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Kushinagar News: सामूहिक कथा की यादें, कहीं पार्लर और फोटोशूट का क्रेज
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करवा चौथ पर बदला वक्त के साथ पूजन और सजने-संवरने का अंदाज, लेकिन पति की लंबी उम्र की कामना आज भी वही
पहले मिट्टी के करवे, सामूहिक कथा और चूल्हे पर बनी फेनी थी खास, अब ऑनलाइन मेहंदी बुकिंग, पार्लर, फोटोशूट और उपहार का बढ़ा चलन
पडरौना। करवा चौथ मनाने के तौर-तरीके समय के साथ बदल गए हैं। पहले मिट्टी के करवे, सामूहिक कथा और घर में बनी फेनी त्योहार की पहचान थे, जबकि अब ऑनलाइन मेहंदी बुकिंग, पार्लर में सजने-संवरने और फोटोशूट का चलन बढ़ा है। हालांकि, पीढ़ियों के बीच इन बदलावों के बावजूद पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना बरकरार है।
वक्त बदला, पीढ़ियां बदलीं और करवा चौथ मनाने का अंदाज भी बदल गया है। कभी आंगन में महिलाओं का समूह जुटता था। मिट्टी के करवे सजते थे और चूल्हे पर बनी फेनी की मिठास त्योहार में घुलती थी। महिलाएं एक साथ बैठकर करवा चौथ की कथा सुनती थीं और चांद निकलने का इंतजार करती थीं। अब त्योहार की तैयारियां ऑनलाइन होने लगी हैं। मेहंदी लगाने के लिए पहले से बुकिंग हो रही है, पार्लर में सजने-संवरने की होड़ है और पति के साथ फोटोशूट से लेकर सोशल मीडिया पर रील बनाने तक का चलन बढ़ा है।
करवा चौथ का पर्व 29 अक्तूबर को मनाया जाएगा। इसे लेकर बाजारों में खरीदारी और घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार त्योहार को लेकर पुरानी और नई पीढ़ी के अनुभवों में दिलचस्प अंतर देखने को मिल रहा है। बुजुर्ग महिलाओं के लिए करवा चौथ सामूहिक परंपराओं, सादगी और पारिवारिक मेल-मिलाप का पर्व रहा है, जबकि युवा महिलाओं के लिए परंपरा के साथ आधुनिकता और सोशल मीडिया भी उत्सव का हिस्सा बन गए हैं।
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हालांकि पुरानी और नई पीढ़ी की महिलाओं के अनुभव भले ही अलग हों, लेकिन करवा चौथ के पीछे की भावना एक ही है। बुजुर्ग महिलाओं के लिए यह परंपरा और परिवार के साथ जुड़ाव का पर्व है, जबकि युवा महिलाएं इसे आधुनिक अंदाज में मनाते हुए भी इसके धार्मिक महत्व को बनाए रखना चाहती हैं। किसी के हाथ में मिट्टी का करवा है तो किसी के मोबाइल में त्योहार की रील। किसी की तैयारी घर में बनी फेनी से जुड़ी है तो कोई पार्लर की बुकिंग करा रही है। मगर चांद देखकर पति की लंबी उम्र की कामना करने की परंपरा आज भी कायम है। करवा चौथ समय के साथ तौर-तरीके बदल रहे हैं, लेकिन रिश्ते के प्रति समर्पण और सुखी दांपत्य जीवन की कामना पीढ़ियों को एक सूत्र में बांधे हुए है।
स्पीकअप
पहले करवा चौथ की तैयारियां कई दिन पहले शुरू हो जाती थीं। महिलाएं एक-दूसरे के घर जुटती थीं। पूजा के लिए मिट्टी के करवे तैयार किए जाते थे और समूह में बैठकर कथा सुनने की परंपरा निभाई जाती थी। घरों में चूल्हे पर फेनी बनाई जाती थी।
- किरन देवी।
पहले साज-सज्जा के साधन सीमित थे, लेकिन त्योहार को लेकर उत्साह और आपसी जुड़ाव खूब रहता था। चांद निकलने पर छलनी से उसे देखने और फिर पति का चेहरा देखकर व्रत खोलने की रस्म में परिवार की खुशियां समाहित होती थीं।
-सुनैना यादव।
करवा चौथ का उत्साह हर वर्ष नए रंग में नजर आता है। मेहंदी के लिए ऑनलाइन बुकिंग, पार्लर में तैयार होना, डिजाइनर कपड़े और आकर्षक आभूषण पहनने के लिए उत्साहित हूं। पति के साथ यादगार तस्वीरें खिंचवा कर सोशल मीडिया पर साझा करूंगी।
शिवानी जायसवाल।
पति की ओर से उपहार देने और सरप्राइज की परंपरा भी त्योहार को खास बना रही है। पूजा-पाठ और व्रत के साथ तस्वीरों तथा वीडियो के जरिये इन पलों को संजोने का चलन है। मैं भी करवा चौथ के दिन मिले उपहार को पति के साथ सोशल मीडिया पर साझा करूंगी।
