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Kushinagar News: चकबंदी न्यायालयों में भी जमीन का खेल, निजी लाभ पहुंचाने को सरकारी जमीन कर दी थी दूसरे के नाम
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- मंगलवार को हाटा कोतवाली में चकबंदी अधिकारी के खिलाफ दर्ज हुआ केस
- अन्य गांवों में भी इस तरह की गड़बड़ी की शुरू की गई है जांच
- चकबंदी न्यायालय में दर्ज वाद में त्रुटिपूर्ण और संदेहास्पद आदेश किया था पारित
- चकबंदी आयुक्त उत्तर प्रदेश ने डीएम को मुकदमा दर्ज कराने का दिया था निर्देश
हाटा। चकबंदी न्यायालयों में भी सरकारी जमीन निजी लाभ के लिए दूसरे के नाम करने का मामला सामने आने लगा है। ताजा मामला हाटा तहसील क्षेत्र के पड़री गांव में सामने आया है। इस गांव के एक व्यक्ति को निजी लाभ पहुंचाने के लिए तत्कालीन चकबंदी अधिकारी ने सरकारी जमीन पर उसका नाम चढ़ा दिया। यह मामला सामने आने के बाद अन्य गांवों में भी इसकी जांच शुरू कर दी गई है। जानकारों की मानें तो चकबंदी के समय की पत्रावलियों में हेरफेर कर जालसाज इस तरह का खेल करते हैं।
बताया जा रहा है कि हाटा तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा पड़री के रहने वाले एक व्यक्ति ने चकबंदी न्यायालय में दो वाद दाखिल किए थे। उसमें खलिहान, नवीन परती, तालाब के तीन गाटा नंबरों पर अपना दावा पेश किया। 15 जुलाई, 2019 को चकबंदी अधिकारी ने उस गाटा संख्या पर दर्ज ग्राम सभा की खलिहान, तालाब और नवीन परती का नाम खारिज कर पड़री गांव के निवासी धनपाल का नाम दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया था। उस आदेश के अनुपालन में खतौनी में धनपाल का नाम भी दर्ज हो गया है। यह मामला प्रकाश में आने के बाद जब पत्रावलियों की शुरुआती जांच की गई तो आदेश में त्रुटिपूर्ण और संदेहास्पद लगा।
इसके बाद चकबंदी आयुक्त उत्तर प्रदेश के आदेश पर जिला बंदोबस्त अधिकारी कुशीनगर आलोक कुमार ने मंगलवार की शाम को कसया के तत्कालीन चकबंदी अधिकारी धीरेंद्रजीत सिंह के खिलाफ केस दर्ज करा दिया है।
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बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी आलोक कुमार की तरफ से दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन चकबंदी अधिकारी धीरेेंद्रजीत सिंह ने एक व्यक्ति को निजी लाभ पहुंचाने के लिए ग्राम सभा के खाते में दर्ज खलिहान और पोखरी की जमीन को गलत ढंग से आदेश पारित कर ग्राम सभा के खाते से खारिज कर दिया। उसे धनपाल नाम के एक व्यक्ति के नाम दर्ज कर दिया है।
इस संबंध में एसडीएम हीरालाल ने बताया कि पड़री ग्राम सभा का मामला है। पत्रावलियों का अवलोकन किया जा रहा है। अन्य ग्राम सभाओं की सरकारी जमीनों की जांच की जा रही है। अगर कोई अन्य मामला भी प्रकाश में आता है तो मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
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- अन्य गांवों में भी इस तरह की गड़बड़ी की शुरू की गई है जांच
- चकबंदी न्यायालय में दर्ज वाद में त्रुटिपूर्ण और संदेहास्पद आदेश किया था पारित
- चकबंदी आयुक्त उत्तर प्रदेश ने डीएम को मुकदमा दर्ज कराने का दिया था निर्देश
हाटा। चकबंदी न्यायालयों में भी सरकारी जमीन निजी लाभ के लिए दूसरे के नाम करने का मामला सामने आने लगा है। ताजा मामला हाटा तहसील क्षेत्र के पड़री गांव में सामने आया है। इस गांव के एक व्यक्ति को निजी लाभ पहुंचाने के लिए तत्कालीन चकबंदी अधिकारी ने सरकारी जमीन पर उसका नाम चढ़ा दिया। यह मामला सामने आने के बाद अन्य गांवों में भी इसकी जांच शुरू कर दी गई है। जानकारों की मानें तो चकबंदी के समय की पत्रावलियों में हेरफेर कर जालसाज इस तरह का खेल करते हैं।
बताया जा रहा है कि हाटा तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा पड़री के रहने वाले एक व्यक्ति ने चकबंदी न्यायालय में दो वाद दाखिल किए थे। उसमें खलिहान, नवीन परती, तालाब के तीन गाटा नंबरों पर अपना दावा पेश किया। 15 जुलाई, 2019 को चकबंदी अधिकारी ने उस गाटा संख्या पर दर्ज ग्राम सभा की खलिहान, तालाब और नवीन परती का नाम खारिज कर पड़री गांव के निवासी धनपाल का नाम दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया था। उस आदेश के अनुपालन में खतौनी में धनपाल का नाम भी दर्ज हो गया है। यह मामला प्रकाश में आने के बाद जब पत्रावलियों की शुरुआती जांच की गई तो आदेश में त्रुटिपूर्ण और संदेहास्पद लगा।
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इसके बाद चकबंदी आयुक्त उत्तर प्रदेश के आदेश पर जिला बंदोबस्त अधिकारी कुशीनगर आलोक कुमार ने मंगलवार की शाम को कसया के तत्कालीन चकबंदी अधिकारी धीरेंद्रजीत सिंह के खिलाफ केस दर्ज करा दिया है।
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बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी आलोक कुमार की तरफ से दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन चकबंदी अधिकारी धीरेेंद्रजीत सिंह ने एक व्यक्ति को निजी लाभ पहुंचाने के लिए ग्राम सभा के खाते में दर्ज खलिहान और पोखरी की जमीन को गलत ढंग से आदेश पारित कर ग्राम सभा के खाते से खारिज कर दिया। उसे धनपाल नाम के एक व्यक्ति के नाम दर्ज कर दिया है।
इस संबंध में एसडीएम हीरालाल ने बताया कि पड़री ग्राम सभा का मामला है। पत्रावलियों का अवलोकन किया जा रहा है। अन्य ग्राम सभाओं की सरकारी जमीनों की जांच की जा रही है। अगर कोई अन्य मामला भी प्रकाश में आता है तो मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।