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आम बजट किसान, युवा, छात्र, गृहिणी समेत कई वर्गों के लोगों में निराशा

Wed, 01 Feb 2017 11:21 PM IST
कुशीनगर/ अमर उजाला ब्यूरो
कुशीनगर/ अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 01 Feb 2017 11:21 PM IST
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Farmers, youth, student, homemaker, including sections in despair
आम बजट पर प्रतिक्रिया - फोटो : अमर उजाला
आम बजट...
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केंद्रीय वित्त मंत्री के आम बजट पर प्रतिक्रिया
किसान, युवा, छात्र, गृहणी समेत कई वर्गों के लोगों में निराशा
फोटो है। 

अमर उजाला ब्यूरो 
पडरौना। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की ओर से बुधवार को पेश किए गए आम बजट में किसान, युवा, विद्यार्थी और गृहणियों के अलावा कई अन्य वर्गों के कुछ लोगों ने अपने लिए अपेक्षित सुविधाएं बजट में न शामिल किए जाने पर निराशा जताई। उनका कहना था कि पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी उनकी उम्मीद लायक इस बजट में नहीं दिखा।
बरवा महादेवा निवासी किसान रामवृक्ष पांडेय ने कहा कि आम बजट में किसानों के लिए कोई नई सुविधा नहीं दी गई है। पेश बजट से किसानों को कोई फायदा नहीं होने वाला है। 
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अमवा बाजार निवासी किसान राजेश राय ने कहा कि बजट से उम्मीद थी लेकिन किसानों की मदद के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। 
अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कहा कि इनकम टैक्स की निर्धारित की गई सीमा महंगाई के मुताबिक कम है। इसकी सीमा 5 लाख रुपये तक की जानी चाहिए। ताकि अर्थव्यवस्था पारदर्शी बनी रहे। 
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अधिवक्ता पंकज तिवारी ने कहा कि बजट में युवाओं के लिए कुछ नहीं है। वहीं अधिवक्ताओं को बजट से काफी अच्छी उम्मीद थी लेकिन अपेक्षित घोषणा नहीं हुई। 
प्रदीप श्रीवास्तव का कहना है कि आम लोगों के लिए इस बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। इसके चलते आम जनता को राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है। 
आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि बजट मेें आम जनता का ख्याल नहीं रखा गया। पेश बजट से सबसे अधिक गरीब और मध्यम वर्ग के लोग प्रभावित होंगे। 
युवा सुनील यादव का कहना है कि पेश बजट में युवाओं को रोजगार देने के लिए बात कहीं गई है, लेकिन वह काफी अव्यवहारिक लगता है। 
युवा अंकित लोहिया ने कहा कि बजट से काफी उम्मीद थी, लेकिन पेश बजट में युवाओं के लिए कुछ खास नहीं किया गया है। 
छात्रा प्रियंका गुप्ता ने कहा कि शिक्षा के विकास के लिए सरकार की ओर से पेश बजट में कुछ हालात सुधारने के प्रयास किए गए हैं लेकिन वह नाकाफी हैं। 
छात्रा अनामिका गुप्ता का कहना था कि शिक्षा के गुणात्मक सुधार के लिए बजट में अहम फैसले नहीं लिए गए हैं। 
वहीं गृहिणी साधना ने कहा कि पेश किए बजट में गृहणियों के लिए भी कुछ खास नहीं किया गया। हालांकि गृहणियों के चूल्हे को धुंआ मुक्त करने के लिए उज्जवला योजना के तहत गैस बांटे गए हैं, जिससे कुछ हद तक राहत मिली है। 
गृहिणी विनीता मल्ल ने कहा कि बजट में गृहपयोगी वस्तुओं में रसोई से जुड़ी सामानों के दामों पर किसी तरह की कटौती और राहत देने के लिए कोई जिक्र नहीं किया गया है। इससे गृहणियों के किचन की व्यवस्था लड़खड़ा सकती है। 

