदी और जांच से कारोबारियों और कथित इंट्री गिरोह की मुश्किलें बढ़ी हैं। इस दौरान पुलिस और अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के आमने-सामने आने की घटनाएं भी हुई हैं। प्रशासनिक स्तर पर सूझबूझ से स्थितियों को संभाल लिया गया।
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लाइनर और एंट्री मैन बने ट्रांसपोर्टर
-पिछले वर्षों में कथित रूप से लाइनर और एंट्री मैन की भूमिका निभाने वाले कुछ लोग अब ट्रांसपोर्टर बन गए हैं। उनके चल-अचल संपत्ति अर्जित करने की भी चर्चाएं हैं। प्रशासनिक सख्ती के बाद अब मोरंग और बालू लदे वाहनों को आईएसटीपी और अन्य निर्धारित करों की भरपाई के बाद ही जिले की सीमा में प्रवेश की अनुमति मिल रही है। इससे अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क की आमदनी पर असर पड़ने का दावा किया जा रहा है।
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छह मई को बिहार में रुके थे करीब डेढ़ सौ वाहन
पुलिस की सख्ती का असर छह मई को भी देखने को मिला था। बहादुरपुर चौकी पर नाकेबंदी के बाद बिना कागजात के करीब डेढ़ सौ मोरंग लदे वाहन बिहार की सीमा में ही रुके रहे थे। प्रशासन का दावा है कि लगातार निगरानी और कार्रवाई से बिना राजस्व दिए जिले में प्रवेश करने वाले वाहनों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा रहा है।
केस एक
आठ मई को बालू व मोरंग कारोबार से जुड़े 13 लोगों के खिलाफ तरयासुजान थाने मेें तत्कालीन जिला खनन अधिकारी की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। गिरोह से जुड़े गुर्गे पर बिहार से आने वाले बिना कागजात के मोरंग व बालू लदे ट्रकों को बार्डर पार कराने का आरोप लगा। इसके अलावा गिरोह के गुर्गे जांच टीमों की सूचनाएं भी लीक करते थे।
केस दो
- 14 मई को सीओ तमकुहीराज जयंत कुमार के नेतृत्व में बिहार बार्डर के कोटनरहवां से जिले की सीमा में दाखिल हो रहे बिना कागजात के मोरंग लदे तीन ट्रकों को पकड़ा गया। जांच के बाद पुलिस ने तीनों ट्रक मालिकों व चालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
केस तीन
- 7 अगस्त को तरया सुजान थाना क्षेत्र के हाईवे स्थित बहादुरपुर पुलिस चौकी के समीप जांच के दौरान संदिग्ध एक मोरंग लदे ट्रेलर को पकड़ा गया। मोरंग लदे ट्रेलर के आगे और पीछे अलग-अलग नंबर प्लेट लगे मिले। पूछताछ में पता चला कि एक ही आईएसटीपी पर दो मोरंग लदे ट्रेलर बार्डर पार कराए जाते थे। पुलिस ने ट्रेलर मालिक व चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
केस चार
-19 अगस्त को तमकुहीराज थाना क्षेत्र के हाईवे स्थित मंझरिया के समीप मोरंग लदे ट्रक को ग्रामीणों ने पकड़ा। मोरंग लदे ट्रक के आगे और पीछे अलग-अलग नंबर प्लेट लगी थी। ग्रामीणों ने मोरंग लदे ट्रक को पुलिस को सुपुर्द किया।