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Kushinagar News: छोटे बच्चों के हाथ में न दें मोबाइल फोन, बोलने में हो सकती है देरी
Sun, 24 Sep 2023 12:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 24 Sep 2023 12:41 AM IST
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- अधिक समय तक टीवी देखने वाले दो वर्ष के बच्चों में हो रही है नींद न आने की दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। अक्सर महिलाएं बच्चों को उलझाए रखने के लिए उन्हें मोबाइल फोन या टीवी के पास बैठा कर कार्य करने लगती हैं। उन्हें इससे बचना चाहिए। दो साल तक के बच्चों को टीवी भी न दिखाएं और न ही उन्हें मोबाइल दें। इससे बच्चों में बोलने में देरी व नींद में नहीं आने की समस्या बढ़ सकती है।अक्सर घर में शोर शराबा करने पर बच्चों को बहलाने के लिए उनके माता-पिता या अन्य परिजन मोबाइल चलाने के लिए दे देते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एस प्रसाद ने बताया कि बच्चों के देर से बोलने की एक वजह मोबाइल, टीवी भी हो सकते हैं। दो साल तक के बच्चों को, तो इनसे पूरी तरह दूर रखना चाहिए। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेश वर्मा ने बताया कि मोबाइल या टीवी देख कर व्यस्त रहने वाला बच्चा दूसरों से संवाद बहुत कम करता है। वह इशारों में अपनी बातें कहने लगता है। यही वजह उसके बोलने में देरी का कारण बन सकती है। साथ ही स्क्रीन की नीली रोशनी नींद कम होने का कारण बन सकती है। हर दिन एक से दो अभिभावक बच्चों को लेकर आते हैं। वे बच्चों को नींद नहीं आने और बड़े होने के बाद भी नहीं बोलने या कम बाेलने की शिकायत करते हैं। बुद्ध पीजी कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर अमृतांशु शुक्ल ने बताया कि ज्यादा मोबाइल देखने से मानसिक विकास पर असर पड़ता है। मोबाइल समेत अन्य अत्याधुनिक इलेक्ट्रानिक उपकरण का प्रयोग बच्चों को न्यूनतम करना चाहिए। बहुत जरूरी होने पर ही अभिभावकों की देखरेख में उपयोग करना चाहिए।0000000इन बातों का दें ध्यान- एक साल में बच्चा दो शब्द बोलने लगता है।- डेढ़ साल में 20 से 25 शब्द तक बोलता है।- दो साल में 50 शब्द या वाक्य बोलने लगता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। अक्सर महिलाएं बच्चों को उलझाए रखने के लिए उन्हें मोबाइल फोन या टीवी के पास बैठा कर कार्य करने लगती हैं। उन्हें इससे बचना चाहिए। दो साल तक के बच्चों को टीवी भी न दिखाएं और न ही उन्हें मोबाइल दें। इससे बच्चों में बोलने में देरी व नींद में नहीं आने की समस्या बढ़ सकती है।अक्सर घर में शोर शराबा करने पर बच्चों को बहलाने के लिए उनके माता-पिता या अन्य परिजन मोबाइल चलाने के लिए दे देते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एस प्रसाद ने बताया कि बच्चों के देर से बोलने की एक वजह मोबाइल, टीवी भी हो सकते हैं। दो साल तक के बच्चों को, तो इनसे पूरी तरह दूर रखना चाहिए। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेश वर्मा ने बताया कि मोबाइल या टीवी देख कर व्यस्त रहने वाला बच्चा दूसरों से संवाद बहुत कम करता है। वह इशारों में अपनी बातें कहने लगता है। यही वजह उसके बोलने में देरी का कारण बन सकती है। साथ ही स्क्रीन की नीली रोशनी नींद कम होने का कारण बन सकती है। हर दिन एक से दो अभिभावक बच्चों को लेकर आते हैं। वे बच्चों को नींद नहीं आने और बड़े होने के बाद भी नहीं बोलने या कम बाेलने की शिकायत करते हैं। बुद्ध पीजी कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर अमृतांशु शुक्ल ने बताया कि ज्यादा मोबाइल देखने से मानसिक विकास पर असर पड़ता है। मोबाइल समेत अन्य अत्याधुनिक इलेक्ट्रानिक उपकरण का प्रयोग बच्चों को न्यूनतम करना चाहिए। बहुत जरूरी होने पर ही अभिभावकों की देखरेख में उपयोग करना चाहिए।0000000इन बातों का दें ध्यान- एक साल में बच्चा दो शब्द बोलने लगता है।- डेढ़ साल में 20 से 25 शब्द तक बोलता है।- दो साल में 50 शब्द या वाक्य बोलने लगता है।