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छहूं गांव के एक खेत में मिली खंडित प्रतिमा
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Sun, 15 Apr 2018 12:21 AM IST
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प्रतिमा।
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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तुर्कपट्टी (कुशीनगर)। कसया तहसील क्षेत्र के छहूं गांव में एक किसान के खेत में मिट्टी काटने के दौरान करीब तीन फिट ऊंची खंडित प्रतिमा पाई गई है। पत्थर को काटकर उकेरी गई प्रतिमा देखने से भगवान सूर्य की प्रतीत हो रही है। मुख्य प्रतिमा के अगल-बगल कई अन्य देवी-देवताओं के छोटे-छोटे चित्र भी बनाए गए हैं। इतिहासकार इस प्रतिमा के भी गुप्तकालीन होने की संभावना जता रहे हैं। हालांकि इसकी पुष्टि के लिए तमाम प्रक्रियाओं की बात भी कही जा रही है।
शनिवार को दोपहर में छहूं गांव स्थित शिव मंदिर से करीब 50 मीटर दूर रामअवध दूबे अपने खेत में मिट्टी कटवा रहे थे। इसी दौरान मजदूरों का फावड़ा किसी सख्त वस्तु से टकराया। उक्त स्थल की खुदाई कराने पर वहां एक सिर विहीन प्रतिमा मिली। प्रतिमा एक ही पत्थर को काटकर उकेरी गई है। मिट्टी हटाने के बाद उसे धो-पोंछकर देखा गया तो वह भगवान सूर्य की प्रतिमा जैसी दिखी। प्रतिमा पर सात घोड़ों के चिह्न के साथ ही कई अन्य देवी देवताओं का चित्र भी उकेरा गया है। जानकारों का कहना है कि मूर्ति प्रथम दृष्टया गुप्तकालीन प्रतीत हो रही है। बाद में इस प्रतिमा का सिर भी कुछ ही दूरी पर मिल गया। गांव के केदार ओझा, कन्हैया यादव, चुन्नू दुबे, संजय ओझा, भरत सिंह आदि ने खंडित प्रतिमा को उठाकर बगल में स्थित शिव मंदिर परिसर में रख दिया है।
इस सम्बंध में प्रसिद्ध इतिहासकार महाबीर प्रसाद कंदोई ने बताया कि पूरे क्षेत्र के टीलों में इतिहास के रहस्य छुपे हैं । इनका उत्खन किया जाना चाहिए। अगल-बगल के इन टीलों को संरक्षित किया जाना भी जरूरी है।
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शनिवार को दोपहर में छहूं गांव स्थित शिव मंदिर से करीब 50 मीटर दूर रामअवध दूबे अपने खेत में मिट्टी कटवा रहे थे। इसी दौरान मजदूरों का फावड़ा किसी सख्त वस्तु से टकराया। उक्त स्थल की खुदाई कराने पर वहां एक सिर विहीन प्रतिमा मिली। प्रतिमा एक ही पत्थर को काटकर उकेरी गई है। मिट्टी हटाने के बाद उसे धो-पोंछकर देखा गया तो वह भगवान सूर्य की प्रतिमा जैसी दिखी। प्रतिमा पर सात घोड़ों के चिह्न के साथ ही कई अन्य देवी देवताओं का चित्र भी उकेरा गया है। जानकारों का कहना है कि मूर्ति प्रथम दृष्टया गुप्तकालीन प्रतीत हो रही है। बाद में इस प्रतिमा का सिर भी कुछ ही दूरी पर मिल गया। गांव के केदार ओझा, कन्हैया यादव, चुन्नू दुबे, संजय ओझा, भरत सिंह आदि ने खंडित प्रतिमा को उठाकर बगल में स्थित शिव मंदिर परिसर में रख दिया है।
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इस सम्बंध में प्रसिद्ध इतिहासकार महाबीर प्रसाद कंदोई ने बताया कि पूरे क्षेत्र के टीलों में इतिहास के रहस्य छुपे हैं । इनका उत्खन किया जाना चाहिए। अगल-बगल के इन टीलों को संरक्षित किया जाना भी जरूरी है।
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