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Kushinagar News: निजी वाहनों के लिए फिटनेस जांच की बाध्यता खत्म, व्यावसायिक वाहनों पर नियम बरकरार
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चालक को छोड़कर छह से अधिक और अधिकतम नौ सीट वाले वाहनों को मिलेगी छूट, परिवहन विभाग ने खत्म की अनिवार्यता
सात से नौ सीटर निजी वाहनों को फिटनेस जांच से मिली राहत
पडरौना। अब सात और नौ सीट वाले निजी वाहनों के आठ साल पूरे होने के बाद हर दो वर्ष में फिटनेस जांच कराने के लिए आरआई कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन के आदेश के बाद निजी वाहनों में सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस प्रमाणपत्र की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। यह व्यवस्था अब केवल कॉमर्शियल वाहनों पर लागू होगी।
नई व्यवस्था से जिले के तीन लाख से अधिक निजी वाहन फिटनेस जांच और प्रमाणपत्र की अनिवार्यता के दायरे से बाहर हो गए हैं। एआरटीओ डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता ने बताया कि पहले आठ वर्ष पूरे होने के बाद निजी वाहन की हर दो साल में संभागीय निरीक्षक (प्राविधिक) से फिटनेस जांच कराना जरूरी था। अब यह बाध्यता खत्म कर दी गई है। वाहन के 15 वर्ष पूरे होने पर पांच वर्ष के लिए दोबारा पंजीकरण कराया जा सकेगा।
इसके लिए फिटनेस संबंधी अतिरिक्त प्रक्रिया नहीं करनी होगी। हालांकि यह राहत केवल निजी वाहनों को मिली है। कॉमर्शियल सात और नौ सीटर वाहनों पर पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और केंद्रीय मोटर यान नियमावली, 1989 के तहत सुरक्षा मानकों व अन्य कानूनी प्रावधानों का पालन सभी वाहनों के लिए अनिवार्य रहेगा।
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एआरटीओ ने बताया कि अब सात और नौ सीट वाले निजी वाहनों के आठ साल पूरे होने के बाद हर दो वर्ष में फिटनेस जांच कराने के लिए आरआई कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। परिवहन आयुक्त के आदेश के बाद निजी वाहनों में सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस प्रमाणपत्र की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। यह व्यवस्था अब केवल कॉमर्शियल वाहनों पर लागू होगी।
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सात से नौ सीटर निजी वाहनों को फिटनेस जांच से मिली राहत
पडरौना। अब सात और नौ सीट वाले निजी वाहनों के आठ साल पूरे होने के बाद हर दो वर्ष में फिटनेस जांच कराने के लिए आरआई कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन के आदेश के बाद निजी वाहनों में सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस प्रमाणपत्र की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। यह व्यवस्था अब केवल कॉमर्शियल वाहनों पर लागू होगी।
नई व्यवस्था से जिले के तीन लाख से अधिक निजी वाहन फिटनेस जांच और प्रमाणपत्र की अनिवार्यता के दायरे से बाहर हो गए हैं। एआरटीओ डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता ने बताया कि पहले आठ वर्ष पूरे होने के बाद निजी वाहन की हर दो साल में संभागीय निरीक्षक (प्राविधिक) से फिटनेस जांच कराना जरूरी था। अब यह बाध्यता खत्म कर दी गई है। वाहन के 15 वर्ष पूरे होने पर पांच वर्ष के लिए दोबारा पंजीकरण कराया जा सकेगा।
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इसके लिए फिटनेस संबंधी अतिरिक्त प्रक्रिया नहीं करनी होगी। हालांकि यह राहत केवल निजी वाहनों को मिली है। कॉमर्शियल सात और नौ सीटर वाहनों पर पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और केंद्रीय मोटर यान नियमावली, 1989 के तहत सुरक्षा मानकों व अन्य कानूनी प्रावधानों का पालन सभी वाहनों के लिए अनिवार्य रहेगा।
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एआरटीओ ने बताया कि अब सात और नौ सीट वाले निजी वाहनों के आठ साल पूरे होने के बाद हर दो वर्ष में फिटनेस जांच कराने के लिए आरआई कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। परिवहन आयुक्त के आदेश के बाद निजी वाहनों में सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस प्रमाणपत्र की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। यह व्यवस्था अब केवल कॉमर्शियल वाहनों पर लागू होगी।