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Kushinagar News: पर्यावरण संरक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार
Sat, 21 Mar 2026 03:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 21 Mar 2026 03:09 AM IST
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पडरौना। पर्यावरण संरक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है, जो टिकाऊ कृषि, वन उपज, और ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से आजीविका को मजबूत बनाता है। मृदा संरक्षण, जल संचयन, और जैविक खेती जैसी विधियां न केवल उत्पादन लागत कम करती हैं, बल्कि स्थायी रोजगार पैदा कर स्थानीय संसाधनों पर आधारित आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती हैं। इस लिए लोगों को वन्य संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए।
ये बातें कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया के मौसम वैज्ञानिक श्रुति वी सिंह ने कही। उन्होंने बताया कि 21 मार्च को अंतरराष्ट्रीय वन दिवस मनाया जाएगा। इस वर्ष की थीम “वन और अर्थव्यवस्था’’ है। उन्होंने कहा कि वन न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं आजीविका को सुदृढ़ बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वनों से प्राप्त लकड़ी, फल, चारा, औषधीय पौधे एवं अन्य वनोपज किसानों की आय बढ़ाने के साथ रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने बताया कि इन दिनों एग्रोफॉरेस्ट्री प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रहा है, जिसमें एक ही भूमि पर वृक्षों एवं फसलों को साथ-साथ उगाया जाता है। यह प्रणाली किसानों को अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक दोनों प्रकार की आय बढ़ाने का अवसर देती है।
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उन्होंने बताया कि कुशीनगर में पॉपलर/यूकेलिप्टस के साथ गेहूं, मक्का एवं दलहनी फसलें, आम आधारित बागवानी के साथ सब्जियां एवं दलहन, और नीम, शीशम, सागौन एवं सहजन जैसे पौधों को खेत की मेड़ अथवा सीमांत भूमि पर लगाकर किसान लाभान्वित हो सकते हैं। ऐसा करने से भूमि की उर्वरता, जल संरक्षण एवं जैव विविधता को भी बढ़ावा देते हैं। भूमि की उर्वरता, जल संरक्षण एवं जैव विविधता को भी बढ़ावा देना जरूरी है।
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ये बातें कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया के मौसम वैज्ञानिक श्रुति वी सिंह ने कही। उन्होंने बताया कि 21 मार्च को अंतरराष्ट्रीय वन दिवस मनाया जाएगा। इस वर्ष की थीम “वन और अर्थव्यवस्था’’ है। उन्होंने कहा कि वन न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं आजीविका को सुदृढ़ बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वनों से प्राप्त लकड़ी, फल, चारा, औषधीय पौधे एवं अन्य वनोपज किसानों की आय बढ़ाने के साथ रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं।
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उन्होंने बताया कि इन दिनों एग्रोफॉरेस्ट्री प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रहा है, जिसमें एक ही भूमि पर वृक्षों एवं फसलों को साथ-साथ उगाया जाता है। यह प्रणाली किसानों को अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक दोनों प्रकार की आय बढ़ाने का अवसर देती है।
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उन्होंने बताया कि कुशीनगर में पॉपलर/यूकेलिप्टस के साथ गेहूं, मक्का एवं दलहनी फसलें, आम आधारित बागवानी के साथ सब्जियां एवं दलहन, और नीम, शीशम, सागौन एवं सहजन जैसे पौधों को खेत की मेड़ अथवा सीमांत भूमि पर लगाकर किसान लाभान्वित हो सकते हैं। ऐसा करने से भूमि की उर्वरता, जल संरक्षण एवं जैव विविधता को भी बढ़ावा देते हैं। भूमि की उर्वरता, जल संरक्षण एवं जैव विविधता को भी बढ़ावा देना जरूरी है।