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Kushinagar News: विदेशी पर्यटकों ने विश्व शांति के लिए की विशेष पूजा
Mon, 11 Sep 2023 01:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 11 Sep 2023 01:15 AM IST
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स्तूप की चीवर लेकर परिक्रमा करते कोरिया के बौद्ध अनुयायी।
पकवा इनार। भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में विदेशी पर्यटक की संख्या बढ़ गई है। विभिन्न देश के पर्यटक यहां की संस्कृति और पुरातात्विक इतिहास से परिचित हो रहे हैं। उनके आगमन से कुशीनगर से चहल-पहल बढ़ गई है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर, रामाभार स्तूप व मांथा कुंवर मंदिर में पर्यटक भगवान बुद्ध की विशेष पूजा अर्चना कर रहे हैं। रविवार को विभिन्न देशों के पर्यटकों ने विश्व शांति के लिए विशेष पूजा की।
रविवार सूर्योदय के बाद करीब सुबह 6:30 बजे श्रीलंका के 31 बौद्ध श्रद्धालुओं ने मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में छठवीं शताब्दी लेटी भगवान बुद्ध की प्रतिमा को शीश नवाकर दर्शन किया। विशेष पूजा-अर्चना व चीवर चढ़ाया। दूसरा श्रीलंका का ही नौ सदस्यीय बौद्ध अनुयायियों का दल करीब सात बजे पहुंचा। दोपहर बाद करीब तीन बजे श्रीलंका के ही 29 सदस्यों का दल पुरातत्व पार्किंग स्थल से मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में प्रवेश किया, जहां उत्खनित अवशेषों की विशेष जानकारी हासिल की। अनुयायियों ने बताया कि कुशीनगर पूजनीय व दर्शनीय पवित्र स्थल है। चार बजे 38 सदस्यों का आगमन हुआ। जो बोधगया से कुशीनगर पहुंचे थे। यह दल सोमवार को भगवान बुद्ध की जन्मस्थली नेपाल के लुंबिनी जाएगा। वहीं म्यांमार बुद्ध विहार प्रवेश द्वार से सुबह करीब सात बजे 110 वियतनाम के बौद्ध अनुयायी पहुंचे। मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में भगवान की आराधना कर विश्व शांति के लिए प्रार्थना किया। इसके अलावा सुबह 11 बजे 43 वियतनाम के बौद्ध धर्मावलंबी और 3:30 बजे सिंगापुर के 14 बौद्ध तीर्थ यात्री पहुंचे। वे भगवान बुद्ध की भू-स्पर्श मुद्रा में मांथा कुंवर मंदिर में फूल चढ़ाकर और मंत्रोच्चार किया। इसके बाद मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर पहुंचा, जहां चीवर चढाकर शीश नवाया और विश्व में शांति के लिए विशेष प्रार्थना की। 4:30 बजे 13 कोरियन अनुयायी पहुंचे। इनमें दो बौद्ध अनुयायी दिव्यांग थे। वे व्हील चेयर से मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर पहुंचे और भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर चीवर चढ़ाकर शीश नवाया।
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कोरिया दल का कैमरा अंदर जाने से रोका
फोटोग्राफी के लिए 13 सदस्यीय बौद्ध अनुयायियों का दल दक्षिणी द्वार से प्रवेश किया। जहां पंजिका में इंट्री के बाद फोटोग्राफी के लिए ले जा रहे कैमरे को तैनात सुरक्षा कर्मी ने नियमानुसार ले जाने से रोका। इसको लेकर मामूली बहस भी हुई, लेकिन कैमरा अंदर नहीं जाने दिया गया। वहीं प्रवेश के बाद अंदर चीवर पहुंचाने को लेकर भी मामूली कहासुनी हुई। जिसके लिए दल के एक सदस्य को चीवर का गट्ठर लेने के लिए इंट्री स्थल पर आना पड़ा।
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रविवार सूर्योदय के बाद करीब सुबह 6:30 बजे श्रीलंका के 31 बौद्ध श्रद्धालुओं ने मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में छठवीं शताब्दी लेटी भगवान बुद्ध की प्रतिमा को शीश नवाकर दर्शन किया। विशेष पूजा-अर्चना व चीवर चढ़ाया। दूसरा श्रीलंका का ही नौ सदस्यीय बौद्ध अनुयायियों का दल करीब सात बजे पहुंचा। दोपहर बाद करीब तीन बजे श्रीलंका के ही 29 सदस्यों का दल पुरातत्व पार्किंग स्थल से मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में प्रवेश किया, जहां उत्खनित अवशेषों की विशेष जानकारी हासिल की। अनुयायियों ने बताया कि कुशीनगर पूजनीय व दर्शनीय पवित्र स्थल है। चार बजे 38 सदस्यों का आगमन हुआ। जो बोधगया से कुशीनगर पहुंचे थे। यह दल सोमवार को भगवान बुद्ध की जन्मस्थली नेपाल के लुंबिनी जाएगा। वहीं म्यांमार बुद्ध विहार प्रवेश द्वार से सुबह करीब सात बजे 110 वियतनाम के बौद्ध अनुयायी पहुंचे। मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में भगवान की आराधना कर विश्व शांति के लिए प्रार्थना किया। इसके अलावा सुबह 11 बजे 43 वियतनाम के बौद्ध धर्मावलंबी और 3:30 बजे सिंगापुर के 14 बौद्ध तीर्थ यात्री पहुंचे। वे भगवान बुद्ध की भू-स्पर्श मुद्रा में मांथा कुंवर मंदिर में फूल चढ़ाकर और मंत्रोच्चार किया। इसके बाद मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर पहुंचा, जहां चीवर चढाकर शीश नवाया और विश्व में शांति के लिए विशेष प्रार्थना की। 4:30 बजे 13 कोरियन अनुयायी पहुंचे। इनमें दो बौद्ध अनुयायी दिव्यांग थे। वे व्हील चेयर से मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर पहुंचे और भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर चीवर चढ़ाकर शीश नवाया।
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कोरिया दल का कैमरा अंदर जाने से रोका
फोटोग्राफी के लिए 13 सदस्यीय बौद्ध अनुयायियों का दल दक्षिणी द्वार से प्रवेश किया। जहां पंजिका में इंट्री के बाद फोटोग्राफी के लिए ले जा रहे कैमरे को तैनात सुरक्षा कर्मी ने नियमानुसार ले जाने से रोका। इसको लेकर मामूली बहस भी हुई, लेकिन कैमरा अंदर नहीं जाने दिया गया। वहीं प्रवेश के बाद अंदर चीवर पहुंचाने को लेकर भी मामूली कहासुनी हुई। जिसके लिए दल के एक सदस्य को चीवर का गट्ठर लेने के लिए इंट्री स्थल पर आना पड़ा।
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