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Kushinagar News: एक दशक में आठ अरब खर्च फिर भी भरोसेमंद नहीं तटबंध

Mon, 25 May 2026 01:53 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2026 01:53 AM IST
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Eight Billion Spent Over a Decade, Yet Embankments Remain Unreliable
कुशीनगर। नारायणी नदी की बाढ़ से तटवर्ती गांवों को बचाने के लिए एपी बांध, नरवाजोत बांध और छितौनी तटबंध पर पिछले एक दशक में करीब आठ अरब रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद तटबंधों की सुरक्षा को लेकर लोग आश्वस्त नहीं है। जैसे-जैसे मानसून का समय नजदीक आ रहा है, लोगों में भय बढ़ता जा रहा है। कई स्थानों पर तटबंधों की सुरक्षा के लिए बनाए गए स्पर और नोज क्षतिग्रस्त हो चुके हैं जबकि परक्यूपाइन हर वर्ष बह जाते हैं।
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इस वर्ष भी तटबंधों की सुरक्षा के लिए 32.71 करोड़ रुपये की तीन परियोजनाओं पर काम चल रहा है। जानकारों का कहना है कि काम की गति इतनी सुस्त है कि 15 जून तक परियोजनाओं का पूरा होना संभव नहीं है। बांध को सुरक्षित करने की जरूरत है। बांध पर कई ऐसे स्थान हैं, जहां बचाव कार्य नहीं हुए तो समीपवर्ती गांव खतरे में पड़ सकते हैं। सेवरही क्षेत्र में नरवाजोत से अहिरौलीदान तक करीब साढ़े 17 किलोमीटर लंबाई में गंडक नदी बहती है। नदी के कटान और बाढ़ से बचाव के लिए वर्ष 2021 से 2025 तक विभिन्न परियोजनाओं के तहत 197.51 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। अस्थायी उपायों के कारण हर वर्ष नए सिरे से बचाव कार्य की जरूरत पड़ रही है।
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