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Kushinagar News: जिले में बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी गोवर्धन पूजा
Mon, 20 Oct 2025 07:19 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 20 Oct 2025 07:19 PM IST
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पडरौना। पांच दिवसीय दीपावली पर्व का एक दिन गोवर्धन पूजा के नाम से मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा दिवाली के एक दिन बाद यानी कार्तिक मास के द्विज को मनाया जाता है, जिसे अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है लेकिन इस वर्ष गोवर्धन पूजा बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी।
यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण की उस लीला की याद में मनाया जाता है जब उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था। यह दिन प्रकृति, अन्न और पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है।
विजयपुर दक्षिण पट्टी के ज्योतिषाचार्य पंडित मदन मोहन मिश्र ने बताया कि इस वर्ष गोवर्धन पूजा 23 अक्तूबर को मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि गोवर्धन पूजा दीपावली के एक दिन बाद यानी कार्तिक मास के द्विज को मनाया जाता है लेकिन इस वर्ष 22 अक्तूबर की शाम 5:39 बजे सूर्यास्त हो रहा है। सूर्यास्त के बाद बाद शाम 6:18 बजे से द्विज हो रहा है।
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बृहस्पतिवार की रात 8:23 बजे तक द्विज रहेगा। इसलिए बृहस्पतिवार को जिले में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण, गायों और गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं।
गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, वृंदावन में हर साल ग्रामीण इंद्र देव की पूजा करते थे। ताकि वर्षा हो और खेती फले-फूले लेकिन श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि वर्षा का असली कारण पेड़, नदियां और पर्वत है। जब लोगों ने इंद्र की पूजा छोड़ दी तो इंद्र क्रोधित हो गए और मूसलाधार वर्षा करने लगे। तब श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर सभी को सुरक्षित किया। इसी स्मृति में हर वर्ष गोवर्धन पूजा की जाती है।
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यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण की उस लीला की याद में मनाया जाता है जब उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था। यह दिन प्रकृति, अन्न और पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है।
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विजयपुर दक्षिण पट्टी के ज्योतिषाचार्य पंडित मदन मोहन मिश्र ने बताया कि इस वर्ष गोवर्धन पूजा 23 अक्तूबर को मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि गोवर्धन पूजा दीपावली के एक दिन बाद यानी कार्तिक मास के द्विज को मनाया जाता है लेकिन इस वर्ष 22 अक्तूबर की शाम 5:39 बजे सूर्यास्त हो रहा है। सूर्यास्त के बाद बाद शाम 6:18 बजे से द्विज हो रहा है।
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बृहस्पतिवार की रात 8:23 बजे तक द्विज रहेगा। इसलिए बृहस्पतिवार को जिले में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण, गायों और गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं।
गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, वृंदावन में हर साल ग्रामीण इंद्र देव की पूजा करते थे। ताकि वर्षा हो और खेती फले-फूले लेकिन श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि वर्षा का असली कारण पेड़, नदियां और पर्वत है। जब लोगों ने इंद्र की पूजा छोड़ दी तो इंद्र क्रोधित हो गए और मूसलाधार वर्षा करने लगे। तब श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर सभी को सुरक्षित किया। इसी स्मृति में हर वर्ष गोवर्धन पूजा की जाती है।