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Kushinagar News: कम नामांकन पर प्रधानाध्यापकों की तय होगी जवाबदेही
Tue, 11 Aug 2026 02:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 11 Aug 2026 02:25 AM IST
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पडरौना। बेसिक शिक्षा विभाग अब उन स्कूलों के प्रधानाध्यापकों पर सख्ती करने जा रहा है जहां बच्चों का नामांकन लगातार कम हो रहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नामांकन बढ़ाना प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी है। जिन स्कूलों में लक्ष्य के सापेक्ष नामांकन 60 प्रतिशत से कम है या विद्यालय में नामांकन के सापेक्ष छात्र उपस्थिति कम है, उन प्रधानाध्यापकों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और लापरवाही पर कार्रवाई भी तय की जाएगी।
नए शैक्षिक सत्र में शत-प्रतिशत नामांकन के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने अभियान शुरू किया है। लेकिन जिले के कई प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की संख्या घटने से विभाग चिंतित है। अधिकारियों के मुताबिक अभिभावक सरकारी स्कूलों के प्रति उदासीन हैं और प्रधानाध्यापक भी नामांकन बढ़ाने के लिए गंभीर नहीं हैं। कई स्कूलों में शिक्षक डोर-टू-डोर जाकर अभिभावकों से संपर्क तक नहीं कर रहे हैं।
वहीं, परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि गांव में प्राइवेट स्कूलों का क्रेज ज्यादा है। अभिभावक मानते ही नहीं। लेकिन अब हम हर घर जाएंगे और सरकारी स्कूल की खूबियां बताएंगे। बीएसए अनिल कुमार सिंह ने बताया कि हर प्रधानाध्यापक को अपने स्कूल के एक किमी के दायरे में घर-घर जाकर सर्वे करना होगा। छह से 14 साल तक के जो भी बच्चे स्कूल से बाहर हैं, उन्हें चिन्हित कर अभिभावकों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि 31 अगस्त तक सभी स्कूलों को नामांकन का लक्ष्य पूरा करना होगा। कम नामांकन वाले स्कूलों की मासिक समीक्षा होगी। उन्होंने ने चेताया कि नामांकन न बढ़ाने वाले प्रधानाध्यापकों की वेतन रोक और प्रतिकूल प्रविष्टि जैसी कार्रवाई की जाएगी।
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नए शैक्षिक सत्र में शत-प्रतिशत नामांकन के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने अभियान शुरू किया है। लेकिन जिले के कई प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की संख्या घटने से विभाग चिंतित है। अधिकारियों के मुताबिक अभिभावक सरकारी स्कूलों के प्रति उदासीन हैं और प्रधानाध्यापक भी नामांकन बढ़ाने के लिए गंभीर नहीं हैं। कई स्कूलों में शिक्षक डोर-टू-डोर जाकर अभिभावकों से संपर्क तक नहीं कर रहे हैं।
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वहीं, परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि गांव में प्राइवेट स्कूलों का क्रेज ज्यादा है। अभिभावक मानते ही नहीं। लेकिन अब हम हर घर जाएंगे और सरकारी स्कूल की खूबियां बताएंगे। बीएसए अनिल कुमार सिंह ने बताया कि हर प्रधानाध्यापक को अपने स्कूल के एक किमी के दायरे में घर-घर जाकर सर्वे करना होगा। छह से 14 साल तक के जो भी बच्चे स्कूल से बाहर हैं, उन्हें चिन्हित कर अभिभावकों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि 31 अगस्त तक सभी स्कूलों को नामांकन का लक्ष्य पूरा करना होगा। कम नामांकन वाले स्कूलों की मासिक समीक्षा होगी। उन्होंने ने चेताया कि नामांकन न बढ़ाने वाले प्रधानाध्यापकों की वेतन रोक और प्रतिकूल प्रविष्टि जैसी कार्रवाई की जाएगी।
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