माधुरी जायसवाल।
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पहले मिट्टी के करवे, सामूहिक कथा और चूल्हे पर बनी फेनी थी खास, अब ऑनलाइन मेहंदी बुकिंग, पार्लर, फोटोशूट और उपहार का बढ़ा चलन
पडरौना। करवा चौथ मनाने के तौर-तरीके समय के साथ बदल गए हैं। पहले मिट्टी के करवे, सामूहिक कथा और घर में बनी फेनी त्योहार की पहचान थे, जबकि अब ऑनलाइन मेहंदी बुकिंग, पार्लर में सजने-संवरने और फोटोशूट का चलन बढ़ा है। हालांकि, पीढ़ियों के बीच इन बदलावों के बावजूद पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना बरकरार है।
वक्त बदला, पीढ़ियां बदलीं और करवा चौथ मनाने का अंदाज भी बदल गया है। कभी आंगन में महिलाओं का समूह जुटता था। मिट्टी के करवे सजते थे और चूल्हे पर बनी फेनी की मिठास त्योहार में घुलती थी। महिलाएं एक साथ बैठकर करवा चौथ की कथा सुनती थीं और चांद निकलने का इंतजार करती थीं। अब त्योहार की तैयारियां ऑनलाइन होने लगी हैं। मेहंदी लगाने के लिए पहले से बुकिंग हो रही है, पार्लर में सजने-संवरने की होड़ है और पति के साथ फोटोशूट से लेकर सोशल मीडिया पर रील बनाने तक का चलन बढ़ा है।
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करवा चौथ का पर्व 29 अक्तूबर को मनाया जाएगा। इसे लेकर बाजारों में खरीदारी और घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार त्योहार को लेकर पुरानी और नई पीढ़ी के अनुभवों में दिलचस्प अंतर देखने को मिल रहा है। बुजुर्ग महिलाओं के लिए करवा चौथ सामूहिक परंपराओं, सादगी और पारिवारिक मेल-मिलाप का पर्व रहा है, जबकि युवा महिलाओं के लिए परंपरा के साथ आधुनिकता और सोशल मीडिया भी उत्सव का हिस्सा बन गए हैं।
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हालांकि पुरानी और नई पीढ़ी की महिलाओं के अनुभव भले ही अलग हों, लेकिन करवा चौथ के पीछे की भावना एक ही है। बुजुर्ग महिलाओं के लिए यह परंपरा और परिवार के साथ जुड़ाव का पर्व है, जबकि युवा महिलाएं इसे आधुनिक अंदाज में मनाते हुए भी इसके धार्मिक महत्व को बनाए रखना चाहती हैं। किसी के हाथ में मिट्टी का करवा है तो किसी के मोबाइल में त्योहार की रील। किसी की तैयारी घर में बनी फेनी से जुड़ी है तो कोई पार्लर की बुकिंग करा रही है। मगर चांद देखकर पति की लंबी उम्र की कामना करने की परंपरा आज भी कायम है। करवा चौथ समय के साथ तौर-तरीके बदल रहे हैं, लेकिन रिश्ते के प्रति समर्पण और सुखी दांपत्य जीवन की कामना पीढ़ियों को एक सूत्र में बांधे हुए है।
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पहले करवा चौथ की तैयारियां कई दिन पहले शुरू हो जाती थीं। महिलाएं एक-दूसरे के घर जुटती थीं। पूजा के लिए मिट्टी के करवे तैयार किए जाते थे और समूह में बैठकर कथा सुनने की परंपरा निभाई जाती थी। घरों में चूल्हे पर फेनी बनाई जाती थी।
- किरन देवी।
पहले साज-सज्जा के साधन सीमित थे, लेकिन त्योहार को लेकर उत्साह और आपसी जुड़ाव खूब रहता था। चांद निकलने पर छलनी से उसे देखने और फिर पति का चेहरा देखकर व्रत खोलने की रस्म में परिवार की खुशियां समाहित होती थीं।
-सुनैना यादव।
करवा चौथ का उत्साह हर वर्ष नए रंग में नजर आता है। मेहंदी के लिए ऑनलाइन बुकिंग, पार्लर में तैयार होना, डिजाइनर कपड़े और आकर्षक आभूषण पहनने के लिए उत्साहित हूं। पति के साथ यादगार तस्वीरें खिंचवा कर सोशल मीडिया पर साझा करूंगी।
शिवानी जायसवाल।
पति की ओर से उपहार देने और सरप्राइज की परंपरा भी त्योहार को खास बना रही है। पूजा-पाठ और व्रत के साथ तस्वीरों तथा वीडियो के जरिये इन पलों को संजोने का चलन है। मैं भी करवा चौथ के दिन मिले उपहार को पति के साथ सोशल मीडिया पर साझा करूंगी।
माधुरी जायसवाल।