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गंडक को गंगा नदी से जोड़ने के लिए सर्वे शुरू
कुशीनगर
Updated Mon, 23 May 2016 11:23 PM IST
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गंडक नदी
- फोटो : अमर उजाला
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विद्याधर तिवारी
खड्डा (कुशीनगर)। गंडक को गंगा नदी से जोड़ने की योजना जिले के साथ महराजगंज और बिहार के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए शुभ संकेत है। पर्यटन एवं जलमार्ग विकसित करने के लिए शुरू की गई केंद्र सरकार की यह योजना यदि धरातल पर उतरी तो काफी संख्या में लोगों को बाढ़ और कटान की समस्या से निजात ही नहीं मिलेगी बल्कि हजारों हेक्टेयर जमीन भी उपजाऊ हो सकती है।
कार्ययोजना तैयार करने के लिए सर्वे शुरू होने के बाद इस योजना के फलीभूत होने की आस जग गई है। हिमालय की पर्वत श्रृंखला धौलागिरी पर्वत से निकली बड़ी गंडक नदी नेपाल से निकलकर बिहार के वाल्मीकिनगर बैराज से होते हुए महराजगंज जिले के निचलौल तहसील से यूपी की सीमा में प्रवेश करती है। बाढ़ की तबाही मचाने वाली यह गंडक नदी जिले के खड्डा, पडरौना एवं तमकुही तहसील क्षेत्र से गुजरकर बिहार के पश्चिमी चंपारण एवं अन्य जनपदों से होते हुए पटना के नजदीक सोनपुर के पास गंगा नदी में मिलती है।
16 मई को केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के निर्देश पर मुंबई की निजी संस्था (शंकर एंड कंपनी) की टीम ने सर्वेयर केके सिंह की अगुवाई में नेपाल से सटे बिहार वाल्मीकिनगर के पास गंडक नदी के लवकुश घाट पहुंचकर जायजा लिया। सर्वेयर केके सिंह के अनुसार उनकी टीम वाल्मीकिनगर से सोनपुर गंगा नदी तक जल मार्ग विकसित करने की रूपरेखा तैयार करेगी।
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योजना नदी के रास्ते जलमार्ग विकसित करने की है। इसके लिए नदी की गहराई दो मीटर तक बनाए रखी जाएगी। इस मार्ग से सहजता से सामानों की ढुलाई हो सकेगी तथा पटना और कोलकाता भी सीधे जुड़ जाएंगे। जिससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने बताया कि वह 15 जून तक सर्वे की रिपोर्ट भारत सरकार को सौंप देंगे। अगर केंद्र सरकार की यह योजना धरातल पर उतरती है तो इससे महराजगंज के सोहगी बरवा वन्यप्राणि उद्यान, वाल्मीकिनगर टाइगर प्रोजेक्ट के जंगलों का कटान भी रुक जाएगा।
योजना की निगरानी कर रहे वाल्मीकिनगर के सांसद सतीश दुबे और विधायक रिंकू सिंह भी मानते हैं कि ऐसी ही योजना से इस क्षेत्र का उद्धार संभव है। इस संबंध में कुशीनगर बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता बीपी सिंह एवं सहायक अभियंता बीबी मिश्र के मुताबिक बिहार से शुरू हुए सर्वेक्षण की जानकारी अभी उन्हें नही है, लेकिन अगर नदी जोड़ दी जाती है तो पूरा क्षेत्र खुशहाल हो जाएगा।
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खड्डा (कुशीनगर)। गंडक को गंगा नदी से जोड़ने की योजना जिले के साथ महराजगंज और बिहार के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए शुभ संकेत है। पर्यटन एवं जलमार्ग विकसित करने के लिए शुरू की गई केंद्र सरकार की यह योजना यदि धरातल पर उतरी तो काफी संख्या में लोगों को बाढ़ और कटान की समस्या से निजात ही नहीं मिलेगी बल्कि हजारों हेक्टेयर जमीन भी उपजाऊ हो सकती है।
कार्ययोजना तैयार करने के लिए सर्वे शुरू होने के बाद इस योजना के फलीभूत होने की आस जग गई है। हिमालय की पर्वत श्रृंखला धौलागिरी पर्वत से निकली बड़ी गंडक नदी नेपाल से निकलकर बिहार के वाल्मीकिनगर बैराज से होते हुए महराजगंज जिले के निचलौल तहसील से यूपी की सीमा में प्रवेश करती है। बाढ़ की तबाही मचाने वाली यह गंडक नदी जिले के खड्डा, पडरौना एवं तमकुही तहसील क्षेत्र से गुजरकर बिहार के पश्चिमी चंपारण एवं अन्य जनपदों से होते हुए पटना के नजदीक सोनपुर के पास गंगा नदी में मिलती है।
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16 मई को केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के निर्देश पर मुंबई की निजी संस्था (शंकर एंड कंपनी) की टीम ने सर्वेयर केके सिंह की अगुवाई में नेपाल से सटे बिहार वाल्मीकिनगर के पास गंडक नदी के लवकुश घाट पहुंचकर जायजा लिया। सर्वेयर केके सिंह के अनुसार उनकी टीम वाल्मीकिनगर से सोनपुर गंगा नदी तक जल मार्ग विकसित करने की रूपरेखा तैयार करेगी।
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योजना नदी के रास्ते जलमार्ग विकसित करने की है। इसके लिए नदी की गहराई दो मीटर तक बनाए रखी जाएगी। इस मार्ग से सहजता से सामानों की ढुलाई हो सकेगी तथा पटना और कोलकाता भी सीधे जुड़ जाएंगे। जिससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने बताया कि वह 15 जून तक सर्वे की रिपोर्ट भारत सरकार को सौंप देंगे। अगर केंद्र सरकार की यह योजना धरातल पर उतरती है तो इससे महराजगंज के सोहगी बरवा वन्यप्राणि उद्यान, वाल्मीकिनगर टाइगर प्रोजेक्ट के जंगलों का कटान भी रुक जाएगा।
योजना की निगरानी कर रहे वाल्मीकिनगर के सांसद सतीश दुबे और विधायक रिंकू सिंह भी मानते हैं कि ऐसी ही योजना से इस क्षेत्र का उद्धार संभव है। इस संबंध में कुशीनगर बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता बीपी सिंह एवं सहायक अभियंता बीबी मिश्र के मुताबिक बिहार से शुरू हुए सर्वेक्षण की जानकारी अभी उन्हें नही है, लेकिन अगर नदी जोड़ दी जाती है तो पूरा क्षेत्र खुशहाल हो जाएगा।