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Kushinagar News: महायज्ञ में लोक कल्याण के लिए किया हवन
Sat, 04 May 2024 02:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 04 May 2024 02:41 AM IST
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सुकरौली। कस्बे में आयोजित नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ में शुक्रवार को तीसरे दिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। इसमें विश्व कल्याण, सुख समृद्धि, शांति व भाईचारे की भावना को लेकर लोगों ने प्रार्थना की।
आचार्य दामोदर दास ने बताया कि तीसरे दिन पाठ एवं विभिन्न मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ किया जाता है। हवनकुंड में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दी जाती है। उन्होंने बताया कि जब देवताओं व राक्षसों की ओर से किए गए समुद्र मंथन के दौरान महालक्ष्मी प्रकट हुई, तब सबसे पहले उसका शतचंडी यज्ञ के साथ महर्षि पूजन किया गया। मलमास के दौरान मकर संक्रांति के मौके पर भारत खंड के स्वयंभू प्रथम मानव महर्षि मनु ने सबसे पहले महालक्ष्मी का शतचंडी यज्ञ के साथ पूजन किया। आचार्य दीपक ओझा ने बताया कि तीसरे दिन आयोजित किए गए धार्मिक कार्यक्रमों के अंतर्गत यथाक्रम मंडप पूजन, गणेश पूजन, षोडश मातृ पूजन, नवगृह पूजन, वास्तु पूजन, अग्नि पूजन, 52 भैरव व 64 योगिनी पूजन किया गया। यजमानों ने दशोविधि स्नान कर मंडप पूजन किया। शतचंडी महायज्ञ के अंतर्गत मंदिर में दो चरणों में यज्ञ का आयोजन किया गया जो देर शाम तक चलता रहा। यजमानों की ओर से पंडितों के सानिध्य में दुर्गा सप्तशती के 20 पाठ के साथ यज्ञ में आहुतियां दी गईं।
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आचार्य दामोदर दास ने बताया कि तीसरे दिन पाठ एवं विभिन्न मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ किया जाता है। हवनकुंड में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दी जाती है। उन्होंने बताया कि जब देवताओं व राक्षसों की ओर से किए गए समुद्र मंथन के दौरान महालक्ष्मी प्रकट हुई, तब सबसे पहले उसका शतचंडी यज्ञ के साथ महर्षि पूजन किया गया। मलमास के दौरान मकर संक्रांति के मौके पर भारत खंड के स्वयंभू प्रथम मानव महर्षि मनु ने सबसे पहले महालक्ष्मी का शतचंडी यज्ञ के साथ पूजन किया। आचार्य दीपक ओझा ने बताया कि तीसरे दिन आयोजित किए गए धार्मिक कार्यक्रमों के अंतर्गत यथाक्रम मंडप पूजन, गणेश पूजन, षोडश मातृ पूजन, नवगृह पूजन, वास्तु पूजन, अग्नि पूजन, 52 भैरव व 64 योगिनी पूजन किया गया। यजमानों ने दशोविधि स्नान कर मंडप पूजन किया। शतचंडी महायज्ञ के अंतर्गत मंदिर में दो चरणों में यज्ञ का आयोजन किया गया जो देर शाम तक चलता रहा। यजमानों की ओर से पंडितों के सानिध्य में दुर्गा सप्तशती के 20 पाठ के साथ यज्ञ में आहुतियां दी गईं।
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