केंद्र सरकार के आम बजट को लेकर क्षेत्र के लोगों में कोई खास उत्साह देखने को नहीं मिला। लोगों को उम्मीद थी कि बजट में कुशीनगर को रेल पथ से जोड़ने तथा गन्ना किसानों को राहत देने की घोषणा हो सकती है। क्षेत्र के कारोबारी, शिक्षक भी उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन उनके हिस्से भी कुछ खास नहीं आया। आयकरदाता शिक्षकों ने पांच लाख तक की रकम को टैक्स से मुक्त रखने उम्मीद की थी, जो तीन लाख रुपये पर आकर रुक गई। इन लोगों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच पांच लाख रुपये तक की आय वालों को इनकम टैक्स से अलग रखना चाहिए था।
कसया के व्यवसायी अश्वनी जायसवाल का कहना है कि कुशीनगर को रेल पथ से जोड़ने की मांग काफ ी दिनों से हो रही है। प्रधानमंत्री के कसया हवाईपट्टी पर आने के बाद उम्मीद जगी थी, जो पूरी नहीं हो सकी। आम बजट में इस प्रकार की घोषणा की उम्मीद थी, लेकिन निराशा हाथ लगी।
पुरंदरपुर के राणा प्रताप सिंह का कहना था कि कभी कुशीनगर चीनी का कटोरा कहा जाता था। कई चीनी मिलें बंद हो गईं। इधर, महंगाई से खेती की लागत भी बढ़ी है, लेकिन गन्ना के समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी नहीं हुई। ओलावृष्टि और सूखे से परेशान हो रहे किसानों के लिए फसल बीमा की राशि उनकी लागत के अनुसार किए जाने की स्पष्ट घोषणा की जानी चाहिए थी।
बेलवा बुजुर्ग के ग्राम प्रधान अनिल कुमार निर्मल का कहना है कि गांवों के विकास के लिए अलग से एक कार्ययोजना की घोषणा की जानी चाहिए थी। जनपद में बिजली समस्या को देखते हुए सोलर प्लांट आधारित बिजली सिस्टम के विकास के लिए धन का आवंटन किया जाना चाहिए। हर गांव को दो मोबाइल शौचालय का बजट मिलना चाहिए था, ताकि स्वच्छता अभियान को गति मिले ।
कसया की ममता शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में आसन्न विधान सभा चुनाव को देखते हुए कुशीनगर वासियों को काफी उम्मीदें थीं। लेकिन बजट सामान्य रहा। इसमें कुशीनगर में पर्यटन के विकास के लिए ठोस उपाय नहीं किया गया। बाहर से आने वाले सैलानियों के लिए मोबाइल एटीएम की व्यवस्था, महिला हॉस्टल तथा सरकार की ओर से पर्यटन वाहन जैसी मूलभूत सुविधा के लिए बजट आवंटित किया जाना चाहिए।
शिक्षिक ममता सिंह का कहना था कि महिलाओं के लिए कर दायरे को और सरल किया जाना चाहिए था। कम से कम पांच लाख तक की आमदनी पर महिलाओं से आयकर के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। कास्मेटिक आइटम पर टैक्स घटाना चाहिए। साथ ही रेल और हवाई टिकट में महिलाओं को 50 प्रतिशत छूट दिया जाना चाहिए था।

फाजिलनगर में शिक्षण कार्य कर रही मथुरा की वितोष टैंगुरियार का कहना है कि बजट से काफ ी निराशा हुई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित किए जाने का प्राविधान किया गया होता। महिलाओं को मकान भत्ता अधिक दिया जा सकता था। परिषदीय शिक्षकों को भी राज्य कर्मचारियों की भांति सुविधाओं को देने का एलान नहीं हुआ। टू व्हीलर या फोर व्हीलर खरीदने वाली महिलाओं को छूट मिलनी चाहिए थी। बस, रेल के किराए में कमी भी की जा सकती थी, जो नहीं की गई।
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